पंजाब के रंगमंच को करीब से देखिए...पंजाब के साहित्य और वहां के लोक रंगमंच की परंपरा काफी पुरानी और समृद्ध रही है। पंजाबी रंगमंच की जननी मैडम नौरा रिचर्डस और प्रो. आईसी नंदा को माना जाता है जिन्होंने 103 साल पहले छह अप्रैल, 1914 को पंजाबी नाटक 'दलहन' का मंचन सबसे पहले लाहौर के दियाल सिंह कालेज में किया था। इंकलाब के इस दौर में पंजाब के रंगमंच पर भगत सिंह के दर्शन का
11 अक्तूबर को कई जानी मानी हस्तियों के जन्मदिन के लिए याद किया जाता है। मीडिया के ज्यादातर प्लेटफॉर्म बॉलीवुड और महानायक के दायरे से बाहर नहीं निकलते और उनकी कहानियों और सफ़रनामे के दिलचस्प पहलुओं को अपने अपने अंदाज़ में दिखाते हैं। नानाजी देशमुख को सरकारी तंत्र याद कर रहा है। इसी दौरान मंच पर एक कोने में जयप्रकाश नारायण की भी तस्वीर है और मोदी जी अपने भाषण में जेपी का भी ज़िक्र कर
75 के हुए महानायकसवाल पूछने का हुनर तो अमिताभ बच्चन से सीखना चाहिए
कुछ दिनों से ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के बेमिसाल होस्ट, बेहद ऊर्जावान, प्रतिभावान, संवेदनशील और दमदार आवाज़ के बेताज शहंशाह एक प्रोमो में भावुक होते दिख रहे हैं। उनक
रेखा जी के जन्मदिन पर खास
किसी ज़माने की अल्हड़, शोख़ और ग्लैमर की अपनी परिभाषा लिखने वाली रेखा महज 63 साल की उम्र में इतनी तन्हा क्यों हैं? क्यों उनकी ख़ूबसूरती और आंखों की मस्ती के दीवाने भी हर बार उनस
दिल्ली पब्लिक स्कूल, नोएडा के इन्वेस्टेचर समारोह में आठवीं क्लास की छात्रा ने जो बेहतरीन भजन गया ... आप भी सुनिए... लिंक पर क्लिक कीजिए,,,,
https://www.youtube.com/watch?v=hEjOr0bSUOk
बेग़म अख़्तर की ये मशहूर ग़ज़ल सुनिए और उनके बारे में पढ़िए इस पोस्ट में...
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मल्लिका-ए-ग़ज़ल बेग़म अख्तर के जन्मदिन पर ख़ास
जब भी ग़ज़ल, ठुमर
प्रेमचंद को याद करने के उल्लेखनीय और अभूतपूर्व अभियान में लगी है रंगलीला
आगरा की नाट्य संस्था 'रंगलीला' इस बार प्रेमचंद की पुण्यतिथि (8 अक्टूबर, ) के अवसर पर उनकी जन्मस्थली लमही (ज़िला वाराणसी) में
देहरादून में समकालीन और आधुनिक कला का नया केन्द्र ‘उत्तरा’
सच हुआ कलाकार सुरेन्द्र पाल जोशी का सपना
किसी प्राकृतिक आपदा और ऐसी किसी त्रासदी को एक कलाकार किस तरह देखता है और उसे अपनी कला के ज़रिये कैसे आम लोगों के सामने अभिव्यक्त करता है, इसे समझना है तो देह
बाज़ारीकरण के इस दौर में एक बेहतरीन सांस्कृतिक पत्रिका
मुख्य धारा की पत्रकारिता में हाशिए पर पहुंच चुकी कला और संस्कृति को लेकर जब आप किसी से बात कीजिए तो वह गंभीर सा चेहरा बनाकर कुछ चिंत