मानवीय संवेदनाओं की अनुपम अभिव्यक्ति ‘आदाब अर्ज़ है’ 
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August 4, 2025

रंगमंच की दुनिया में लगातार कुछ न कुछ नए प्रयोग होते रहे हैं और तमाम ऐसे रंगकर्मी हैं जो कई चर्चित नाटकों का हिन्दी रुपांतरण करके पेश करते रहे हैं। खासकर फ्रांसीसी नाटक रंगकर्मियों की पसंद रहे हैं। फ्रांसीसी नाटककार मोलिएर सत्रहवीं शताब्दी के बड़े नाटककारों में रहे और पेरिस में जन्में मोलिएर आम तौर पर अपने कॉमेडी नाटकों और बैले के लिए जाने जाते थे और उनके

 हिन्दी गीतों में “यूडलिंग ” का आगमन और बादशाहत…    
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August 4, 2025

किशोर कुमार के गीतों में यूडलिंग का इस्तेमाल कैसे हुआ और कैसे किशोर दा ने फिल्म झुमरू में इसका ऐसा प्रयोग किया कि वह आज तक तमाम गायकों के लिए एक मिसाल है... ऐसे तमाम पहलुओं पर, किशोर कुमार को पहचान देने वाली फिल्मों पर और बड़े भाई अशोक कुमार के साथ उनके रिश्तों पर पेश है ये चौथी कड़ी.... प्रताप सिंह की कलम से  Read More

वो शाम कुछ अजीब थी, ये शाम भी अजीब है
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August 3, 2025

तीसरी कड़ी : कितने अलबेले  और कितने अज़ीम गायक थे किशोर कुमार   यह हमें याद रखना चाहिए गमगीन-गीतों की शबाहत {FORM} को अपने हुनर का रंग देने में माहिर किशोर दा का मूल स्

किशोर कुमार: हरफ़नमौला ज़िन्दगी की सिम्फ़नी
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August 3, 2025

 अपने हर गीत में नए प्रयोग करने वाले और आवाज़ का जादू दिखाने वाले किशोर कुमार हरफ़नमौला थे। अभिनय से लेकर गीत संगीत और फिल्म निर्माण और निर्देशन तक और अपनी शख्सियत में मस्तमौला। उन्हें याद करते हुए जाने माने लेखक- सिने पत्रकार प्रताप सिंह के आलेख की दूसरी कड़ी ... Read More

किशोर कुमार : एक अनूठे गायक की अज़ीम गायिकी के अक्स
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August 3, 2025

बेशक संगीत की दुनिया बदल गई हो, पार्श्वगायन का अंदाज़ बदल गया हो, इलेक्ट्रानिक और एआई तकनीक ने संगीत के मूल तत्व, गायन शैली, आवाज़ का अंदाज़ सबकुछ बदल दिया हो, लेकिन साठ और सत्तर के दशक के सदाबहार गायक-गायिकाओं, संगीतकारों और गीतकारों ने जो खज़ाना दे दिया, वह अमूल्य है। आज भी हरेक की वही पसंद है। किशोर कुमार, मोहम्मद रफ़ी, मुकेश, मन्ना जे, तलत महमूद, हेमंत कुमार से लेकर शमशाद

‘इन दबी सिसकियों से क्या होगा, लोग बहरे हैं चीखना होगा’
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July 21, 2025

ग़ाजियाबाद में साहित्य की नई धारा बहने लगी है, कवियों और शायरों ने यहां समां बांध रखा है। चाहे कथा संवाद हो या बारादरी, कहानी और शायरी के नए रंग फूटने लगे हैं। कई वरिष्ठ तो कई नए रचनाकारों की सक्रियता ने यहां शब्दों और भावनाओं की रचनात्मक अभिव्यक्ति को नया आयाम दिया है। इस बार की बारादरी में मशहूर शायर और कार्यक्रम के अध्यक्ष मोईन शादाब ने कहा कि गंगा जमुनी तहजीब की म

आज मीडिया एक हथियार बन गया है – हरिवंश
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July 19, 2025

राज्यसभा उपसभापति हरिवंश ने किया वरिष्ठ पत्रकार विजय विनीत की पुस्तक ‘जर्नलिज्म AI’ का लोकार्पण
  
17 जुलाई को जब गंगा की लहर

एक उपेक्षित महानायक की खोज : प्यासा
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July 17, 2025

ये महलों ये तख़्तों ये ताजों की दुनिया ये इंसाँ के दुश्मन समाजों की दुनिया ये दौलत के भूखे रिवाजों की दुनिया ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है... बेशक 1957 में आई प्यासा में साहिर लुधियानवी की इन बेहतरीन पंक्तियों को मोहम्मद रफ़ी ने जो दर्द भरी आवाज़ दी और इसे जिस किरदार ने परदे पर जीवंत कर दिया उस गुरुदत्त साहब को आ

जन सरोकारों के कथा शिल्पी थे से रा यात्री: कथा संवाद
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July 14, 2025

गाजियाबाद में साहित्य की परंपरा को एक अहम मुकाम तक पहुंचाने वाले कथा शिल्पी से रा यात्री की कथा यात्रा के कई पड़ाव रहे। उनकी कहानियों में समाज और सियासत

नया विवाद: प्रेमचंद की अंतिम यात्रा को लेकर उठे कुछ सवाल
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June 1, 2025

साहित्य में विवाद अक्सर होते रहे हैं। चाहे लेखन पर, चाहे तथ्यों को पेश करने पर, चाहे भाषा पर या बड़े लेखकों की ज़िंदगी से जुड़ी सच्चाइयों पर। कथा सम्राट प्रेमचंद की ज़िंदगी, उनके लेखन, उनकी सादगी, उनके दर्शन या पत्रकारिता को लेकर बहुत कुछ लिखा, पढ़ा और बोला जाता रहा है। उनका तकरीबन सारा साहित्य उपलब्ध भी है और उनके उपन्यास, कहानियां और लेखन आज भी सबसे ज्यादा पढ़ा भी जाता

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