
साहित्य में विवाद अक्सर होते रहे हैं। चाहे लेखन पर, चाहे तथ्यों को पेश करने पर, चाहे भाषा पर या बड़े लेखकों की ज़िंदगी से जुड़ी सच्चाइयों पर। कथा सम्राट प्रेमचंद की ज़िंदगी, उनके लेखन, उनकी सादगी, उनके दर्शन या पत्रकारिता को लेकर बहुत कुछ लिखा, पढ़ा और बोला जाता रहा है। उनका तकरीबन सारा साहित्य उपलब्ध भी है और उनके उपन्यास, कहानियां और लेखन आज भी सबसे ज्यादा पढ़ा भी जाता



साहित्य के मौजूदा स्वरूप और चुनौतियों के बारे में अक्सर चर्चाएं होती रही हैं, समकालीन लेखन से लेकर तकनीक के इस बदलते दौर में पढ़ने लिखने की छूटती आदत पर भी चिंता जताई जाती रही है, लेकिन साहित्य अकादमी ने दो दिनों तक जो चर्चा की उसमें इसके तमाम पहलू सामने आए। खास बात यह कि यह पूरा आयोजन राष्ट्रपति भवन के सांस्कृतिक केन्द्र में हुआ और खुद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने


साहित्य अकादेमी ने साहित्य मंच कार्यक्रम में रवींद्रनाथ ठाकुर की जयंती के अवसर पर प्रकृति और पर्यावरण पर रवींद्रनाथ ठाकुर विषयक विमर्श का आयोजन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रख्यात अंग्रेजी लेखिका मालाश्री लाल ने की तथा राधा चक्रवर्ती, रेवा सोम और रेखा सेठी ने अपने अपने आलेख प्रस्तुत किए । अतुल सिन्हा की रिपोर्ट