करिया और टाइगर की दुम…
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August 20, 2024

बहस दमदार थी। जगह थी गली का मोड़। एक तरफ टाइगर और दूसरी तरफ करिया। हट्टे-कट्टे टाइगर के गले में पट्टा बंधा था। पहली बार वह मालिक को चकमा देकर बंगले से बाहर आया था। करिया था तो दुबला-पतला पर वह अपनी गली का सबसे स्मार्ट था। टाइगर गली के मोड़ पर पहुंचा तो करिया से उसका सामना ह

कहते हैं चुप रहना अच्छा है : त्रिलोचन
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August 20, 2024

अगर कवि त्रिलोचन आज होते तो 107 साल के होते... लेकिन वह 17 साल पहले चले गए यानी 90 की उम्र में... एक जीवंत और उम्मीदों से भरे त्रिलोचन की रचनाओं पर उनके रहते तो बहुत कुछ लिखा गया लेकिन उनके जाने के बाद वह स

खोए हुए वोटों की तलाश…
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August 12, 2024

(यह कार्टून लोकमत न्यूज से साभार)
  • अनिल त्रिवेदी
चुनाव निपट गए। कुछ जीत गए और कई हार गए। कई जीतने के लिए चुनाव लड़े थे लेकिन हार गए। कुछ हारने के लिए मैदान में उतरे थे, पर विजयी हो गए। कई

वीरेन डंगवाल की याद: ‘इतने भले नहीं बन जाना साथी’
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August 9, 2024

कवि वीरेन डंगवाल की याद में लखनऊ में जन संस्कृति मंच की गोष्ठी और कविता पाठ
'कविता में अभिधा का सौन्दर्य - चन्द्रेश्वर
 बदलाव की उत्कट आकांक्षा - कौशल किशोर 
भीष्म साहनी को पढ़ना आज भी क्यों ज़रूरी है
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August 8, 2024

सुप्रसिद्ध साहित्यकार और नाटककार भीष्म साहनी की स्मृतियों का उनके जन्मदिन पर अस्मिता थिएटर ग्रुप के फेसबुक वॉल से ये रिपोर्ट पढ़िए।  अरविंद गौड़ ने उनके तमाम नाटकों का मंचन किया। भीष्म साहनी को बेशक 'तमस' के लिए याद किया जाता हो, लेकिन साहित्य के क्षेत्र में उनके अद्भुत और उल्लेखनीय योगदान के साथ ही इप्टा में उनकी सक्रियता को कभी भूला नहीं जा सकता।  आज भी भीष

रंगकर्मियों के खिलाफ तुग़लकी फ़रमान, जबरदस्त विरोध
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August 6, 2024

नई दिल्ली। रंगकर्मियों और नाटक करने वाली संस्थाओं पर शिकंजा कसने की पहले भी कई बार कोशिशें हुईं लेकिन जबरदस्त विरोध की वजह से ऐसा नहीं हो सका। पिछले कुछ सालों से ये को

आत्ममुग्धता लेखन में ठहराव उत्पन्न करती है : डॉ. कीर्ति काले 
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August 6, 2024

गाज़ियाबाद में साहित्य की महफिलों का अब लगातार रंग जमने लगा है। हर महीने कथा संवाद और महफ़िल-ए-बारादरी का जो सिलसिला शुरु हुआ है उसमें देश भर के नामचीन लेखक, कवि, शायर और गीतकार निरंतर शामिल हो रहे हैं। यह कोशिश पुरानी के साथ साथ नई पीढ़ी में साहित्य के प्रति गहरी अभिरुचि पैदा करने के साथ उनमें लिखने पढ़ने की आदत डालने, एक बेहतर सामाजिक दृष्टि विकसित करने की दिशा म

बारिश में गड्ढों के कहकहे…
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August 5, 2024

 
- अनिल त्रिवेदी
मैं सड़क का एक अच्छा और प्यारा सा गड्ढा हूं। सड़क पर गड्ढे तो और भी हैं। सड़क है तो गड्ढे भी होंगे, लेकिन मैं सबसे थोड़ा अलग दिखता हूं। मेरा दायरा अन्य गड्ढों से विस्तृत है। गहराई भी कुछ ज्यादा है। मैं सड़क के एकदम बीचोबीच हूं, इसलिए

रंगमंच के पर्याय थे इब्राहिम अल्काजी
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August 4, 2024

भारतीय रंगमंच के युग स्तम्भ और वरिष्ठ निर्देशक इब्राहिम अल्काज़ी को याद करते हुए उनके उन तमाम योगदानों की चर्चा ज़रूरी है जिसकी बदौलत देश में रंगमंच तमाम चुनौतियों के बाद भी आज युवा पीढ़ी को अपनी ओर खींच रहा है।  चार साल पहले  चार अगस्त 2020 को रंगमंच की दुनिया को अपना बहुत कुछ दे गए इब्राहिम अल्काजी ने बेशक हम सबको अलविदा कह दिया हो,

संसदीय आचरण पर एक ‘निबंध’ लिखिए
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July 27, 2024

अनिल त्रिवेदी
संसदीय आचरण पर एक निबंध लिखिए। इस प्रश्न के उत्तर में एक छात्र ने जो लिखा वह इस प्रकार है-
संसद में माननीय सभापति की मौजूदगी में सभी माननीय सदस्य जो सम्माननीय आचरण करते हैं उसे संसदीय आचरण कहते हैं। माननीय सदस्यों को जनता ही संसद

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