वैचारिक विभाजन की डिजिटल रचनात्मकता का साल
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December 31, 2020

साहित्य की दुनिया 2020 हर साल की तरह इस बार भी जनवरी में जब दिल्ली के प्रगति मैदान में विश्व पुस्तक मेले की शुरुआत हुई तो लगा जैसे 2020 साहित्य और लेखन के क्षेत्र में कुछ नए बदलाव लाएगा। लोगों में किताबें पढ़ने की ललक भी बढ़ेगी और साहित्यिक चर्चाओं और बहसों का सिलसिला और तेज होगा। कुछ हद तक ऐसा हुआ भी। कम से कम पुस्तक मेले के दौरान सौ से ज्यादा नई किताबों का विमोचन हुआ, चर्चाएं ह

2020 ने क्या बदला, 2021 क्या लेकर आएगा…
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December 31, 2020

स्वागत कीजिए 2021 का... क्या खोया, क्या पाया... जीवन शैली, सोच और रचनात्मकता के नए तौर तरीके ‘ज़िंदगी और मौत तो ऊपर वाले के हाथ में है जहांपनाह, हमसब तो रंगमंच की कठपुतलियां हैं जिनकी डोर ऊपर वाले के हाथ में है... कब, कौन, कैसे उठेगा कोई नहीं जानता...

‘इन दिनों कोई किसी को अपना दुख नहीं बताता’
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December 10, 2020

एक बेचैन और संवेदनशील कवि का यूं चला जाना...

पिछले साल अपने घर पर अपनी किताब ‘एक सड़क एक जगह’ की प्रति भेंट करते हुए मंगलेश जी ने लखनऊ की वो तमाम यादें ताजा कर दीं जब उनका पहला कविता संग्र

भारतीय संस्कृति की प्रखर प्रवक्ता थीं कपिला जी…
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September 16, 2020

आज जिस इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र के सदस्य सचिव के तौर पर डॉ सच्चिदानंद जोशी के कंधे पर संस्कृति के इस विशाल केन्द्र की जिम्मेदारी है, वह केन्द्र अगर बना तो उसके पीछे कपिला वात्स्यायन की दूरदृष्टि थी। कपिला जी इसके संस्थापकों में रहीं और जोशी जी उनकी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। जोशी जी ने जो बेहतरीन काम किया वो ये कि उन्होंने कपिला जी को पूरा सम्मा

और अब कपिला जी भी साथ छोड़ गईं…
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September 16, 2020

इस कोरोना काल ने बहुतों को हमसे छीना है। कुछ तो उम्र के उस पड़ाव पर थे, तो कुछ असमय ही अलविदा कह गए। देश में सांस्कृतिक चेतना और इसके विस्तार के क्षेत्र में अद्भुत योगदान देने वाली कपिला वात्यायन भी आखिरकार चली गईं।   कपिला जी बे

वरिष्ठ पत्रकार त्रिलोक दीप की नज़र में सर्वेश्वर
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September 15, 2020

जाने माने पत्रकार और दिनमान के शुरुआती दिनों से ही अज्ञेय, रघुवीर सहाय और सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जैसे साहित्यकारों के साथ काम करने वाले त्रिलोक दीप आज भी जब उन दिनों की याद करते हैं तो मानो वो सारी तस्वीरें सजीव हो जाती हैं। त्रिलोक जी ने 7 रंग से फोन पर अपने अनुभव साझा किए जिसे हम उनकी आवाज़ में पेश कर रहे हैं... साथ ही उन्होंने अपने फेसबुक पर उन दिनों के बारे में और

पाश : हमारे वक्त का ‘सबसे खतरनाक कवि’
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September 9, 2020

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हम लड़ेंगे कि लड़ने के बग़ैर कुछ भी नहीं मिलता हम लड़ेंगे कि अब तक लड़े क्यों नहीं हम लड़ेंग

हबीब साहब का सपना पूरा करना अभी बाकी है…
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September 1, 2020

जाने माने रंगकर्मी  और  अपने दौर के जबरदस्त नाटककार  हबीब तनवीर पर बहुत कुछ लिखा जाता रहा है... उनके नाटकों पर, उनके व्यक्तित्व पर और कभी समझौता न करने वाले उनके मिजाज़ पर। उनके जन्मदिन और पुण्यतिथि पर उन्हें रंगकर्मी अपने अपने तरीके से याद करते हैं... कोई उनके तमाम नाटकों की बात करता है, कोई उनके सामाजिक सरोकार को याद करता है तो कोई नाटकों के प्रति उनके समर्पण के बारे में ब

अकल बड़ी या भैंस…
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August 30, 2020

देख तमाशा दुनिया का.... आलोक यात्री की कलम से "अकल बड़ी या भैंस?" यह जुमला आपने भी अक्सर सुना होगा। दुनिया के तमाम सियाने आज तक इस सवाल का जवाब नहीं तलाश पाए। आए दिन हमारे सामने कई ऐसे मसले आते हैं जो अटकल लगाने पर मजबूर कर देते हैं कि अकल बड़ी या भैंस? अब ताजा म

‘न थका न रुका न हटा न झुका’
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August 19, 2020

आज भी बहुत प्रासंगिक हैं आचार्य हज़ारी प्रसाद द्विवेदी.... उनकी रचनाओं में सांस्कृतिक-साहित्यिक अभिव्यक्तियों के तमाम आयाम हैं... -- प्रेरणा मिश्रा रजनीदिन नित्य चला ही किया मैं अनंत की गोद में खेला हुआ

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