दुनिया एक रंगमंच है और हमसब इस रंगमंच की कठपुतलियां हैं। किसी ने ये पंक्तियां यूं ही नहीं कह दीं। अगर आप गहराई से देखें तो हम सब कहीं न कहीं ज़िन्दगी में हर रोज़ कोई न कोई किरदार होते हैं और हर पल हमारे हाव भाव, बोलचाल का अंदाज़ और तमाम घटनाक्रमों के बीच हमारी भूमिका एक नई कहानी गढ़ती है। भारतीय रंगमंच की परंपरा बेहद समृद्ध है और ये कहीं न कहीं हमारे जीवन के तमाम पहलुओं को स्वांग के ज़रिये सामने लाती है। फिल्मों और टेलीविज़न के आने के बाद से रंगमंच की दुनिया में हलचल मच गई और इसके अस्तित्व पर सवाल उठाए जाने लगे। लेकिन हर दौर में देश के तमाम हिस्सों में रंगमंच उसी शिद्दत के साथ मौजूद है और रहेगा। इसकी अपनी दुनिया है और अपने दर्शक हैं। यहां भी नए नए प्रयोग होते रहते हैं और देश भर में लगातार नाटकों का मंचन होता रहता है। कहां क्या हो रहा है, रंगमंच आज किस दौर में है, कौन कौन से प्रयोग हो रहे हैं, कलाकारों की स्थिति क्या है, पारंपरिक और लोक रंगमंच आज कहां खड़ा है – ऐसी तमाम जानकारियां इस खंड में।


रंगमंच
सतीश आनंद ने बदला पटना का रंगमंच और रंग बोध
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August 30, 2026

सतीश आनंद का जाना बेशक हिन्दी रंगमंच और खासकर पटना और बिहार के रंगमंच के लिए एक बड़ा शून्य पैदा करता है... बेशक तीश आनंद ने उस दौर में पटना में रंगमंच को एक नई दिशा दी और रंगकर्मियों को एक बड़ा मंच दिया जब साहित्य संस्कृति और खासकर रंगमंच एक मुश्किल दौर में था, दर्शकों को मंच तक लाना एक चुनौती थी और इसे समाज से जोड़कर एक सार्थक मिशन की तरह आगे ले जाना भी आसान नहीं था.. वो दौर था जब कालीदास र

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NSD के ग्रीष्मकालीन थिएटर महोत्सव में 10 नाटक
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May 7, 2026

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक चितरंजन त्रिपाठी ने कहा है कि अभी भारतीय रंगमंच को ए आई (कृतिम बुद्धिमत्ता ) से कोई खतरा नहीं  है क्योंकि उसमें अभी वह सृजनात्मकता नहीं है। उन्होंने कहा कि मुंबई में 5 लाख रुपए में एनएसडी छात्रों को प्रशिक्षित करेगी और डिप्लोमा देगी।  त्रिपाठी ने एनएसडी के ग्रीष्मकालीन थिएटर समारोह की जानकारी देते हुए पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में यह बात कही।

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‘बाहर से भीतर की यात्रा है रंगकर्म’
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February 17, 2026

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के पूर्व निदेशक और “कहानी के रंगमंच” के प्रणेता देवेंद्र राज अंकुर ने कहा है कि भरत मुनि के” नाट्यशास्त्र” पर जब भी चर्चा हुई है उसमें वर्णित अभिनय पक्ष पर चर्चा बहुत कम हुई है जबकि भरत मुनि के उस ग्रन्थ में सर्वाधिक जिक्र अभिनय का ही किया गया है। भारंगम के श्रुति कार्यक्रम में देवेन्द्र राज अंकुर ने ये बात कही। उनकी लिखी पुस्तक 'भरत मुनि के नाट्यशास्त्र

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‘सांस्कृतिक पत्रकारिता में ऐतिहासिक काम किया है “रंगप्रसंग“ ने’
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February 15, 2026

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की पत्रिका “रंग प्रसंग”  के 59वें अंक के लोकार्पण  के दौरान वक्ताओं ने सांस्कृतिक पत्रकारिता के तमाम पहलुओं पर चर्चा की और आज के दौर में इसे हाशिए पर पहुंच जाने के संकट पर भी बात की। भारंगम के ’श्रुति ‘ कार्यक्रम में “रंग प्रसंग” के पूर्व संपादक और प्रसिद्ध कवि तथा कला समीक्षक प्रयाग शुक्ल, एनएसडी के निदेशक चितरंजन त्रिपाठी, पत्रिका की अतिथि संपादक शशि प्

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नाटक करने करने वालों के भीतर भी नाटक होता रहता है
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February 13, 2026

प्रसिद्ध रंग समीक्षक रवींद्र त्रिपाठी ने कहा है कि हमेशा से रंगमंच का संकट मौजूद रहा है, यहां तक कि भरत मुनि के काल में भी और नाटक करने वालों के भीतर भी एक नाटक होता रहता है। उनका कहना है कि यह सच है कि एनएसडी से इब्राहिम अल्का जी के ज़माने में एक से एक दिग्गज कलाकार सामने आए पर हिंदी रंगमंच का कभी कोई स्वर्णकाल नहीं रहा और स्वर्ण काल की अवधारणा भी एक तरह का भ्रम है लेकिन उन्होंने इस बा

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क्या  आप विश्व प्रसिद्ध अभिनेत्री और नाट्य  चिंतक स्टैला एडलर को जानते हैं ?
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February 2, 2026

अमेरिका के न्यूयॉर्क में जन्मी स्टैला अगर आज जीवित होती तो वह 126 वर्ष की होती। वे दुनिया की जानी-मानी रंगकर्मी और रंग  चिंतक मानी जाती हैं । उनकी एक मशहूर किताब " द आर्ट ऑफ एक्टिंग "रंगकर्म की दुनिया में मील का पत्थर मानी जाती है और सभी रंगकर्मी अपने जीवन में एक बार जरूर इस पुस्तक को पढ़ना चाहते हैं । राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के कार्यवाहक निदेशक एवं रंग मंडल के प्रमुख रह चुके प्रसिद्ध

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दुनिया का सबसे बड़ा नाट्य महोत्सव 27 जनवरी से दिल्ली में
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January 22, 2026

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नाटक ‘माई सन इज़ रेपिस्ट’ में सामाजिक संदेश – सुनीता योगेश
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October 11, 2025

निर्भया कांड पर बनी बीबीसी की एक डाक्यूमेंटरी देख रही थी। उनमें से एक आरोपी की मां ने अपने इंटरव्यू में कहा “हमारा बेटा ऐसा नहीं कर सकता। वो तो बहुत अच्छा है।” तब एक कविता लिखी थी “मैं लड़का नहीं जन्मूंगीं” फिर एक नाटक लिखा “यत्र-तत्र-सर्वत्र” उसे करने पर बहुत से लोगों ने कहा तुम भी फंसोगी, हमें भी जूते पड़वाओगी। क्योंकि उस नाटक में पूरी समाजनीति और राजनिति दोनों पर सवाल उठाए गए थे।

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मानवीय संवेदनाओं की अनुपम अभिव्यक्ति ‘आदाब अर्ज़ है’ 
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August 4, 2025

गुरुग्राम स्थित नाट्य संस्था ‘रंग परिवर्तन’ की ओर से रविवार 3 अगस्त को  मोलिएर के नाटक ‘द मॉक डॉक्टर’ के हिंदी रूपांतरण ‘आदाब अर्ज है’ की प्रस्तुति प्रेक्षकों के लिए अविस्मरणीय रंग-अनुभव रही। फ्रांसीसी नाटककार मोलिएर का यह नाटक मानवीय मन की मूलभूत भावनाओं को हास्यपूर्ण और संवेदनशील ढंग से सामने लाता है। वरिष्ठ रंगकर्मी महेश वशिष्ठ के निर्देशन में यह प्रस्तुति आंगिक अभिनय के प

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कथा रंग समारोह: टैगोर की मृण्मयी की कहानी खत्म नहीं हुई है
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May 2, 2025

राष्ट्रीय नाटक विद्यालय के पूर्व निदेशक के देवेंद्र राज अंकुर ने कहा है कि अभिनेताओं को रंगमंच तभी करना चाहिए जब उन्हें "आत्मिक संतोष" मिले और निर्देशकों को नाटक करते समय कलाकारों को अत्यधिक स्वतंत्रता देनी चाहिए। श्री अंकुर ने कथा रंग समारोह के समापन के दौरान यह बात कही। उन्होंने कहा कि वह बीस बाइस देशों की यात्रा कर चुके हैं और पाया है कि विदेशों में भी निर्देशक अभिनेताओं को

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