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सात रंंग रेडियो का खास कार्यक्रम - आसपास।
राजनीतिक पार्टियों का हिसाब किताब। सबसे अमीर भाजपा। एडीआर की रिपोर्ट। भव्य दफ्तर। चुनाव में अंधाधुं
7 रंग रेडियो का खास कार्यक्रम आसपास। कृष्णा सोबती पर दिल्ली में दो दिनों के कार्यक्रम में क्या हुआ खास। रज़ा फाउंडेशन की ओर से आयोजित कार्यक्रम में क्या कहा अशोक वाजपेयी ने। सोबती ने कैसे अपनी जमा पूंजी साहित्य के लिए दान दे दी... सुनिए सिर्फ सात रंग रेडियो के इस कार्यक्रम में... सुनने के लिए क्लिक करें
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नई दिल्ली , 19 फरवरी। हिंदी की यशस्वी लेखिका कृष्णा सोबती क्या उभय लिंगी लेखिका थी? क्या उनकी भाषा राजनीतिक भाषा थी और उनकी लेखकीय दृष्टि और औपन्यासिक दृष्टि में कोई फांक थी? कृष्णा सोबती की जन्मशती के मौके पर रज़ा फाउंडेशन की ओर से आयोजित युवा समारोह में इन सवालों पर आरं
17 दिनों की चहल पहल, करीब दो सौ से ज्यादा नाटकों के मंचन और तमाम पुस्तकों के लोकार्पण के साथ भारत रंग महोत्सव का 25वां संस्करण खत्म हो गया। एनएसडी का यह चर्चित आयोजन रंगकर्मियों के लिए एक नई उम्मीद और उत्साह लेकर आता है और अब इसका दायरा पहले से कहीं बड़ा हो गया है। आयोजन बेशक सरकारी तामझाम और सीमाओं में बंधा हो, लेकिन यहां कला और संस्कृति के तमाम रूप सामने आते हैं। 7 र
भारंगम: 97 वर्षीय शास्त्रीय गायिका शन्नो खुराना पर किताब
नेहरू जी ने शन्नो खुराना का ओपेरा देखने के लिए विदेशी शिष्टमंडल से मुलाक़ात रद्द कर दी
नई दिल्ली 16 फरवरी। हिंदी में पहली ओपेरा करनेवाली पद्मभूषण से सम्मानित प्रख्यात शास्त्रीय गायिका शन्नो खुराना का ओपेरा जब साठ के दशक में दिल्ली में हो रहा था तब तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू उसे देखने आए थे, वे आइफेक्स में आधे घण्टे तक उसे
रंगमचं में सारी कलाएं रूपांतरित होती हैं -प्रयाग शुक्ल
नई दिल्ली 15 फरवरी। हिंदी के प्रसिद्ध कवि एवं कला समीक्षक प्रयाग शुक्ल ने कहा है कि रंगमंच ऐसी कला है जिसमें सारी कलाएं रूपांतरित होकर मिल जाती हैं और मिलकर एक नई कला बन जाती है। शुक्ल ने भारंगम समारोह के दौरान" श्रुति" कार्यक्रम के तहत '' रंग प्रसंग "पत्रि
अपने ही मकान में किरायेदार की तरह रहते थे रज़ा साहब
हैदर रज़ा के अंतिम वर्षों में बनाए गए चित्रों की प्रदर्शनी
पद्मविभूषण से सम्मानित महान चित्रकार सैयद हैदर रज़ा इतने नैतिक व्यक्ति थे कि वे अपने उस मकान में किरायेदार की
साहित्य अकादेमी ने आयोजित किया कुंभ में हिंदी कवि ‘सम्मिलन’
55वें विश्व पुस्तक मेले में हिंदी साहित्य में इस बार भी सदा की तरह स्त्रियों की आवाज़ें छाई रहीं। इस साल भी कई लेखिकाओं की पुस्तकें आई जिनमें कविता ,कहांनी ,उपन्यास ,आलोचना से लेकर अनुवाद तक शामिल है।इस बार मेले में कई विदुषी विदेशी महिला विद्वान भी आईं और उन्होंने विचार विमर्श में ह
कुंभ अब सामान्य कुंभ नहीं रहा.. महासमुद्र की तरह महाकुंभ हो गया है... वैसे तो फिल्मों में अक्सर कुंभ के मेले में बिछड़ने के किस्से सुने जाते रहे... रही भगदड़ की बात तो भला वो तो सियासत की भाषा में होती ही रहती है.. जहां भीड़ है वहां भगदड़ है और जहां भगदड़ है वहां मरना, गुम होना, डूबना, उतराना तो आम बात है... मंत्री संतरी तो यही कहते हैं भाई कि जहां इतनी भीड़ होगी, जहां इतना बड़ा आय