कितना भी लिखो, कुछ न कुछ बाक़ी रह जाता है…
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August 18, 2020

         कभी चांद की तरह टपकी कभी राह में पड़ी पाई कभी छींख की तरह खनकी कभी जेब से निकल आई अट्ठनी- सी जिंदगी ये जिन्दगी वैसे तो सब इन्हें इनके मशहूर नाम 'गुलज़ार साहब' के नाम से जानते हैं पर इनका असली नाम

और अब सुर संसार को सूना कर गए पं. जसराज
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August 17, 2020

सुर मानो ठहर गए हों... संगीत खामोश हो गया हो... उनकी गायिकी अब महज़ यादों और अथाह संगीत अल्बमों में रह गई है.. अब हम उन्हें कभी लाइव नहीं सुन पाएंगे... पंडित जसराज चले गए... मेवाती घराने की आवाज़ थम गई...90 साल के पंडित जसराज ने अमेरिकी के न्यू जर्सी में सबको हमेशा के लिए अलविदा कह गए... कोराना काल में वैसे भी लगातार ऐसी दुखद और मनहूस खबरें आ रही हैं... पंडित जी भी इसी कतार में शामिल हो गए... बहुत दूर चल

एक नन्हीं बच्ची पलक की चित्रकारी देखिए..
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August 12, 2020

पलक प्रकाश महज़ 12-13 साल की है। पिछले कई सालों से पेंसिल, आर्ट पेपर, कलर पेंसिल और तरह तरह के रंगों से खेलती है। मुंबई में रहती है। जब एकदम छोटी सी थी तब भी रेखाएं और रंग उसके लिए अपनी अभिव्यक्ति के सबसे कारगर माध्यम थे। धीरे धीरे उसने खुद को कला के क्षेत्र में केन्द्रित किया। रोज़ कुछ न कुछ बनाने लगी। कोई ट्रेनिंग नहीं ली, कहीं से कुछ सीखा नहीं। कल्पनाओं की उसकी अपनी दुनिया है और हमेशा ह

ज़िंदगी की जंग हार गए मशहूर शायर राहत इंदौरी
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August 11, 2020

उनका जाना बेशक मौजूदा दौर में शायरी की दुनिया में एक बहुत बड़े शून्य की तरह है... राहत इंदौरी साहब की अपनी खास अदा थी, पढ़ने का खास अंदाज़ था.. लेकिन जब वो पढ़ते थे तो बहुत सारे दर्द भी छलकते थे और ज़िंदगी की हकीक़त भी बयां होती थी.. क

भारतीय रंगकर्म को अनुशासनबद्ध किया अल्काज़ी ने
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August 6, 2020

भारतीय रंगमंच के पुरोधा कहे जाने वाले इब्राहिम अल्काज़ी ने रंगमंच की दुनिया को क्या क्या दिया, उन्होंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के निदेशक के तौर पर क्या क्या किया, एनएसडी जैसे बड़े फलक को संभालते हुए कैसे वो आधुनिक भारतीय रंगमंच के सम्राट बन गए और क्यों उन्हें रंगमंच के 'त

एक जीवंत किंवदंती बन गए थे इब्राहिम अल्काजी
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August 4, 2020

इब्राहिम अल्काजी का जाना भारतीय रंगमंच के लिए एक बहुत बड़े शून्य की तरह है... उन्होंने रंगमंच के लिए जितना कुछ किया और भारतीय रंगमंच को जो ऊंचाई दी उसे कभी भूला नहीं जा सकता। जाने माने रंगकर्मी अरविंद गौड़ ने अल्काजी  की रंगमंच यात्रा को कैसे देखा और उन्हें कैसे महसूस किया, इसे हर रंगप्रेमी और थिएटर से जुड़े लोगों को ज़रूर पढ़ना चाहिए... 7 रंग परिवार आदरणीय अल्काजी को

जब समझना नहीं, फिर पढ़ना क्‍यों ?
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July 31, 2020

(मुंशी प्रेमचंद को 31 जुलाई को उनके जन्मदिन और 8 अक्टूबर को  उनकी पुण्यतिथि पर तमाम साहित्यप्रेमी और कथाजगत के लोग याद करते हैं। इस बार भी कर रहे हैं। अब इस डिजिटल ज़माने में प्रेमचंद पर वेबिनार हो रहे हैं, फेसबुक पर तमाम लोग और संस्थाएं इस मौके पर लाइव दिख रहे हैं। जाहिर है तमाम अखबारों , पत्र पत्रिकाओं में लेख भी लिखे जा रहे हैं और प्रेमचंद पर पिछले दिनों जो विवाद उठाए गए,

वो जब याद आए, बहुत याद आए…
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July 31, 2020

गीत सुनने के लिए क्लिक करें --- https://www.youtube.com/watch?v=KRVQZW7basg    साठ से अस्सी के दशक को फिल्म संगीत का सुनहरा दौर कहा जाता था और तब के मधुर गाने आज भी लोगों की ज़ुबान पर हैं।

बटालवी ने बताया था, मोहब्बत गुम है
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July 22, 2020

जो लोग थोड़ा बहुत पंजाबी साहित्य को करीब से जानते हैं उनके लिए शिव कुमार बटालवी का नाम उतना अनजाना नहीं है.. लेकिन हिन्दी या अन्य भाषाओं के साहित्य जगत के लोगों के लिए बटालवी कुछ दिनों पहले तक बहुत नहीं जाने जाते थे.. कुछ साल पहले एक फिल्म आई उड़ता पंजाब.. और उसमें एक गीत इस्तेमाल किया गया... नए संदर्भों में...  दर्द और तड़प से भरा हुआ... इक कुड़ी जि दा नां मोहब्बत.. गुम है..ग

देख तमाशा दुनिया का – पुल नंबर 27
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July 19, 2020

देख तमाशा दुनिया का
आलोक यात्री की कलम से
बारिश ने पूरे देश में तबाही मचा रखी है। आज देश के ख्यातिलब्ध गीतकार नीरज जी की बरसी है। मुझे "अबके सावन में ये शरारत मेरे साथ हुई..." शेर याद आ रहा है। टीवी पर मिनट मिनट की खबरें ब

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