बंगाल ने नटी विनोदिनी की तरह गौहर जान को क्यों नहीं अपनाया

कोलकाता, 2 अक्टूबर। बंगाल में नटी विनोदिनी को एक कल्चरल आइकॉन माना जाता है लेकिन गौहर जान को वह दर्जा नहीं मिला जबकि उनक़ा कद नटी विनोदिनी से कम नहीं था।

कल शाम कोलकत्ता के भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के सत्यजीत राय सभागार में देश में ग्रामोफोन रिकॉर्डिंग के 125,वर्ष के मद्दे नजर पहली ग्रोमोफोन क्वीन गौहर जान की स्मृति में आयोजित एक शानदार डांस ड्रामा से पूर्व चर्चा में यह सवाल शिक्षयतन कालेज में सहायक प्रोफेसर अल्पना नायक ने उठाया।
समारोह में गुरुग्राम की संस्था द परफॉर्मिंग आर्ट ट्राइब द्वारा इस एक घंटे का शो तवायफानामा पेश किया गया। प्रसिद्ध नृत्याँगना सोमा बनर्जी के नेतृत्व में इस डांस ड्रामा में गुजरे जमाने के इतिहास को जिन्दा कर दिया गया जिसमें गौहर जान के अलावा जानकी बाई छप्पन छुरी रसूलन बाई विद्याधरी हुस्ना जान बिबो बेगम अख्तर असगरी बाई को चित्रित किया गया है।

श्रीमती नायक ने कहा कि गौहर जान भी नटी विनोदिनी भी की तरह तवायफ़ परम्परा की थी और अपने जमाने की मशहूर कलाकार थी।लेकिन बंगाल में उसे उस रूप में याद नहीं किया जाता। इसके क्या कारण हैं।


उन्होंने कहा कि गौहर जान 1930 में इस दुनिया से चली गयी पर उनकी स्मृति में आज तक कुछ ठोस नहीं हुआ और इस सेमिनार से पहले हम भी उंनको नहीं जानते। यह हमारी सामूहिक जिम्मेदारी कि इस महान गायिका को अपनी स्मृति में हम संजो कर रखे ।
प्रसिद्ध आलोचक गीता दुबे का कहना था कि इन गायिकाओं की पृष्ठ भूमि कोठे की थी इसलिए इन्हें बदनाम किया गया। संगीत के पितामह भातखण्डे जब गौहर जान से संगीत की तालीम लेना चाहते थे पर उन्हें सलाह दी गयो की वे किसी तवायफ़ से समगीत की तालीम न लें।
चर्चित कवि यतीश कुमार ने कहा कि लेखक, कलाकार, इतिहासकार से अलग तरीके से इतिहास से संवाद करता है और वह कुछ जोड़ता भी है।कला इतिहास को एक नई दृष्टि से देखती है। तवायफ़नामा भी एक ऐसा इतिहास है जो एक कवि के द्वारा देखा लिखा गया है।
भारतीय भाषा के निदेशक डॉक्टर शंभुनाथ ने कहा कि इतिहास में एक पितृसत्तात्मक दृष्टि भी काम करती रही शायद यही कारण रहा हो कि उन गायिकाओं को भुला दिया गया

समारोह के आरम्भ में नीलोपा मित्रा ने शानदार नृत्य से लोगों का मन मोह लिया.इस नृत्य नाटिका में युवा रंगकर्मी गुंजन अजहर ने अपने जीवंत अभिनय से गौहर जान को जीवित कर दिया..वह प्रसिद्ध रंगकर्मी उमा झुंझुनवाला की बेटी हैं. श्रीमती अंशु उपाध्याय ने हमेशा की तरह बिब्बो का शानदार अभिनय किया. .उसने इस महिला किरदार के दुख दर्द मोहब्बत को इस तरह पेश किया कि किरदार मानो सामने खड़ा हो गया

समारोह की संचालक.सोमा ने भी हुस्ना जान का शानदार अभिनय किया और बताया कि आज़ादी की लड़ाई में उसने भी भागीदारी की।

युवा गायिका समृदा गुहा की गायिकी भी शो की जान थी. सूत्रधार के रूप में आस्था चड्ढा ने कहांनी सुंदर तरीके से सूनाईं
कुल मिलाकर सभी ने अपना बेहतर प्रदर्शन किया.
समारोह में स्त्री लेखा पत्रिका के अंक और ब्रोशर का विमोचन हुआ.
प्रख्यात आलोचक शम्भुनाथजी कवि लेख यतीश कुमार आलोचक गीता दुबे और अल्पना नायक ने बहुत कुछ बोला पर अगर समय होता तो वे लोग और बोलते. संजय जायसवाल यतीश कुमार और सोमा के सहयोग से यह समारोह सफल हो गया।

अरविंद कुमार की रिपोर्ट

Posted Date:

October 2, 2026

4:59 pm Tags: , ,

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