प्रसिद्ध रंग समीक्षक रवींद्र त्रिपाठी ने कहा है कि हमेशा से रंगमंच का संकट मौजूद रहा है, यहां तक कि भरत मुनि के काल में भी और नाटक करने वालों के भीतर भी एक नाटक होता रहता है। उनका कहना है कि यह सच है कि एनएसडी से इब्राहिम अल्का जी के ज़माने में एक से एक दिग्गज कलाकार सामने आए पर हिंदी रंगमंच का कभी कोई स्वर्णकाल नहीं रहा और स्वर्ण काल की अवधारणा भी एक तरह का भ्रम है
लेकिन उन्होंने इस बात को स्वीकार किया है कि आधुनिक हिंदी रंगमंच को विकसित करने में अल्काजी, हबीब तनवीर ,बादल सरकार और भानु भारती जैसे लोगों का बड़ा योगदान है। उन्होंने अपनी किताब के मुख्य पृष्ठ पर इन हस्तियों की तस्वीरें डाली हैं। त्रिपाठी ने कल भारतीय रंग महोत्सव के श्रुति कार्यक्रम में अपनी पुस्तक” रंगमंच : शख्सियतें मुद्दे और प्रस्तुतियां” के विमोचन समारोह में यह बात कही ।
Read More