बीते जमाने की मशहूर शास्त्रीय गायिका असगरी बाई ने मालिनी अवस्थी को एक बार पान का बीड़ा देते हुए कहा कहा कि पान खाते समय तीन बातों का जरूर ध्यान रखना चाहिए।पहली बात तो यह कि किसी भी व्यक्ति का दिया पान नहीं खाना चाहिए और खाने से पहले सबसे पहले उसे खोलकर देख लेना चाहिए
क्या आप विश्व प्रसिद्ध अभिनेत्री और नाट्य चिंतक स्टैला एडलर को जानते हैं ?
कठपुतली कला पर डाक टिकट जारी होगा, इशारा पपेट थिएटर फेस्टिवल का 22वां संस्करण
***
इशारा अंतर्राष्ट्रीय कठपुतली थिएटर फेस्टिवल का 22वाँ संस्करण 13 से 22 फरवरी 2026 तक इंडिया हैबिटैट सेंटर, नई दिल्ली में आयोजित किया जायेगा। इस वर्ष विश्वभर से आए अद्वितीय कठपुतली न
औपनिवेशिक शोषण जमींदारी उत्पीड़न व पुलिसिया दमन का दस्तावेज है ‘देहाती दुनिया’
नयी दिल्ली। हिंदी नवजारण के अग्रदूत आचार्य शिवपूजन सहाय के उपन्यास “देहाती दुनिया” के प्रकाशन के सौ साल पर आयोजित गोष्ठी में आलोचकों और वक्ताओं ने कहा कि यह उपन्यास बिहार में औपनिवेशिक ग़रीबी जमींदारी उत्पीड़न और पुलिसिया दमन का दस्तावेज है जिसके सहारे वहाँ के स
दुनिया का सबसे बड़ा नाट्य महोत्सव 27 जनवरी से दिल्ली में
नई दिल्ली। “कविता का स्वभाव औरत के स्वभाव से मिलता-जुलता है। कविता इशारों में बात करती है, यही एक स्त्री के जीवन का शिल्प है । “
हिंदी की प्रसिद्ध कवयित्
पुस्तक मेले का अनोखा और रचनात्मक सेल्फी पॉइंट: दीवार में एक खिड़की
नई दिल्ली में चल रहे 53 में विश्व पुस्तक मेले में आपको कई जगह एक ऐसी सेल्फी प्वाइंट मिलेगी जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की तस्वी
पुस्तक मेला – अंग्रेज़ों के ख़िलाफ 1857 से पहले हुए सशत्र विद्रोह की कहानी
क्या आप कुदपोली के अनाम स्वतंत्रता सेनानियों को जानते हैं जिन्होंने 1857 से 21 साल पहले सशत्र विद्रोह किया था? 53 वें विश्व पुस्तक मेले में इस विद्रोह के बारे में पुस्तक के लोकार्पण से शुरू हुआ उद्घाटन समारोह के दौरान इन अनाम स्वतंत्रता सेनानियों का ज़िक्र हुआ। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ‘द सागा ऑफ कुदोपली: द अनसंग स्टोरी ऑफ 1857’ के अनूदित संस्करणों का विमोचन किया।
स्त्री दर्पण नामक ऐतिहासिक पत्रिका की संपादक और जानी मानी समाजिक कार्यकर्ता रामेश्वरी नेहरू को लखनऊ में याद किया गया। इस मौके पर स्त्री लेखा पत्रिका के नए अंक का लोकार्पण प्रो. रूपरेखा वर्मा, वरिष्ठ कवि नरेश सक्सेना, प्रो रमेश दीक्षित, आलोचक वीरेन्द्र यादव और कवि कात्यायनी ने किया। स्त्री विमर्श केवल अस्मिता विमर्श नहीं है बल्कि वह दुनिया क