अयोध्या इन दिनों एक बार फिर ख़ासी चर्चा में है... राम नाम की लूट है, लूट सके तो लूट.. कहावत तो आपने सुनी ही होगी। तो साहब, राम के नाम पर पहले सत्ता और अब उनके नाम पर कई हज़ार करोड़ रुपए की चोरी.. मुद्दा गरम है, लेकिन इसी बीच राम की इसी आस्था का एक बेहद आधुनिक तकनीक से लैस व्यावसायिक अभियान भी सामने आया है... खासकर उनके लिए जिनके भीतर शायद मंदिर के दर्शन करने की चाहत है, लेकिन वो इस राजनीतिक à¤
राम मंदिर में करोड़ों की चंदा चोरी और चोर हुए चंपत, इसे चोरी कहें या डकैती... ऐसे में जांच के लिए एक और एसआईटी... सियासत का ये नया खेल, क्या है ये एसआईटी...जाने माने पत्रकार और व्यंग्यकार अनिल त्रिवेदी
चूंचूं अंकल इनदिनों गुमसुम हैं। मन बहुत उद्गिन और व्यथà
खुले बाजार का दौर है। आजकल हाल यह है कि बेचने वाले ग्राहक खोज-खोजकर माल थमाने में लगे हैं। बड़ा टफ कंपटीशन है, भाई। ग्राहकों को घर-घर जाकर पकड़ना पड़ रहा है। लोगों को नींद से जगा-जगाकर माल बेचा जा रहा है। बेचने वाले बताते हैं कि भैया उठो, खरीद लो और तब तक न रुको जब तक घर न भर जाए। जनता जनार्दन बेचारी झांसे में आ रही है और वह दिन-रात खरीदारी में जुटी है। विक्रेता समझा रहे हैं-मुà
मुम्बई में 5 लाख रुपए में एनएसडी छात्रों को रंगमंच का प्रशिक्षण देगाबच्चों को रंगमंच में प्रशिक्षित करने के लिए दिल्ली में रंग बाग शुरू
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक चितरंजन त्रà
कर में अगर कमल हो तो फिर कहना ही क्या, आजकल हर कोई अपने कर में कमल को पकड़ने में लगा है...आख़िर इस कमल की महिमा जो अपरंपार है... अनिल त्रिवेदी का ताज़ा व्यंग्य
सेकंड क्लास में पढ़ रही मेरी पोती ने आज अचानक पूछा -बाबा, कर कमल क्या होता है? मैंने उसे बताया कि हाथों को कर कमल कहते हैं। पोती हंसी- हाथों को कर कमल कहते हैं? इसमें कमल कहां से आ गया? मैंने उसे समझाने की कोशिश कà¥
यह ज़माना मीर का और मुस्तक़बिल भी –प्रोफ़ेसर अनीसुर्रहमान
फारूक़ी ने बताई मीर तक़ी मीक की अहमियत
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The Essensial Mir पर चर्चा
उर्दू के महान शायर मीर तक़ी मीर मिर्ज़ा ग़ालिब से कम बड़े शायर नहीं थे। ग़ालिब ने तो खुद लिखा है -
रेख्ता के तुम ही नहीं थे उस्ताद ग़ालिब, कहते हैं अहले ज़माने में कोई मीर भी था
लेकिन आज का à¤
तीन साहित्यकारों को साहित्य अकादेमी ने महत्तर सदस्यता दी
नई दिल्ली; 30 मार्च 2026 - साहित्य अकादेमी के अध्यक्ष डॉ. माधव कौशिक ने रवींद्र भवन परिसर में आयोजित एक भव्य समारोह में 30 मार्च से 4 अप्रैल तक चलने वाले ‘साहित्योत्सव-2026’ का उद्घाटन किया। इस मौके पर भारत à¤
साहित्य अकादेमी पुरस्कार इस बार शुरु से विवादों में रहे, खासकर उसपर पड़ने वाली संस्कृति मंत्रालय की छाया और सरकारी दबावों में आए अकादेमी के कामकाज को लेकर। बेशक जो पुरस्कार नवंबर में घोषित होने थे, वो मार्च में घोषित हुए, लेकिन इसे लेकर भी लेखकों और साहित्यकारों में अलग अलग राय देखने को मिली। हिन्दी की जानी मानी लेखिका ममता कालिया बेशक अकादेमी पुरस्कार की हकदार रही हैं, उनका साहà
अंधेरे में मोमबत्तियों की तरह जलते हैं ये कवि – अशोक वाजपेयी
(अरविंद कुमार की रिपोर्ट)
इस बुरे और हताशा से भरे समय में रजा फाउंडेशन ने विश्व कविता समारोह का आयोजन कर अंधेरे में एक रौशनी फैलाने का काम किया।भले ही यह रोशनी थोड़ी हो टिमटिमाती हो पर उसने जीने की उम्मीद और उल्लास को जगाया दुख और पीड़ा का बयान करते हुए प्रेम