पहली बार होने जा रहा है अंतर्राष्ट्रीय कला मेला

उपराष्ट्रपति करेंगे पहले अन्तर्राष्ट्रीय कला मेला का उद्घाटन

कला और संस्कृति की बेहतरी, संरक्षण और प्रोत्साहन के लिए काम करने वाली देश की सबसे बड़ी संस्था ललित कला अकादमी 4 से 18 फरवरी तक अन्तर्राष्ट्रीय कला मेला का आयोजन करने जा रही है। दिल्ली के इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र में रोजाना 12 बजे से रात 8 बजे तक पहली बार इतने बड़े पैमाने पर हो रहे इस कला मेले में देश विदेश के कलाकार और कला समूह अपनी कलाकृतियाँ और सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश करने जा रहे हैं।

इस कला मेले का उद्घाटन उपराष्ट्रपति एम.वैकया नायडू करेंगे और उनके साथ होंगे संस्कृति मंत्री डॉ. महेश शर्मा, ललित कला अकादमी के प्रशासक सि.एस.कृष्ण सेट्टि और इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी। उद्घाटन के बाद श्रीलंका के करुणादास ओलाबोडुवा नृत्य समूह की ओर से लोक नृत्य और भारत के पंडित हरीश गंगानी एवं साथियों का कथक गायन पेश किया जाएगा।

कला मेले के दौरान विभिन्न कला गतिविधियों और वर्कशॉप का आयोजन किया होने जा रहा है जिनमें दृश्यकला, फिल्मोत्सव, पॉटरी/पटचित्र/पेपरमेशी वर्कशॉप, बेस्ट फ्रॉम वेस्ट वर्कशॉप, संगीतमय प्रस्तुतियाँ, डांस-ड्रामा, जेकिया, सीवेन्सी द्वारा वॉयलिन मेकिंग वर्कशॉप, आर्टिस्ट गपशप प्वाईंट, नुक्कड़ नाटक और प्रत्यक्ष प्रस्तुतियों का भी आयोजन किया जायेगा। अन्तरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में पुर्तगाल के नूनो फ्लोरेस द्वारा वॉयलिन, एकेडमी साउथ एशियन डांस, यू.के. द्वारा प्रथम विश्व युद्ध में प्रेम और त्याग की कहानी “द ट्राथ-उसने कहा था”, जेरोस्लेव सिवेन्सी जेकिय का वॉयलिन, यू.के.की देविका राव का यक्षगान, हंगरी के नोबर्ट केल का पियानो और देविका डांस थिएटर यू.के. की ओर से ‘या देवी’ आदि सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आयोजन किया जाएगा।

ललित कला अकादमी के प्रशासक सि.एस.कृष्ण सेट्टि बताते हैं कि “अकादेमी ने पहली बार इतने बड़े स्तर पर अन्तर्राष्ट्रीय कला मेला का आयोजन किया है। यह उन कलाकारों के लिए एक सुनहरा अवसर की तरह है जो कला दीर्घाओं में कलाकृतियों का प्रदर्शन करने में समर्थ नही हैं। कला समुदाय के प्रति एक मजबूत प्रतिबद्धता रखते हुए यह कला मेला कलाओं में आधुनिक प्रवृतियों के समकालीन प्रवाह की मिसाल देखने का अनूठा अवसर प्रदान करेगा। कुल मिलाकर यह अपनी तरह का पहला और कला जगत में मील का पत्थर साबित होगा।

इस कार्यक्रम में 800 से ज्यादा कलाकार हिस्सा ले रहे हैं। इसे अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर सफल बनाने के लिए कई दूतावास और सांस्कृतिक केन्द्र इस उत्सव में भाग ले रहे हैं। चीन, वेनेजुएला, पेरू, पुर्तगाल, श्रीलंका, पौलेंड, टयूनिशिया, मेक्सिको, बांग्लादेश, त्रिनिदाद, टोबेगो, फीजी, फ्रांस, पापुआ, न्यू गीनिया, चेकिया, यू.के, स्पेन और ब्राजील सहित कई देश मेले में भाग ले रहें हैं। अन्तर्राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व सहित भारतीय कलाकारों और संस्थाओं के लिए लगभग 325 स्टॉल हैं।

अन्तरराष्ट्रीय कला मेला एक ऐसे समय में आयोजित किया जा रहा है जब कला के बाजार में भारतीय कला के लिए सार्वभौम मंच हेतु एक प्रत्यक्ष मांग है। कला मेला का प्रमुख उद्देश्य कलाकारों और कला विशेषज्ञों के मध्य प्रत्यक्ष संवाद को प्रोत्साहित करते हुए कला के प्रति जागरूकता को बढ़ावा है जो कि ललित कला अकादेमी का लक्ष्य है। इस व्यापक पहुँच में पूरे विश्व के राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित कलाकारों और कला आलोचकों की प्रतिभागिता शामिल है।

(ललित कला अकादमी की प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित)

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Posted Date:

February 3, 2018

3:25 pm

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