
लाल किले से नगाड़ा बजाकर हुआ उद्घाटन हर साल भारत रंग महोत्सव का आयोजन करने वाला राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय इस बार भारतीय रंगमंच को अंतर्राष्ट्रीय जामा पहनाने के लिए थिएटर ओलम्पिक्स कर रहा है। 17 फरवरी को लाल किले से नगाड़ा बजाकर इसकी शुरुआत की उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने। कार्यक्रम में संस्कृति राज्य मंत्री डॉ महेश शर्मा के अलावा एनएसडी के निदेशक वा

अंतरराष्ट्रीय कला मेले में एक दिन... 325 स्टॉल्स, 800 से भी ज्यादा कलाकार, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र का विशाल कैंपस, शाम के वक्त रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम। अंतर्राष्ट्रीय कला मेला इतने बड़े पैमाने पर पहली बार हो रहा है। लेकिन इतनी कोशिशों के बावजूद मेले में मीडिया और आम लोगों की दिलचस्पी कम होने की वजह से यहां आए कलाकारों में कुछ मायूसी का भाव नज़र

साहित्य के महाकुंभ में शामिल हो रहे हैं कई दिग्गज साहित्यकार साहित्य अकादमी के वार्षिक समारोह साहित्योत्सव का 12 फरवरी से आगाज हो गया। छह दिवसीय इस आयोजन के पहले दिन साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेताओं को अवॉर्ड दिए गए। हिंदी के रमेश कुंतल मेघ समेत 24 लोगों को अकादमी पुरस्कार से नवाजा गया। साहित्य प्रेमियों को उनसे रूबरू होने और सवाल पूछने का मौका भी मिला।

झूमते इठलाते, खुशबू बिखेरते, अपनी खूबसूरती से सबको लुभाते इन फूलों की बात ही कुछ और है। ये फूल कहीं और होते तो आम होते, लेकिन देश के महामहिम के विशाल अहाते में इनकी अदा ही कुछ और है, यहां ये इतने खास हैं कि इन्हें देखने लाखों लोग आते हैं। फूलों को तो कम लेकिन महामहिम के बेहतरीन राष्ट्रपति भवन को एकदम करीब से देखने के उत्साह और कौतूहल से लबरेज़ होकर ज्यादा। इस बार मुगल गार्डन आम लोगों के

हमारे गणतंत्र की अपनी खासियत है। हमारे शौर्य, ताकत और विकास की कहानी के साथ साथ हमारी संस्कृति के तमाम रंगों से मिलकर बनता है हमारा गणतंत्र। हर साल 26 जनवरी को राजपथ पर इसकी झलक मिलती है। चाहे वो अलग अलग राज्यों की सांस्कृतिक झांकियां हों या फिर अलग अलग मंत्रालयों और विभागों के ज़रिये देश के विकास की कहानी - गणतंत्र दिवस परेड के दौरान 90 मिनट में ये बेहतरीन नजारे किसी भी देशवासी के भीत

(हरीश नवल जी के फेसबुक वॉल से) 'पृथ्वी थियेटर' के संरक्षक स्वर्गीय शशि कपूर नहीं रहे.. यह समाचार आहत कर गया..अरसे से वे बहुत अस्वस्थ थे लेकिन थे.... ...सन १९८४ में मुझे उनके साथ कुछ दिन बिताने का सौभाग्य मिला था। मैं 'पृथ्वी थियेटर' संदर्भित शोध पत्र तैयार कर रहा था ...हम रोज़ 'कौशल्या कोटेज'में मिलते थे जहाँ शशि कपूर जी की शूटिंग चल रही थे ...उनके साथ तनुजा और नीलू फूले भी दृश्यों में थे ..
