देश विदेश के अलग अलग हिस्सों में भारतीय साहित्य, कला और संस्कृति से जुड़े तमाम कार्यक्रम होते हैं, ढेर सारी गतिविधियां होती हैं। कई ख़बरें भी होती हैं जो हम तक नहीं पहुंच पातीं। गोष्ठियां, कार्यशालाएं होती हैं, रंगकर्म की तमाम विधाओं की झलक मिलती है और लोक संस्कृति के कई रूप दिखते हैं। नए कलाकार, नई प्रतिभाएं और संस्थाएं साहित्य-संस्कृति को समृद्ध करने की कोशिशों में लगे रहते हैं लेकिन उनकी जानकारी कम ही लोगों तक पहुंच पाती है। हमारी कोशिश है कि इस खंड में हम ऐसी ही गतिविधियों और ख़बरों को शामिल करें … चित्रों और वीडियो के साथ।

हिंदी के प्रसिद्ध कथाकार एवम संपादक हरि भटनागर को रूस का मिख़अईल शोलअख़फ़ सम्मान देने की घोषणा की गई है। भारत मित्र समाज, मसक्वा द्वारा भारतीय कथाकारों के लिए विशेष रूप से स्थापित यह सम्मान प्रतिवर्ष किसी एक कथाकार को दिया जाएगा। वर्ष 2026 के लिए यह प्रथम वार्षिक सम्मान हरि भटनागर को देने का निर्णय लिया गया है।
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बीते जमाने की मशहूर शास्त्रीय गायिका असगरी भाई ने मालिनी अवस्थी को एक बार पान का बीड़ा देते हुए कहा कहा कि पान खाते समय तीन बातों का जरूर ध्यान रखना चाहिए।पहली बात तो यह कि किसी भी व्यक्ति का दिया पान नहीं खाना चाहिए और खाने से पहले सबसे पहले उसे खोलकर देख लेना चाहिए कहीं उसमें कुछ मिलाया तो नहीं गया है। पद्मश्री से सम्मानित लोग गायिका मालिनी अवस्थी ने भारंगम के श्रुति प्रोग्राम मे
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अमेरिका के न्यूयॉर्क में जन्मी स्टैला अगर आज जीवित होती तो वह 126 वर्ष की होती। वे दुनिया की जानी-मानी रंगकर्मी और रंग चिंतक मानी जाती हैं । उनकी एक मशहूर किताब " द आर्ट ऑफ एक्टिंग "रंगकर्म की दुनिया में मील का पत्थर मानी जाती है और सभी रंगकर्मी अपने जीवन में एक बार जरूर इस पुस्तक को पढ़ना चाहते हैं । राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के कार्यवाहक निदेशक एवं रंग मंडल के प्रमुख रह चुके प्रसिद्ध
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इशारा अंतर्राष्ट्रीय कठपुतली थिएटर फेस्टिवल का 22वाँ संस्करण 13 से 22 फरवरी 2026 तक इंडिया हैबिटैट सेंटर, नई दिल्ली में आयोजित किया जायेगा। इस वर्ष विश्वभर से आए अद्वितीय कठपुतली नाट्य प्रस्तुतियों का अनुपम संगम होगा। इटली, कोरिया, भूटान, तुर्की, अल्बानिया और भारत के विख्यात कलाकार अपनी विशिष्ट कला और सृजनात्मकता के माध्यम से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगे।
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हिंदी नवजारण के अग्रदूत आचार्य शिवपूजन सहाय के उपन्यास “देहाती दुनिया” के प्रकाशन के सौ साल पर आयोजित गोष्ठी में आलोचकों और वक्ताओं ने कहा कि यह उपन्यास बिहार में औपनिवेशिक ग़रीबी जमींदारी उत्पीड़न और पुलिसिया दमन का दस्तावेज है जिसके सहारे वहाँ के समाजशास्त्रीय इतिहास को जाना जा सकता है। दिल्ली विश्विद्यालय के हिन्दू कालेज में आज शाम आयोजित इस संगोष्ठी में साहित्य अकादमी पुर
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स्त्री सशक्तिकरण के इस दौर में जीवन के हर क्षेत्र में स्त्रियाँ आगे बढ़ रही हैं।भला वे साहित्य की दुनिया में पीछे क्यों रहे। महादेवी वर्मा सुभद्रा कुमारी चौहान शिवानी अमृता प्रीतम कृष्णा सोबती और मंन्नू भंडारी की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए लेखिकाएँ साहित्य की हर विधा में रच रही हैं। विश्व पुस्तक मेला में एंट्री फ्री होने से पुस्तक प्रेमियों की संख्या में इज़ाफ़ा हुआ तो लेखिकाओं और म
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“कविता का स्वभाव औरत के स्वभाव से मिलता-जुलता है। कविता इशारों में बात करती है, यही एक स्त्री के जीवन का शिल्प है । “ हिंदी की प्रसिद्ध कवयित्री अनामिका ने विश्व पुस्तक मेले के उद्घटान दिवस पर साहित्य अकादमी के कार्यक्रम में यह विचार व्यक्त किये। सहित्य अकादमी सम्मान से विभूषित कवयित्री अनामिका ने अपनी रचना-प्रक्रिया के बारे में संवाद करते हुए कहा कि अपने बारे में बात करना मुश्
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क्या आप कुदपोली के अनाम स्वतंत्रता सेनानियों को जानते हैं जिन्होंने 1857 से 21 साल पहले सशत्र विद्रोह किया था? 53 वें विश्व पुस्तक मेले में इस विद्रोह के बारे में पुस्तक के लोकार्पण से शुरू हुआ उद्घाटन समारोह के दौरान इन अनाम स्वतंत्रता सेनानियों का ज़िक्र हुआ। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ‘द सागा ऑफ कुदोपली: द अनसंग स्टोरी ऑफ 1857’ के अनूदित संस्करणों का विमोचन किया। यह प
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