सात समंदर पार सरोद की झनकार
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June 28, 2020

सरोद के तार और तबले की लय की अनूठी युगलबंदी देख हर कोई हो जाता है हैरान
विजय विनीत
सरोद के सुरों से श्रोताओं को झुमा देने वाले सरोद वादक पंडित विकास महाराज

सबके अपने, सबके प्यारे चितरंजन भाई को सलाम…
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June 27, 2020

वो जहां जाते थे, जिससे मिलते थे, सबके बहुत अपने हो जाते थे... उनकी सादगी और संघर्ष की कहानियां तमाम हैं... हर साथी की अपनी अपनी यादें हैं, अपने अपने अनुभव हैं... सबके लिए वो चितरंजन भाई थे.. हमारे लिए भी... गमछा गले में लपेटे या कभी कभार पगड़ी की तरह बांध लेते, पान खाते, गोल मुंहवाले बहुत ही प्यारे से लेकिन सबके संघर्ष के साथी... खुद की तकलीफों की कभी परवाह नहीं की... बातें करने से ज्याद

आसान नहीं है कविता पोस्टर की कला…
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June 22, 2020

कविता पोस्टर एक कला है और प्रगतिशील आंदोलन का एक मजबूत हथियार ♦  रवीन्द्र त्रिपाठी पिछले तीस पैंतीस बरसों से हिंदी भाषी इलाके में कविता को लेकर एक नई तरह की उत्सुकता पैदा हुई है।  कविता  पोस्टरों के रूप में। कई ऐसे कविता प्रेमी सामने आए हैं जो कविताओं या काव्य पंक्तियों के पोस्टर बनाते हैं। कुछ इनकी प्रदर्शनियां भी लगाते हैं। कुछ, बल्कि ज्यादातर, स

तुम भी बैठ जाओ किसी की ‘गोदी’ में…
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June 21, 2020

देख तमाशा दुनिया का...
आलोक यात्री की कलम से
  "अजी सुनते हो... पूरी दुनिया के दफ्तर खुल गए... मुए एक तुम्हारे दफ्तर को ही आग लगी है... कुछ तो शर्म करो... घर से ऑफिस कब तक चलाओगे... अब तो कामवाली से ल

ये दौलत भी ले लो, ये शोहरत भी ले लो…
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June 17, 2020

ये दौलत भी ले लो, ये शोहरत भी ले लो... भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी मगर मुझको लौटा दो बचपन का सावन वो कागज की कश्ती वो बारिश का पानी.... इतनी कामयाबी, इतनी शोहरत... लेकिन एक ऐसा अकेलापन जिसने एक बेहतरीन और संभावनाओं से भरे कलाकार को खुदकुशी जैसी कायराना ह

गुलजार देहलवी : तुम याद करोगे हमारे बाद हमें
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June 13, 2020

आनंद मोहन जुत्शी उर्फ गुलज़ार देहलवी साहब बेशक 94साल के रहे हों, लेकिन उनके भीतर का शायर बदस्तूर अपनी पूरी रवानगी के साथ मौजूद था। उनके गुज़रने से दिल्ली वालों का अज़ीम शायर तो चला ही गया, शायरी की दुनिया का वो शख्स भी चला गया जिसकी मौजूदगी का एहसास हर आम ओ खास महफ़िल में ज़रूर होता था। गुलज़ार देहलवी साहब तमाम मंचीय शायरों की उस फ़ौज का हिस्सा नहीं थे, जिनकी मार्केटिंग औ

शहनाई के शहंशाह से मिलना और उन्हें महसूस करना…
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June 11, 2020

राजीव सिंह की कलम से...                                 दिल से एहसानमंद हूँ  बनारस का: बिस्मिल्ला खां   बात क़रीब पचीस बरस पहले की है कोई 1994- 95 की

‘गिरीश कर्नाड सिर्फ नाटककार नहीं एक संस्था थे’
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June 10, 2020

गिरीश कर्नाड की पहली पुण्यतिथि पर अरविंद गौड़ ने उन्हें कुछ इस तरह याद किया....  

रहिमन धागा प्रेम का, मत तोरो चटकाय…
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June 10, 2020

दिल्ली  में आखिर किस हाल में हैं रहीम... चलिए, लॉकडाउन में देखते हैं...  ♦ सुधीर राघव रहिमन धागा प्रेम का, मत तोरो चटकाय। टूटे पे फिर न जुरे, जुरे गांठ परी जाय।।     Read More

ख्वाज़ा अहमद अब्बास होने का मतलब…
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June 7, 2020

एक लेखक के कितने आयाम हो सकते हैं, समाजवाद और इंसानियत के प्रति उसकी वैचारिक प्रतिबद्धता किस हद तक हो सकती है ये समझने के लिए हमें ख्वाज़ा अहमद अब्बास की ज़िंदगी को करीब से देखना चाहिए। आज़ादी के आंदोलन के दौरान ख्वाज़ा अहमद अब्बास ने इप्टा से जुड़कर त

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