देश विदेश के अलग अलग हिस्सों में भारतीय साहित्य, कला और संस्कृति से जुड़े तमाम कार्यक्रम होते हैं, ढेर सारी गतिविधियां होती हैं। कई ख़बरें भी होती हैं जो हम तक नहीं पहुंच पातीं। गोष्ठियां, कार्यशालाएं होती हैं, रंगकर्म की तमाम विधाओं की झलक मिलती है और लोक संस्कृति के कई रूप दिखते हैं। नए कलाकार, नई प्रतिभाएं और संस्थाएं साहित्य-संस्कृति को समृद्ध करने की कोशिशों में लगे रहते हैं लेकिन उनकी जानकारी कम ही लोगों तक पहुंच पाती है। हमारी कोशिश है कि इस खंड में हम ऐसी ही गतिविधियों और ख़बरों को शामिल करें … चित्रों और वीडियो के साथ।

बंगाल में नटी विनोदिनी को एक कल्चरल आइकॉन माना जाता है लेकिन गौहर जान को वह दर्जा नहीं मिला जबकि उनक़ा कद नटी विनोदिनी से कम नहीं था। कल शाम कोलकत्ता के भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के सत्यजीत राय सभागार में देश में ग्रामोफोन रिकॉर्डिंग के 125,वर्ष के मद्दे नजर पहली ग्रोमोफोन क्वीन गौहर जान की स्मृति में आयोजित एक शानदार डांस ड्रामा से पूर्व चर्चा में यह सवाल शिक्षयतन कालेज में सह
Read More
जन संस्कृति मंच (जसम) का दो दिवसीय सातवां बिहार राज्य सम्मेलन 26 व 27 सितंबर को समस्तीपुर कालेज के सभागार में नयी राज्य कमेटी के चुनाव के साथ सम्पन्न हुआ। 'फासीवादी सत्ता संस्कृति के खिलाफ शहीद भगत सिंह और डॉक्टर अंबेडकर के सपनों का भारत ' -- इस थीम पर हुए सम्मेलन की शुरुआत शहीद-ए- आजम भगतसिंह और डा अम्बेडकर की मूर्ति पर माल्यार्पण तथा 'कारवां चलता रहेगा' शहीद गीत के साथ हुई। सांस्कृतिक मà
Read More
भारत में हुए ब्रिक्स समिट के बाद संस्कृति मंत्रालय ब्रिक्स में अपनी अध्यक्षता के तहत ‘ब्रिक्स थिएटर फेस्टिवल’ 2026 के साथ एक और महत्वपूर्ण महोत्सव करने जा रहा है। यह महोत्सव 12 से 14 अक्टूबर, 2026 तक नई दिल्ली में होगा और इसमें भारत, थाईलैंड, इंडोनेशिया, रूस, वियतनाम, ईरान, साउथ अफ्रीका, कज़ाकिस्तान, इथियोपिया और ब्रिक्स के सदस्य और पार्टनर देशों के सौ से अधिक कला-प्रेमी शामिल होंगे। यह महोà
Read More
आचार्य शिवपूजन सहाय के उपन्यास “देहाती दुनिया ‘ के सौ साल होने पर तीन दिवसीय समारोह संपन्न हो गया और इसके साथ ही इस उपन्यास को लेकर एक नया विमर्श खड़ा हो गया। 1926 में प्रकाशित यह उपन्यास हिंदी की चौथी कृति है जिसके सौ साल होने पर चर्चा हो रही है।कोई इसे कथा डायरी बता रहा तो कोई इसे विनोद कुमार शुक्ल की दीवार में एक खिड़की रहा करती थी की तरह प्रयोगधर्मी और नवाचारी उपन्यास बता रहा है।कोई प
Read More
अरुंधति रॉय अगर कुछ लिखती हैं तो उसके कुछ मायने होते हैं... बेशक उनका लेखन उनके निजी जीवन और अनुभवों से फूटने वाली वह अभिव्यक्ति है जो सीधे सीधे मौजूदा समाज और रिश्तों की जटिलताओं के साथ साथ समकालीन राजनीति और खासकर कट्टरवादी सियासत करने वालों पर चोट करती है... ज़ाहिर है दक्षिणपंथी ताकतों की नज़र में वो हमेशा खटकती हैं लेकिन उनके जीवन के जो उतार चढ़ाव रहे हैं, वो उन्हें एक ऐसी जीवट वाल
Read More
क्या आपने कोई ऐसी पेंटिंग देखी है जिसके भीतर से कोई तेज रोशनी फूटती हो...लगता है चित्र के फ्रेम के भीतर कोई बल्ब जल रहा हो। त्रिवेणी कला संगम की गैलरी में देवास के दिवंगत चित्रकार अफ़ज़ल पठान के चित्रों को देखकर ऐसा लगता है कि उनकी पेंटिंग से कोई रोशनी निकल रही है. पिछले कई दशकों से चित्र प्रदर्शनियाँ देख रहे मशहूर कला समीक्षक विनोद भारद्वाज कहते हैं कि उन्होंने पहली बार ऐसी पेंटिं
Read More
अयोध्या इन दिनों एक बार फिर ख़ासी चर्चा में है... राम नाम की लूट है, लूट सके तो लूट.. कहावत तो आपने सुनी ही होगी। तो साहब, राम के नाम पर पहले सत्ता और अब उनके नाम पर कई हज़ार करोड़ रुपए की चोरी.. मुद्दा गरम है, लेकिन इसी बीच राम की इसी आस्था का एक बेहद आधुनिक तकनीक से लैस व्यावसायिक अभियान भी सामने आया है... खासकर उनके लिए जिनके भीतर शायद मंदिर के दर्शन करने की चाहत है, लेकिन वो इस राजनीतिक अखाडà¤
Read More
राम मंदिर में करोड़ों की चंदा चोरी और चोर हुए चंपत, इसे चोरी कहें या डकैती... ऐसे में जांच के लिए एक और एसआईटी... सियासत का ये नया खेल, क्या है ये एसआईटी...जाने माने पत्रकार और व्यंग्यकार अनिल त्रिवेदी
Read More
खुले बाजार का दौर है। आजकल हाल यह है कि बेचने वाले ग्राहक खोज-खोजकर माल थमाने में लगे हैं। बड़ा टफ कंपटीशन है, भाई। ग्राहकों को घर-घर जाकर पकड़ना पड़ रहा है। लोगों को नींद से जगा-जगाकर माल बेचा जा रहा है। बेचने वाले बताते हैं कि भैया उठो, खरीद लो और तब तक न रुको जब तक घर न भर जाए। जनता जनार्दन बेचारी झांसे में आ रही है और वह दिन-रात खरीदारी में जुटी है। विक्रेता समझा रहे हैं-मुफ्त का माल है,
Read More
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक चितरंजन त्रिपाठी ने कहा है कि अभी भारतीय रंगमंच को ए आई (कृतिम बुद्धिमत्ता ) से कोई खतरा नहीं है क्योंकि उसमें अभी वह सृजनात्मकता नहीं है। उन्होंने कहा कि मुंबई में 5 लाख रुपए में एनएसडी छात्रों को प्रशिक्षित करेगी और डिप्लोमा देगी। त्रिपाठी ने एनएसडी के ग्रीष्मकालीन थिएटर समारोह की जानकारी देते हुए पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में यह बात कही।
Read More