

(डॉ रवीन्द्र राजहंस बेशक प्रोफेसर रवीन्द्रनाथ श्रीवास्तव हों, अंग्रेज़ी साहित्य के उम्दा प्रोफेसर हों, ‘अमेरिकी आलोचना में शिकागो स्कूल ऑफ क्रिटिसिज्म’ जैसे जटिल विषय पर पीएचडी किया हो, लेकिन हिन्दी व्यंग्य लेखन और कविता में जो उनकी पहचान रही, समाज और सत्ता की विद्रूपता को देखने की जो उनकी दृष्टि रही, वह उन्हें सबसे अलग करती है। ज़िंदगी के शुरुआती द


आखिर राहुल सांकृत्यायन में ऐसा क्या है जो उन्हें बार बार पढ़ने और याद करने की ज़रूरत महसूस होती है? आखिर मौजूदा दौर में राहुल सांकृत्यायन क्यों ज़रूरी हैं? क्यों उनकी किताब 'वोल्गा से गंगा' का ज़िक्र हमेशा आता है और क्यों एक ब्राह्मण होने के बाद भी उन्होंने ब्राह्मणवाद और ढकोसलों का खुलकर विरोध किया? उनके तार्किक विश्लेषणों और समाज को देखने के उनके नज़रिये ने कैसे ए

सागर सरहदी का जाना एक ऐसे तरक्कीपसंद शख्स का जाना है जिसकी झोली में सिलसिला, कभी कभी और चांदनी भी है तो बाज़ार और चौसर भी... सागर सरहदी में यश चोपड़ा की ज़रूरतों के मुताबिक ढलने की कला भी है तो वक्त के साथ देश और समाज को बारीकी से देखने का अपना नज़रिया भी... सरहदी साहब बीमार चल रहे थे... 88 साल के हो चुके थे... लेकिन अब भी बेहद संज़ीदे तरीके से वक्त को देखते समझते थे। '7 रंग' के लिए सा


रेणु पर केन्द्रित 10 पत्रिकाओं का विमोचन, फिल्म का प्रदर्शन बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली समेत कई जगहों पर हुए रेणु जन्मशती पर कई कार्यक्रम
नई दिल्ली। आंचलिक साहित्य को मुख्य धारा में स्थापित कर देने वाले कालजयी कथाकार फणीश्वर नाथ रेणु की जन्मशती पर बंद हॉल में आयोजित महत्वपूर्ण कार्यक्रम को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी क

गाजियाबाद में साहित्य की एक स्वस्थ और समृद्ध परंपरा रही है और इसे आज के दौर में जीवंत रखने का अद्भुत काम कर रहा है मीडिया 360 लिट्ररी फाउंडेशन। कोरोना काल के दौरान करीब एक साल तक बंद पड़ी गतिविधियों के बाद जब इस संस्था ने 7 फरवरी को गाजियाबाद में कथा संवाद को फिर से शुरु किया तो मानो हर किसी के भीतर का साहित्यकार और साहित्य के प्रति उसकी जायज चिंता फिर से जाग उठी। बड़ी संख्