फारूक़ी ने बताई मीर तक़ी मीक की अहमियत
------
The Essensial Mir पर चर्चा
उर्दू के महान शायर मीर तक़ी मीर मिर्ज़ा ग़ालिब से कम बड़े शायर नहीं थे। ग़ालिब ने तो खुद लिखा है -
रेख्ता के तुम ही नहीं थे उस्ताद ग़ालिब, कहते हैं अहले ज़माने में कोई मीर भी था
लेकिन आज का
तीन साहित्यकारों को साहित्य अकादेमी ने महत्तर सदस्यता दी
नई दिल्ली; 30 मार्च 2026 - साहित्य अकादेमी के अध्यक्ष डॉ. माधव कौशिक ने रवींद्र भवन परिसर में आयोजित एक भव्य समारोह में 30 मार्च से 4 अप्रैल तक चलने वाले ‘साहित्योत्सव-2026’ का उद्घाटन किया। इस मौके पर भारत
साहित्य अकादेमी पुरस्कार इस बार शुरु से विवादों में रहे, खासकर उसपर पड़ने वाली संस्कृति मंत्रालय की छाया और सरकारी दबावों में आए अकादेमी के कामकाज को लेकर। बेशक जो पुरस्कार नवंबर में घोषित होने थे, वो मार्च में घोषित हुए, लेकिन इसे लेकर भी लेखकों और साहित्यकारों में अलग अलग राय देखने को मिली। हिन्दी की जानी मानी लेखिका ममता कालिया बेशक अकादेमी पुरस्कार की हकदार रही हैं, उनका साह
अंधेरे में मोमबत्तियों की तरह जलते हैं ये कवि – अशोक वाजपेयी
(अरविंद कुमार की रिपोर्ट)
इस बुरे और हताशा से भरे समय में रजा फाउंडेशन ने विश्व कविता समारोह का आयोजन कर अंधेरे में एक रौशनी फैलाने का काम किया।भले ही यह रोशनी थोड़ी हो टिमटिमाती हो पर उसने जीने की उम्मीद और उल्लास को जगाया दुख और पीड़ा का बयान करते हुए प्रेम
प्रसिद्ध रंग समीक्षक रवींद्र त्रिपाठी ने कहा है कि हमेशा से रंगमंच का संकट मौजूद रहा है, यहां तक कि भरत मुनि के काल में भी और नाटक करने वालों के भीतर भी एक नाटक होता रहता है। उनका कहना है कि यह सच है कि एनएसडी से इब्राहिम अल्का जी के ज़माने में एक से एक दिग्गज कलाकार स
सत्ता के आगे घुटने न टेकने वाले एक समाजशास्त्री का चले जाना
आंद्रे बेते नहीं रहे। हिंदी मीडिया के लिए भले ये खबर हो या ना हो या कोई छोटी मामूली सी खबर हो लेकिन एकेडमिक वर्ल्ड में आंद्रे बेते का नहीं रहना एक बहुत बड़ी खबर है और इस बात को दीपांकर गुप्ता ,वीणा दास, अभिजीत पाठक और आनंद कुमार जैसे प्रख्यात समाज शास्त्री समझ सकते हैं जो
हिंदी के प्रसिद्ध कथाकार एवम संपादक हरि भटनागर को रूस का मिख़अईल शोलअख़फ़ सम्मान देने की घोषणा की गई है।
भारत मित्र समाज, मसक्वा द्वारा भारतीय कथाकारों के लिए विशेष रूप से स्थापित यह सम्मान प्रतिवर्ष किसी एक कथाकार को दिया जाएगा।
वर्ष 2026 के लिए यह प्रथम वार्षिक सम्मान हरि भटनागर को देने का निर्णय लिया गया है।
Read More