पहले अंतर्राष्ट्रीय कला मेले में नज़र आने लगे कई रंग

नोबल विजेता डॉ. कैलाश सत्यार्थी ने नई पीढ़ी को मेला दिखाने की ज़रूरत बताई 

नयी दिल्ली, 5 फरवरी

इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र में आयोजित प्रथम अंतर्राष्ट्रीय कला मेला ने रंग जमाना शुरू कर दिया है। मेले के दूसरे दिन नोबल पुरस्कार विजेता डॉ. कैलाश सत्यार्थी भी मेला देखने पहुंचे जबकि शाम में साहित्य कला परिषद् की ओर से फ्यूज़न डांस पेश किया गया।

डॉ सत्यार्थी ने कई कलाकारों से मुलाकात की और उनसे उनकी कला के बारे में जाना। उन्होंने कहा कि “मुझे यह बात जानकार बड़ी ख़ुशी और हैरानी भी हुई कि पहली बार भारत में इस तरह का कला मेला लगाया जा रहा है। यह एक तरीके से तीर्थ स्थल बनेगा धीरे-धीरे. देश और दुनिया के कलाकार यहाँ आकर प्रेरणा लेंगे।” उन्होंने कहा कि कला इतनी गहरी चीज़ है और इतनी सरल भी है कि जो बात बड़ी से बड़ी किताबें नहीं कह सकती वो कला के माध्यम से कह दिया जाता है। उनका मानना है कि देश भर के स्कूली बच्चों को और नई पीढ़ी को यहाँ आना चाहिए और हमारी संस्कृति की समृद्धि को देखना चाहिए।

शाम को साहित्य कला परिषद् ने रंगारंग नृत्य प्रस्तुति से समां बाँध दिया। नृत्य प्रस्तुति की शुरुआत ‘देवा श्री गणेशा’ पर गणेश वंदना से हुई और उसके बाद पंजाबी लोक नृत्यों भाँगड़ा, गिद्दा, गुजराती फोक डांस डांडिया, और राजस्थान के कालबेलिया नृत्य सहित कई मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किये गए। कलाकार कांती प्रसाद ने पॉटरी वर्कशॉप भी आयोजित किया जिसमें बढ़-चढ़ कर कलाप्रेमियों ने हिस्सा लिया।

ललित कला अकादमी की ओर से आयोजित यह कला मेला 18 फरवरी तक दिल्ली के इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र में चल रहा है जिसमें देश-विदेश से तकरीबन 800 से अधिक कलाकार हिस्सा ले रहे हैं।

Posted Date:

February 6, 2018

8:11 pm

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