देश विदेश के अलग अलग हिस्सों में भारतीय साहित्य, कला और संस्कृति से जुड़े तमाम कार्यक्रम होते हैं, ढेर सारी गतिविधियां होती हैं। कई ख़बरें भी होती हैं जो हम तक नहीं पहुंच पातीं। गोष्ठियां, कार्यशालाएं होती हैं, रंगकर्म की तमाम विधाओं की झलक मिलती है और लोक संस्कृति के कई रूप दिखते हैं। नए कलाकार, नई प्रतिभाएं और संस्थाएं साहित्य-संस्कृति को समृद्ध करने की कोशिशों में लगे रहते हैं लेकिन उनकी जानकारी कम ही लोगों तक पहुंच पाती है। हमारी कोशिश है कि इस खंड में हम ऐसी ही गतिविधियों और ख़बरों को शामिल करें … चित्रों और वीडियो के साथ।


गतिविधियां/ख़बरें
 नितिन के कैमरे में कैद कुंभ में स्त्रियाँ
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June 1, 2025

एक युवा छायाकार अगर अपने कैमरे में आम जनता की जीवन शैली, अपने देश की परंपराएं और मनोभावों को कैद करता है, उनकी बारीकियों को पकड़ता है तो बेशक उसकी दृष्टि आने वाले दिनों में उसे एक बड़े छायाकार की संभावना जगाती है। दिल्ली में युवा फोटोग्राफर नितिन गुप्ता की फोटो प्रदर्शनी में ऐसी ही संभावनाओं से भरे चित्र देखे जा सकते हैं... विमल कुमार की एक रिपोर्ट

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साहित्य ही नहीं बदला, अकादमी भी बदल गयी है
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May 31, 2025

साहित्यकारों, लेखकों के लिए और खासकर साहित्य की सबसे बड़ी अकादेमी के लिए यह विषय अहम है -  बदलते दौर में कितना बदला साहित्य। अक्सर इस विषय पर चर्चाएं होती भी रहती हैं, लेकिन इस बार यह खास इसलिए बन गया क्योंकि इसका आयोजन साहित्य अकादेमी ने राष्ट्रपति भवन परिसर के भव्य सांस्कृतिक केन्द्र में हुआ। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने इसका उद्घाटन किया और संस्कृति मंत्री से लेकर मंत्रालय के

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स्त्रीवादी साहित्य पुरुष विरोधी नहीं – महुआ माजी
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May 30, 2025

साहित्य के मौजूदा स्वरूप और चुनौतियों के बारे में अक्सर चर्चाएं होती रही हैं, समकालीन लेखन से लेकर तकनीक के इस बदलते दौर में पढ़ने लिखने की छूटती आदत पर भी चिंता जताई जाती रही है, लेकिन साहित्य अकादमी ने दो दिनों तक जो चर्चा की उसमें इसके तमाम पहलू सामने आए। खास बात यह कि यह पूरा आयोजन राष्ट्रपति भवन के सांस्कृतिक केन्द्र में हुआ और खुद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने इसका उद्घाटन किय

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कालजयी साहित्य की पहचान स्थायी मानवीय मूल्य की स्थापना – द्रौपदी मुर्मु
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May 29, 2025

साहित्य अकादेमी और राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में आज ‘कितना बदल चुका है साहित्य? विषयक दो दिवसीय साहित्यिक सम्मिलन का उद्घाटन भारत की माननीय राष्ट्रपति महामहिम श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र, नई दिल्ली में किया। उन्होंने अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि 140 करोड़ देशवसियों के हमारे परिवार में अनेक भाषाएँ और अनगिनत बोलियाँ है

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रामभक्त सुन्नी ने पाकिस्तान को हराया !
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May 12, 2025

वयोवृद्ध पत्रकार के विक्रम राव नहीं रहे। आखिरी वक्त तक लिखते पढ़ते रहे। रोज़ उनका कोई न कोई आलेख किसी भी मौजूं विषय पर पढ़ा जा सकता था। लिखने पढ़ने के साथ उन्होंने पत्रकारों के हित के लिए कई काम किए। शुरु से ही इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट (IFWJ) के अध्यक्ष रहे और पत्रकारों के तमाम सवालों को उठाते रहे। चाहे वह वेतन बोर्ड की सिफारिशों को लागू करवाना हो या फिर छंटनी का सवाल, साथ ही

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रवीन्द्रनाथ ठाकुर: प्रकृति और पर्यावरण से भरा संगीत और साहित्य
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May 10, 2025

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साहित्य अकादेमी में लेखकों का बहुभाषी रचना-पाठ
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May 8, 2025

साहित्य अकादेमी द्वारा आयोजित साहित्य मंच कार्यक्रम में 7 मई को चार रचनाकारों ने अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कीं। ये रचनाकार थे - संग्राम मिश्र (ओड़िआ), रत्नोत्तमा दास (असमिया), रीता मल्होत्रा (अंग्रेज़ी) एवं राजिंदर ब्याला (पंजाबी)। कार्यक्रम की अध्यक्षता संग्राम मिश्र ने की। सर्वप्रथम रत्नोत्तमा दास ने अपनी असमिया कहानी ‘रई जावा घड़ी’ के अंग्रेज़ी अनुवाद ‘द वाच ऑन हर रिस्ट’ का पाठ किया, जो

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कथा रंग समारोह: टैगोर की मृण्मयी की कहानी खत्म नहीं हुई है
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May 2, 2025

राष्ट्रीय नाटक विद्यालय के पूर्व निदेशक के देवेंद्र राज अंकुर ने कहा है कि अभिनेताओं को रंगमंच तभी करना चाहिए जब उन्हें "आत्मिक संतोष" मिले और निर्देशकों को नाटक करते समय कलाकारों को अत्यधिक स्वतंत्रता देनी चाहिए। श्री अंकुर ने कथा रंग समारोह के समापन के दौरान यह बात कही। उन्होंने कहा कि वह बीस बाइस देशों की यात्रा कर चुके हैं और पाया है कि विदेशों में भी निर्देशक अभिनेताओं को

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संध्या नवोदिता को दिया गया शीला सिद्धान्तकर कविता सम्मान
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April 28, 2025

युवा कवि संध्या निवेदिता को 27 अप्रैल को यहां 18 वें शीला सिद्धांतकर सम्मान से सम्मानित किया गया। इलाहाबाद की संध्या निवेदिता इन दिनों  दिल्ली में लेखा परीक्षा विभाग में कार्य  कर रही हैं। प्रसिद्ध इतिहासकार उमा चक्रवर्ती ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। सुश्री निवेदिता  को उनके कविता संग्रह” सुनो जोगी एवं अन्य कविताओं “ के लिए यह सम्मान दिया गया है। सम्मान के तहत उन्हें 21 हज़ार रु

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“स्त्री विमर्श “का “जोगिया राग”
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April 27, 2025

हिंदी रंगमंच में आजकल  बहुत कम ऐसे नाटक देखने को मिलते हैं जिनकी प्रस्तुति पूरी तरह से हर पैमाने पर खरी उतरे और उसमें एक कसाव हो। किसी नाटक का सफल होना केवल निर्देशक पर  निर्भर नहीं करता बल्कि अभिनेता और नाटक के चुस्त संवादो पर भी निर्भर करता है। कहानी के  रंगमंच के 50 वर्ष पूरे होने के मौके पर “ मेलो  रंग” की ओर से प्रस्तुत विजय पंडित का “जोगिया  राग “ एक ऐसा ही नाटक है जो अपनी प्रस्तुत

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