(मुंशी प्रेमचंद को 31 जुलाई को उनके जन्मदिन और 8 अक्टूबर को उनकी पुण्यतिथि पर तमाम साहित्यप्रेमी और कथाजगत के लोग याद करते हैं। इस बार भी कर रहे हैं। अब इस डिजिटल ज़माने में प्रेमचंद पर वेबिनार हो रहे हैं, फेसबुक पर तमाम लोग और संस्थाएं इस मौके पर लाइव दिख रहे हैं। जाहिर है तमाम अखबारों , पत्र पत्रिकाओं में लेख भी लिखे जा रहे हैं और प्रेमचंद पर पिछले दिनों जो विवाद उठाए गए,
गीत सुनने के लिए क्लिक करें ---https://www.youtube.com/watch?v=KRVQZW7basg
साठ से अस्सी के दशक को फिल्म संगीत का सुनहरा दौर कहा जाता था और तब के मधुर गाने आज भी लोगों की ज़ुबान पर हैं।
जो लोग थोड़ा बहुत पंजाबी साहित्य को करीब से जानते हैं उनके लिए शिव कुमार बटालवी का नाम उतना अनजाना नहीं है.. लेकिन हिन्दी या अन्य भाषाओं के साहित्य जगत के लोगों के लिए बटालवी कुछ दिनों पहले तक बहुत नहीं जाने जाते थे.. कुछ साल पहले एक फिल्म आई उड़ता पंजाब.. और उसमें एक गीत इस्तेमाल किया गया... नए संदर्भों में... दर्द और तड़प से भरा हुआ... इक कुड़ी जि दा नां मोहब्बत.. गुम है..ग
बारिश ने पूरे देश में तबाही मचा रखी है। आज देश के ख्यातिलब्ध गीतकार नीरज जी की बरसी है। मुझे "अबके सावन में ये शरारत मेरे साथ हुई..." शेर याद आ रहा है। टीवी पर मिनट मिनट की खबरें ब
साहित्य की अनवरत यात्रा और समाज की रचनात्मक अभिव्यक्ति
♦ अतुल सिन्हा
जब भी आप जाने माने कथाकार, व्यंग्यकार और बेहद संवेदनशील लेखक से रा यात्री से मिलेंगे, आपको इस 88 बरस के नौजवान के भीतर अपार रचनात्मक ऊर्जा मिलेगी... सेहत बेशक साथ नहीं देती, ज्यादातर वक्त बिस्तर पर गुज़रता है और कुछ बीमारियों ने उन्हें बरसों से जकड़ रखा है, लेकिन जब यात्री जी अपनी रौ में
♦ रवीन्द्र त्रिपाठी
इस कोरोना समय में समाज के जिन वर्गों को और भी अधिक सीमांत की तरफ धकेला है उसमें कलाकार भी हैं। हर विधा के कलाकार- चाहे वे रंगकर्मी हों, पेंटर हों, मूर्तिशिल्पी हों, गायक हों, वादक हों, नर्तक या नृत्यांगना हों। या लोक कलाकार हों। फिल्मों
अतीत का आईनावरिष्ठ पत्रकार के. विक्रम राव की कलम से
एक दौर था जब “संपादक के नाम पत्र” का महत्व समाचार पत्रों में अग्रलेखों के ठीक बाद हुआ करता था| चर्चित पत्र अंतिम होता, तो श्रेष्ट पत्र पर पारितोष की परम्परा भी थी| ज़मान
अकबर के दरबार में रहीम मीर अर्ज थे। वही अब्दुर रहीम खानखाना जो हिंदी साहित्य में अपने नीति दोहों की वजह से बड़ा ही सम्मानजनक स्थान रखते हैं। इन रहीम के सेवक थे फ़हीम खान। फ़हीम खान बहुत चर्चित नहीं हैं मगर एक वज