
खुले बाजार का दौर है। आजकल हाल यह है कि बेचने वाले ग्राहक खोज-खोजकर माल थमाने में लगे हैं। बड़ा टफ कंपटीशन है, भाई। ग्राहकों को घर-घर जाकर पकड़ना पड़ रहा है। लोगों को नींद से जगा-जगाकर माल बेचा जा रहा है। बेचने वाले बताते हैं कि भैया उठो, खरीद लो और तब तक न रुको जब तक घर न भर जाए। जनता जनार्दन बेचारी झांसे में आ रही है और वह दिन-रात खरीदारी में जुटी है। विक्रेता समझा रहे हैं-मुफ्त का माल है,
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