किसी भी देश की संस्कृति को विकसित करने, इसे सहेजने और खुद को अभिव्यक्त करने का एक बेहतरीन ज़रिया है साहित्य। साहित्य वो विधा है जिसके कई आयाम हैं। कहानियां, कविताएं, गीत, शायरी, लेख, संस्मरण, समीक्षा, आलोचना, नाटक, रिपोर्ताज, व्यंग्य – अभिव्यक्ति के तमाम ऐसे माध्यम हैं जिनसे साहित्य बनता है और समृद्ध होता है। साहित्य में समाज और जीवन के हर पहलू की झलक होती है। संवेदनाओं और दर्शन का बेहतरीन मेल होता है। संस्कृति और तमाम कालखंडों की और राजनीति से लेकर बेहद निजी रिश्तों तक की अद्भुत अभिव्यक्ति होती है। भाषा का एक विशाल संसार गढ़ता है साहित्य। साहित्य के मौजूदा स्वरूप, नए रचनाकर्म और छोटे बड़े साहित्यिक आयोजनों के अलावा आप इस खंड में पाएंगे साहित्य का हर रंग…


साहित्य
तीन साहित्यकारों को साहित्य अकादेमी ने महत्तर सदस्यता दी
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March 31, 2026

साहित्य अकादेमी की सामान्य परिषद की 30 मार्च 2026 को हुई बैठक में डॉ. प्रतिभा राय (ओड़िआ), श्री लख्मी खिलाणी (सिंधी) तथा श्री अब्दुस समद (उर्दू) को साहित्य अकादेमी की महत्तर सदस्यता प्रदान करने के प्रस्ताव को अनुमोदित किया गया। साहित्य अकादेमी महत्तर सदस्यता: भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अधीन कार्यरत साहित्य अकादेमी द्वारा प्रदान किया जाने वाला सर्वाेच्च साहित्यिक सम्मान महत्त

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साहित्योत्सव 2026 का शुभारंभ, अकादेमी पुरस्कार 31 मार्च को
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March 30, 2026

साहित्य अकादेमी के अध्यक्ष डॉ. माधव कौशिक ने रवींद्र भवन परिसर में आयोजित एक भव्य समारोह में 30 मार्च से 4 अप्रैल तक चलने वाले  ‘साहित्योत्सव-2026’ का उद्घाटन किया। इस मौके पर भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव अमिता प्रसाद साराभाई, साहित्य अकादेमी की उपाध्यक्ष प्रो. कुमुद शर्मा, सचिव पल्लवी प्रशांत होळकर, संस्कृति मंत्रालय के निदेशक अनीश पी. राजन और कई सारे साहित्यकार

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जीते जी साहित्य अकादमी की कथा !
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March 19, 2026

साहित्य अकादेमी पुरस्कार इस बार शुरु से विवादों में रहे, खासकर उसपर पड़ने वाली संस्कृति मंत्रालय की छाया और सरकारी दबावों में आए अकादेमी के कामकाज को लेकर। बेशक जो पुरस्कार नवंबर में घोषित होने थे, वो मार्च में घोषित हुए, लेकिन इसे लेकर भी लेखकों और साहित्यकारों में अलग अलग राय देखने को मिली। हिन्दी की जानी मानी लेखिका ममता कालिया बेशक अकादेमी पुरस्कार की हकदार रही हैं, उनका साहि

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अंधेरे में मोमबत्तियों की तरह जलते हैं ये कवि – अशोक वाजपेयी
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March 2, 2026

इस बुरे और हताशा से भरे समय में रजा फाउंडेशन ने विश्व कविता समारोह का आयोजन कर अंधेरे में एक रौशनी फैलाने का काम किया।भले ही यह रोशनी थोड़ी हो टिमटिमाती हो पर उसने जीने की उम्मीद और उल्लास को जगाया दुख और पीड़ा का बयान करते हुए प्रेम की खोज की।आलिंगन और चुम्बन में जीवन के रंग को शब्दों में चित्रित किया युद्ध और विध्वंस के मलबे में फूल खिलाने की कोशिश की।

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स्त्रीवाद का मतलब मानवतावाद – प्रो. रूपरेखा वर्मा
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November 9, 2025

 स्त्री दर्पण नामक ऐतिहासिक पत्रिका की संपादक और जानी मानी समाजिक कार्यकर्ता रामेश्वरी नेहरू को लखनऊ में याद किया गया। इस मौके पर स्त्री लेखा पत्रिका के नए अंक का लोकार्पण प्रो. रूपरेखा वर्मा, वरिष्ठ कवि नरेश सक्सेना, प्रो रमेश दीक्षित, आलोचक वीरेन्द्र यादव और कवि कात्यायनी ने किया। स्त्री विमर्श केवल अस्मिता विमर्श नहीं है बल्कि वह दुनिया को बदलने का एक व्यापक विमर्श है।

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लिखत पोएटिका: मानवीय संवेदनाओं की मार्मिक अभिव्यक्ति
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September 15, 2025

“लिखत पोएटिका – क” (प्रकाशक - पाखी रे क्रियेटिव्स, जयपुर) नाम से आई इस पुस्तक में 95 रचनाकारों की एक-एक रचना शामिल है। इनमें चर्चित नाम भी हैं और नवोदित भी। संग्रह के शुरू में इरशाद कामिल और तस्वीर कामिल के संबोधन (“कविता के नाम” और “आपको इकबाल मुबारक”) भी हैं। “कविता के नाम” और “आपको इकबाल मुबारक” के लिए इतना ही कहा जा सकता है कि अगर आप किसी बेमिसाल उपन्यास या कहानी को पढ़ने के बाद ल

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 ‘उन्मेष’ अंतरराष्ट्रीय साहित्य उत्सव 25 सितंबर से पटना में
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September 10, 2025

‘उन्मेष’ अंतरराष्ट्रीय साहित्य उत्सव के तीसरे संस्करण का आयोजन इस बार पटना में 25 से 28 सितंबर 2025 के बीच सम्राट अशोक कन्वेंशन सेंटर में होगा। इस उत्सव का आयोजन भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय एवं साहित्य अकादेमी द्वारा संयुक्त रूप से बिहार सरकार के सहयोग से किया जा रहा है। यह जानकारी आज इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केंद्र में आयोजित प्रेस सम्मेलन में संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक

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बच्चों पर तनी बंदूकें भी हो चुकी हैं कला – मोहन राणा
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September 9, 2025

नब्बे के दशक के बेहद संवेदनशील कवि मोहन राणा की। कविता का शीर्षक है घर। कई बरसों के बाद मोहन राणा पिछले दिनों भारत आए। रहते वो इंग्लैंड में हैं। वहीं का एक शहर है - बाथ जहां मोहन राणा रहते हैं। अब तो ब्रिटेन के नागरिक भी हो गए हैं। दिल्ली में जन्में, पले बढ़े और पढ़े। जब दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ते थे तो कला, साहित्य और खासकर कविता में दिलचस्पी हुई। जनसत्ता और नवभारत टाइम्स जैसे अख

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कोई भी संस्कृति बगैर कविता के फल फूल नहीं सकती – त्रिलोचन
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August 20, 2025

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‘इन दबी सिसकियों से क्या होगा, लोग बहरे हैं चीखना होगा’
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July 21, 2025

ग़ाजियाबाद में साहित्य की नई धारा बहने लगी है, कवियों और शायरों ने यहां समां बांध रखा है। चाहे कथा संवाद हो या बारादरी, कहानी और शायरी के नए रंग फूटने लगे हैं। कई वरिष्ठ तो कई नए रचनाकारों की सक्रियता ने यहां शब्दों और भावनाओं की रचनात्मक अभिव्यक्ति को नया आयाम दिया है। इस बार की बारादरी में मशहूर शायर और कार्यक्रम के अध्यक्ष मोईन शादाब ने कहा कि गंगा जमुनी तहजीब की महफ़िल 'बारादरी'

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