इलाहाबाद 5 मार्च। सीमांतिनी उपदेश की लेखिका हरदेवीं जेल जाने वाली पहली लेखिका थी और स्त्री लेखकों को शामिल किए बिना हिंदी नवजागरण अधूरा है। देश की जानी मानी स्त्री विमर्शकारों ने आज इलाहाबाद विश्विद्यालय शताब्दी समारोह के अंतर्गत स्त्री विमर्श पर आयोजित दो दिवसीय सम
वसंत साठे की जन्मशती पर क्या बोले आरिफ मोहम्मद खां
5 मार्च 1925 को नासिक में जन्में वसंत साठे जब 23 साल के थे तभी उन्होंने सोशलिस्ट पार्टी से अपना राजनीतिक सफर शुरु किया... इससे पहले आजादी आंदोलन के दौरान साठे ने छात्र जीवन के दौरान तमाम आंदोलनों में हिस्सा लिया.. बचपन से ही साहित्य, कला, संस्कृति में गहरी दिलचस्पी रही। बाद में कांग्रेस में शामिल हुए। 1972 में पहली बार अको
एशिया के सबसे बड़े साहित्योत्सव-2025 का आयोजन 7 मार्च से
संस्कृति एवं पयर्टन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत करेंगे उद्घाटन53 भाषाओं के 100 लेखिकाएँ समेत 723 लेखक और विद्वान भाग लेंगे 6 दिवसीय समारोह में 120 सत्र होंगे।<
बिहार आंदोलन के दौरान आनंद बाजार पत्रिका की ओर से छपने वाले रविवार के पहले अंक के कवर पेज पर जेपी और फणीश्वरनाथ रेणु की तस्वीर छपी। यह दौर पूरी तरह छात्र और युवा आंदोलन का था और जेपी आंदोलन ने बदलाव की एक नई आहट का संकेत दे दिया था। पटना के कांग्रेस मैदान से लेकर गांधी मैदान तक में जेपी की सभाओं में रेणु जी भी नज़र आए और आज़ादी आंदोलन के बरसों बाद उन्होंने खुद को राजनीतिक
अंग्रेजी की महिला पत्रकार ने उर्दू से मोहब्बत की पेश की मिसाल
क्या आप ऐसे किसी अंग्रेजी जर्नलिस्ट को जानते हैं जिन्हें उर्दू से इतनी मोहब्बत हो कि उसने बकायदा उर्दू सीखकर उर्दू में अखबारनवीसी की हो और उर्दू में किताब भी लिख डाली हो? ऐसे वक़्त में जब सियासत देश में हिंदी उर्दू को आपस में लड़ा रही हो, उर्दू के खिलाफ नफ़रत फैला रही हो ,उस ज़ुबां को धर्म से जोड़ा जा रहा हो और उसे मरती हुई ज़ुबान बताया जा रहा हो, एक मह
जब गंगूबाई हंगल ने एचएमवी को मुफ्त में अपना गाना दिया…
पद्मविभूषण से सम्मानित प्रख्यात शास्त्रीय गायिका गंगू बाई हंगल ने 1932 में जब पहला गाना रिकार्ड करवाया था तब एच एम वी ने उंनको एक पैसा भी नहीं दिया था। यह बात प्रसिद्ध संगीत विशेषज्ञ एवं जीवनीकार इरफान ज़ुबैरी ने कुमार गंधर्व स्मृति व्यायख्यान देते हुए कही। ज़ुबैरी इन दिनो रज़ा फाउंडेशन के लिए प्रख्यात शास्त्रीय गायक मल्लिकार्जुन मंसूर की जीवनी लिख रहे हैं। दिल्ली
क्या हिंदी में प्रतिरोध साहित्य काफी लिखा जा रहा है?
पिछले दिनों जनवादी लेखक संघ ने प्रतिरोध की काव्य संध्या का आयोजन किया जिसमें बड़ी संख्या में कवियों ने भाग लिया। लेकिन सवाल है कि क्या हिंदी में लिखे जा रहे लेख कविताओं का कोई असर समाज पर पड़ रहा है? क्या ये कविताएं सत्ता को चुनौती दे पा रही हैं? विमल कुमार का आलेख..
कुछ सालों से यह कहा जा रहा है कि हिंदी में प्रतिरोध साहित्य नहीं लिखा जा रहा है या अगर लिख
हिंदी के प्रख्यात आलोचक नित्यानंद तिवारी ने देश के हालात पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह दौर समाज मे नफ़रत फैलाने और दो कौमों हिन्दू मुस्लिम को आपस में लड़ाने का है ।
श्री तिवारी ने जनवादी लेखक संघ की ओर से दिल्ली के हरकिशन सिंह सुरजीत भवन में उत्तर प्रदेश और दिल्ली
कृष्णा सोबती हिंदी की पहली सम्पूर्ण राजनीतिक लेखिका थीं
रज़ा फाउंडेशन के सातवें युवा कार्यक्रम का समापन, कृष्णा सोबती के बारे में कई तथ्य आए समाने, विभाजन पर लिखने वाली सबसे अहम लेखिकाओं में रहीं सोबती, प्रगतिशील लेखक संघ ने क्यों नहीं किया अपने अधिवेशन में विभाजन का विरोध...
आपको जानकर ताज्ज़ुब होगा कि आजाद
युवा लेखन में पहले से कहीं ज्यादा गंभीरता दिखती है – वाजपेयी
युवा लेखक ज़िम्मेदार नागरिक की भूमिका निभाएं और अपने लेखन में मौजूदा समय को दर्ज़ करें - अशोक वाजपेयी
मशहूर कवि, लेखक और संस्कृतिकर्मी अशोक वाजपेयी ने कहा है कि इस बार युवा कार्यक्रम में महिला वक्ताओं ने ज्यादा अच्छा प्रदर्शन किया है और उन्होंने पुरुषों