गोपाल दास ‘नीरज’ को सुनना और महसूस करना…
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July 19, 2020

स्वप्न झरे फूल से, मीत चुभे शूल से लुट गये सिंगार सभी बाग़ के बबूल से और हम खड़े-खड़े बहार देखते रहे। कारवाँ गुज़र गया गुबार देखते रहे।<

साहित्य, समाज और संघर्ष के संवेदनशील ‘यात्री’
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July 10, 2020

साहित्य की अनवरत यात्रा और समाज की रचनात्मक अभिव्यक्ति ♦  अतुल सिन्हा जब भी आप जाने माने कथाकार, व्यंग्यकार और बेहद संवेदनशील लेखक से रा यात्री से मिलेंगे, आपको इस 88 बरस के नौजवान के भीतर अपार रचनात्मक ऊर्जा मिलेगी... सेहत बेशक साथ नहीं देती, ज्यादातर वक्त बिस्तर पर गुज़रता है और कुछ बीमारियों ने उन्हें बरसों से जकड़ रखा है, लेकिन जब यात्री जी अपनी रौ में

बदहाल कलाकार, राष्ट्रीय नीति की दरकार
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July 8, 2020

♦ रवीन्द्र त्रिपाठी इस कोरोना समय में समाज के जिन वर्गों को और भी अधिक सीमांत की तरफ धकेला है उसमें कलाकार भी हैं। हर विधा के कलाकार- चाहे वे रंगकर्मी हों, पेंटर हों, मूर्तिशिल्पी हों, गायक हों, वादक हों, नर्तक या नृत्यांगना हों। या लोक कलाकार हों। फिल्मों

अपने ज़माने की मशहूर अदाकारा साधना से मुलाकात…
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July 7, 2020

अतीत का आईना त्रिलोक दीप की कलम से एक दिन आकस्मिक किसी का फोन आया कि एक बजे दोपहर को ओबेरॉय होटल में आपको साधन

एंथोनी पाराकल: पत्रकारिता का एक आयाम ऐसा भी
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July 7, 2020

अतीत का आईना वरिष्ठ पत्रकार के. विक्रम राव की कलम से एक दौर था जब “संपादक के नाम पत्र” का महत्व समाचार पत्रों में अग्रलेखों के ठीक बाद हुआ करता था| चर्चित पत्र अंतिम होता, तो श्रेष्ट पत्र पर पारितोष की परम्परा भी थी| ज़मान

सब्ज बुर्ज़ : नीली छतरी हरा नाम
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July 7, 2020

♦ सुधीर राघव
अकबर के दरबार में रहीम मीर अर्ज थे। वही अब्दुर रहीम खानखाना जो हिंदी साहित्य में अपने नीति दोहों की वजह से बड़ा ही सम्मानजनक स्थान रखते हैं। इन रहीम के सेवक थे फ़हीम खान। फ़हीम खान बहुत चर्चित नहीं हैं मगर एक वज

सिक्के का दूसरा पहलू …
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July 6, 2020

देख तमाशा दुनिया का... आलोक यात्री की कलम से  मैं छोटा सा रहा होउंगा। यही कोई पांच सात बरस का। गर्मी की एक दोपहर पिताश्री और मोटा ताऊ जी (पिताश्री के कॉलेज के सहयोगी श्री एम.डी.शर्मा जी) के साथ पहली बार किसी गांव के रोमांचक सफर पर निकलने का अवसर मिला था। इससे

‘नेपाल आता हूं, तो लगता है घर में बांसुरी बजा रहा हूं’
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July 1, 2020

82 साल के हो गए बांसुरी के पर्याय बन चुके पंडित हरिप्रसाद चौरसिया

  • अतुल सिन्हा
अभी एक साल भी नहीं बीता है... भारत के 73वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर मशहूर बांसुरी वादक पंडित हरिप्रसाद चौरसिया कांठमांडू गए तो उनका वहां के तमाम युवा कलाकारों न

जब त्रिलोक दीप पहली बार लद्दाख़ गए…
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June 29, 2020

अतीत का आईना त्रिलोक दीप की कलम से 1969 में पहली बार लद्दाख गया था फौजियों के साथ। रास्ते में मुझे दो जानकारियां ऐसी मिलीं जो उस समय मेरे लिए नई थीं। एक, द्रास दुनिया का दूसरा सबसे ठंडा स्थान है और दूसरी लद्दाख में एक ऐसा यूरोपीय

जब अतीत में झांकते हैं जाने माने पत्रकार त्रिलोक दीप….
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June 29, 2020

एक वक्त था जब ‘दिनमान’ को रघुवीर सहाय के साथ साथ त्रिलोक दीप के नाम से भी पहचाना जाता था। सत्तर का दशक था और दिनमान तब की सबसे बेहतरीन, गंभीर और सामयिक समाचार साप्ताहिक पत्रिका हुआ करती थी। टाइम्स ग्रुप की हिन्दी पत्रिकाओं में तब धर्मयुग, दिनमान, सारिका. माधु

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