कोई यूं ही नहीं बन जाता महानायक…

75 के हुए महानायक

सवाल पूछने का हुनर तो अमिताभ बच्चन से सीखना चाहिए

 

कुछ दिनों से ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के बेमिसाल होस्ट, बेहद ऊर्जावान, प्रतिभावान, संवेदनशील और दमदार आवाज़ के बेताज शहंशाह एक प्रोमो में भावुक होते दिख रहे हैं। उनके 75वें जन्मदिन के मौके पर चैनल ने कुछ ऐसे यादगार पल कैद किए हैं जिसने अमिताभ बच्चन की आंखें नम कर दी हैं। बेशक खेल के दौरान प्रतियोगियों के साथ साथ दर्शकों को बेहद दिलचस्प अंदाज़ में बांधकर रखना सिर्फ और सिर्फ अमिताभ बच्चन ही कर सकते हैं। इस उम्र में भी इस महानायक की परदे पर और कैमरे के सामने दिखने वाली सहजता, हर तरह के लोगों की ज़िंदगी और उनके उतार चढ़ाव के बारे में जानने की उनकी उत्सुकता, कौतूहल से भरे उनके सवाल और लोगों में जोश और सकारात्मक ऊर्जा भरने की उनकी ताकत का जवाब नहीं। आज के दौर में पत्रकारिता के पेशे में आने वालों को संजीदा तरीके से सवाल पूछने का ये हुनर अमिताभ बच्चन से सीखना चाहिए।

उनके जन्मदिन पर देशभर में उनके चाहने वाले जश्न मना रहे हैं, मीडिया के तमाम मंचों पर उनका सफ़रनामा अपने अपने तरीके से दिखाया जा रहा है, वक्त के साथ खुद को देश की जनता से जोड़ लेने वाले अमिताभ बच्चन आखिर कैसे हर घर और परिवार के हिस्से की तरह हो गए हैं, यह एक समझने वाली बात है। बॉलीवुड में स्टार तो कई हैं, सुपर स्टार के खिताबियों की संख्या भी कम नहीं है, लेकिन आखिर क्यों ये सितारे आम लोगों की ज़िंदगी में इतनी गहराई तक नहीं उतर पाते, क्यों विवादों में फंसे रहना, सुर्खियों में बने रहना और अपने स्वभाव में एक खास किस्म के अक्खड़पन का शिकार हो जाना उनकी फितरत में शामिल हो जाता है?

अमिताभ बच्चन को भी देखने का नज़रिया सबका अलग अलग है। वो सफल हैं इसलिए उनपर ऐसे आरोप भी लगते हैं कि वो बड़े शातिर हैं, वो बड़े मौकापरस्त हैं, वो सियासत की हवा पहचानते हैं, वो सत्ता के करीब भी रहते हैं और एक खास किस्म की दूरी बनाकर भी, अपने परिवार को लेकर उनका नज़रिया बेहद सुलझा हुआ है, अपने परिवार से जुड़े विवादों को वो कभी सामने नहीं आने देते और यहां तक कि मीडिया की गपशप और खबरों पर कोई खास ध्यान नहीं देते। अगर ध्यान देते भी हैं तो नज़रअंदाज़ कर देते हैं। उन्होंने अपने जीवन का मूल मंत्र बनाया है – किसी को कभी बुरा नहीं कहना, किसी की कभी आलोचना नहीं करना, अपने तमाम विरोधियों को भी सम्मान के साथ संबोधित करना, किसी विवाद पर चुप्पी साध लेना, खुद का काम में बेहद व्यस्त रखना और वक्त के साथ खुद को ढालकर नई पीढ़ी के साथ भी बराबर का तालमेल बिठाना।

तो क्या अमिताभ शुरू से ही ऐसे थे? एक ‘एंग्री यंग मैन’ आखिर इतना संजीदा कैसे हो सकता है? इतने संघर्षों से तपकर, सियासत में किस्मत आज़मा कर, कई बार विवादों में घिर कर, देश की दुआओं की बदौलत लंबे समय तक अस्पताल में इलाज के बाद सकुशल वापस आकर, फिल्मों में कई कई पारियां खेलकर, अपनी कंपनी के उतार चढ़ाव झेलकर, कभी कांग्रेस, कभी समाजवादियों तो कभी मोदी मिशन के साथ जुड़कर लगातार सक्रिय रहने वाले अमिताभ बच्चन की कामयाबी का आखिर राज़ है क्या?

हर कोई ये जानना चाहता है लेकिन अगर सचमुच इसकी तह में जाएं तो ये समझना मुश्किल नहीं कि इसके पीछे अच्छा साहित्य है, अच्छा संगीत है, संस्कार हैं और संस्कृति से उनका बेहद गहरा लगाव है। यह यूं ही नहीं कहा जाता कि साहित्य, कला, संगीत और संस्कृति में वो ताकत है जो आपको हर तनाव से मुक्त करती है, स्वस्थ रखती है, आपकी रचनात्मकता बरकरार रखती है और आपमें हरदम एक नई ऊर्जा का संचार करती है। अगर आज की पीढ़ी को अमिताभ बच्चन से कुछ सीखना है तो ये हुनर सीखना ज़रूरी है। पढ़ना, लिखना, अच्छा संगीत सुनना, नियमित जीवन जीना, खान पान में संतुलन रखना, संस्कारों को बचाए रखना, हर किसी को सम्मान देना और हर वक्त हर किसी से कुछ न कुछ नया सीखने की लालसा होना – ये ऐसे मंत्र हैं जिनकी बदौलत हमारे सदी के महानायक आज भी उतने ही स्वस्थ, सक्रिय और संजीदा हैं।

उनकी यह सक्रियता और ऊर्जा हमेशा बरकरार रहे, 7 रंग  परिवार हमेशा यही चाहता है। उन्हें उनके 75 साल के शानदार सफ़र पर हमारी अशेष शुभकामनाएं।

Posted Date:

October 11, 2017

11:18 am

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