
दिल्ली के मयूर विहार फेज 1 के आनंद लोक में उनका घर है पूर्वाशा। अब वहां उनके न होने का सन्नाटा पसरा है। बीमार वो लंबे समय से थीं लेकिन आज यानी 25 जनवरी की सुबह उन्होंने हमेशा के लिए विदा ले लिया। अगले महीने 18 तारीख को कृष्णा सोबती 94 की होने वाली थीं, लेकिन उन्हें इस बात से नफ़रत थी कि कोई उन्हें बूढ़ा या बुज़ुर्ग कहे। आखिरी समय तक वो लिखती रहीं, देश के बारे में सोचती रहीं, सियासत क


94 साल की उम्र में कृष्णा सोबती का चले जाना एक युग के खत्म होने जैसा है। बहुत कम लोग जानते हैं कि कृष्णा सोबती ने कुछ कविताएं भी लिखी हैं। कुछ ऐसी कविताएं जिनसे उनके सत्ता और सरकारों के प्रति नाराज़गी भी झलकती है और उनके भीतर छिपी बेचैनी भी दिखती है। उनके उपन्य


बातें अतीत की, विषाद की, सुखद भी !
करीब तीन दशक बाद गत सप्ताह गायकवाड़ी नगर बडौदा (आज बड़ोदरा) प्रवास का मौका मिला| पत्रकार सुरक्षा हेतु राष्ट्रीय कानून को लेकर गुजरात और महाराष्ट्र के दौरे पर गया थ


भारतीय कला और लोक संस्कृति के विभिन्न आयामों को आगे बढ़ाने और कलाकारों को मंच देने के काम में जुटा किरण नादर म्युजियम ऑफ आर्ट (केएनएमए) फरवरी में तीन दिनों का चित्रकला महोत्सव करने जा रहा है। दिल्ली के साकेत में म्युजियम के परिसर में होने जा रहे इस महोत्सव में देश भर की लोक और आदिवासी कलाओं क

भारत में ग्रैफिटी कला अब एक नए रूप में सामने आ रही है। ग्रैफिटी यानी दीवारों पर बनाए जाने वाले विशाल चित्रों की श्रृंखलाएं या किसी थीम पर की जाने वाली वॉल पेंटिंग। इसकी झलक आपको दिल्ली और दूसरे महानगरों में तो मिल ही जाएगी, लेकिन अब सरकारी विकास की तमाम इबारतों में अब ग्रैफिटी आर्ट का इस्तेमाल एक नई परंपरा की तरह देखने में आ रही है। नोएडा के तमाम अंडरपास हों, मेट्रो के तमा

कुंभ आपने पहले भी देखा होगा। इसके बारे में सुना होगा। तस्वीरों में और चैनलों पर देखा होगा। हर 12 साल में लगने वाले कुंभ की खासियत के बारे में जाना होगा। 2013 में पूर्ण कुंभ का नज़ारा भी देखा होगा और इस बार के अर्धकुंभ की शानदार झलक भी देख रहे होंगे। देश की संस्कृति का एक बेहतरीन आयाम देखने को मिलता है इस महाआयोजन में। इस बार उत्तर प्रदेश सरकार और यहां तक कि क

वरिष्ठ पत्रकार श्रीचंद्र कुमार पिछले दिनों पश्चिम बंगाल के कुछ तीर्थ और पर्यटन स्थलों पर गए। मुख्य रूप से उनका मकसद गंगा सागर जाना था और वो वहां गए भी। लेकिन वहां जाने से पहले उन्होंने कई और धार्मिक स्थलों को घुमक्कड़ी और पत्रकार वाले अंदाज़ में देखा। पहले वो बंगाल के बीरभूम जिले के मशहूर तीर्थ तारापीठ गए फिर कोलकाता के शक्तिपीठ यानी काली मंदि

नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट में देखिए छगनलाल जाधव के दुर्लभ रेखाचित्र

अपने देश में गांधी जी पर बहुत काम हुआ है। गांधी को एक व्यक्ति से ज्यादा एक दर्शन माना जाता है और वही दर्शन हमारे कलाकारों से लेकर बुद्धिजीवियों तक को प्रेरणा देता रहा है। गां


अपने बिंदास अंदाज़ और बेहतरीन अदाकारी के लिए मशहूर कंगना रनौत की फिल्म ‘मणिकर्णिका : द क्वीन ऑफ झांसी ’ का सबको बेसब्री से इंतज़ार है। फिलहाल इस फिल्म के दो गीत रिलीज़ हो चुके हैं। दिल्ली से सटे गुरुग्राम के किंगडम ऑफ़ ड्रीम्स में हुए एक भव्य और रंगारंग कार्यक्रम में फिल्


हमारे समय के हिंदी के सबसे कद्दावर और सबसे वरिष्ठ साहित्यकार नामवर सिंह अस्वस्थ हैं। कल उन्हें ब्रेनहेमरेज होने की खबर आई। किसी ने बताया कि उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया है। फिर किसी ने बताया कि वह एम्स के ट्रामा सेंटर में भरती हैं। हिंदी के अखबारों में उनके अस्वस्थ होने की छोटी सी खबर आई। हिंदी