देश विदेश के अलग अलग हिस्सों में भारतीय साहित्य, कला और संस्कृति से जुड़े तमाम कार्यक्रम होते हैं, ढेर सारी गतिविधियां होती हैं। कई ख़बरें भी होती हैं जो हम तक नहीं पहुंच पातीं। गोष्ठियां, कार्यशालाएं होती हैं, रंगकर्म की तमाम विधाओं की झलक मिलती है और लोक संस्कृति के कई रूप दिखते हैं। नए कलाकार, नई प्रतिभाएं और संस्थाएं साहित्य-संस्कृति को समृद्ध करने की कोशिशों में लगे रहते हैं लेकिन उनकी जानकारी कम ही लोगों तक पहुंच पाती है। हमारी कोशिश है कि इस खंड में हम ऐसी ही गतिविधियों और ख़बरों को शामिल करें … चित्रों और वीडियो के साथ।

आचार्य शिवपूजन सहाय के उपन्यास “देहाती दुनिया ‘ के सौ साल होने पर तीन दिवसीय समारोह संपन्न हो गया और इसके साथ ही इस उपन्यास को लेकर एक नया विमर्श खड़ा हो गया। 1926 में प्रकाशित यह उपन्यास हिंदी की चौथी कृति है जिसके सौ साल होने पर चर्चा हो रही है।कोई इसे कथा डायरी बता रहा तो कोई इसे विनोद कुमार शुक्ल की दीवार में एक खिड़की रहा करती थी की तरह प्रयोगधर्मी और नवाचारी उपन्यास बता रहा है।कोई प
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अरुंधति रॉय अगर कुछ लिखती हैं तो उसके कुछ मायने होते हैं... बेशक उनका लेखन उनके निजी जीवन और अनुभवों से फूटने वाली वह अभिव्यक्ति है जो सीधे सीधे मौजूदा समाज और रिश्तों की जटिलताओं के साथ साथ समकालीन राजनीति और खासकर कट्टरवादी सियासत करने वालों पर चोट करती है... ज़ाहिर है दक्षिणपंथी ताकतों की नज़र में वो हमेशा खटकती हैं लेकिन उनके जीवन के जो उतार चढ़ाव रहे हैं, वो उन्हें एक ऐसी जीवट वाल
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क्या आपने कोई ऐसी पेंटिंग देखी है जिसके भीतर से कोई तेज रोशनी फूटती हो...लगता है चित्र के फ्रेम के भीतर कोई बल्ब जल रहा हो। त्रिवेणी कला संगम की गैलरी में देवास के दिवंगत चित्रकार अफ़ज़ल पठान के चित्रों को देखकर ऐसा लगता है कि उनकी पेंटिंग से कोई रोशनी निकल रही है. पिछले कई दशकों से चित्र प्रदर्शनियाँ देख रहे मशहूर कला समीक्षक विनोद भारद्वाज कहते हैं कि उन्होंने पहली बार ऐसी पेंटिं
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अयोध्या इन दिनों एक बार फिर ख़ासी चर्चा में है... राम नाम की लूट है, लूट सके तो लूट.. कहावत तो आपने सुनी ही होगी। तो साहब, राम के नाम पर पहले सत्ता और अब उनके नाम पर कई हज़ार करोड़ रुपए की चोरी.. मुद्दा गरम है, लेकिन इसी बीच राम की इसी आस्था का एक बेहद आधुनिक तकनीक से लैस व्यावसायिक अभियान भी सामने आया है... खासकर उनके लिए जिनके भीतर शायद मंदिर के दर्शन करने की चाहत है, लेकिन वो इस राजनीतिक अखाड
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राम मंदिर में करोड़ों की चंदा चोरी और चोर हुए चंपत, इसे चोरी कहें या डकैती... ऐसे में जांच के लिए एक और एसआईटी... सियासत का ये नया खेल, क्या है ये एसआईटी...जाने माने पत्रकार और व्यंग्यकार अनिल त्रिवेदी
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खुले बाजार का दौर है। आजकल हाल यह है कि बेचने वाले ग्राहक खोज-खोजकर माल थमाने में लगे हैं। बड़ा टफ कंपटीशन है, भाई। ग्राहकों को घर-घर जाकर पकड़ना पड़ रहा है। लोगों को नींद से जगा-जगाकर माल बेचा जा रहा है। बेचने वाले बताते हैं कि भैया उठो, खरीद लो और तब तक न रुको जब तक घर न भर जाए। जनता जनार्दन बेचारी झांसे में आ रही है और वह दिन-रात खरीदारी में जुटी है। विक्रेता समझा रहे हैं-मुफ्त का माल है,
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राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक चितरंजन त्रिपाठी ने कहा है कि अभी भारतीय रंगमंच को ए आई (कृतिम बुद्धिमत्ता ) से कोई खतरा नहीं है क्योंकि उसमें अभी वह सृजनात्मकता नहीं है। उन्होंने कहा कि मुंबई में 5 लाख रुपए में एनएसडी छात्रों को प्रशिक्षित करेगी और डिप्लोमा देगी। त्रिपाठी ने एनएसडी के ग्रीष्मकालीन थिएटर समारोह की जानकारी देते हुए पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में यह बात कही।
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इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर के जलसे में अपनी किताब The Essential Miir पर हुई चर्चा के दौरान कही। हार्पर कोलिन्स ने इस वर्ष जनवरी में यह किताब छापी है। उनकी नज्मों और गज़लों के अंग्रेजी अनुवाद भी छप चुके हैं। मीर की पैदाइश 1723 में आगरा में हुई जबकि इंतकाल 1810 में लखनऊ में हुआ।
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साहित्य अकादेमी की सामान्य परिषद की 30 मार्च 2026 को हुई बैठक में डॉ. प्रतिभा राय (ओड़िआ), श्री लख्मी खिलाणी (सिंधी) तथा श्री अब्दुस समद (उर्दू) को साहित्य अकादेमी की महत्तर सदस्यता प्रदान करने के प्रस्ताव को अनुमोदित किया गया। साहित्य अकादेमी महत्तर सदस्यता: भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अधीन कार्यरत साहित्य अकादेमी द्वारा प्रदान किया जाने वाला सर्वाेच्च साहित्यिक सम्मान महत्त
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साहित्य अकादेमी के अध्यक्ष डॉ. माधव कौशिक ने रवींद्र भवन परिसर में आयोजित एक भव्य समारोह में 30 मार्च से 4 अप्रैल तक चलने वाले ‘साहित्योत्सव-2026’ का उद्घाटन किया। इस मौके पर भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव अमिता प्रसाद साराभाई, साहित्य अकादेमी की उपाध्यक्ष प्रो. कुमुद शर्मा, सचिव पल्लवी प्रशांत होळकर, संस्कृति मंत्रालय के निदेशक अनीश पी. राजन और कई सारे साहित्यकार
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