‘सरयू से गंगा’ ने दिलाई ‘वोल्गा से गंगा तक’ की याद
7 Rang
May 1, 2019

अपने ज़माने के मशहूर सांस्कृतिक हस्ताक्षर रहे जाने माने यायावर लेखक राहुल सांकृत्यायन के उपन्यास ‘वोल्गा से गंगा तक’ जिसने भी पढ़ा होगा, उसके लिए भारतीय इतिहास में ब्राह्मणवाद के तमाम ढकोसलों को समझना आसान है। राहुल जी ने यह उपन्यास 1943 में लिखा था। साहित्य अकादमी सभागार में 28 अप्रैल को मशहूर स्तंभकार और लेखक कमलाकांत त्रिपाठी की किताब ‘सरयू से गंगा

‘प्रथमा’ की कलाकारों ने कितना ‘स्तब्ध’ किया…
7 Rang
April 29, 2019

  • रवीन्द्र त्रिपाठी

ललित कला अकादमी पिछले दिनों पांच महिला कलाकारों के बेहतरीन काम का गवाह बनी। इन पांचों कलाकारों ने अपनी सामूहिक प्रदर्शनी का नाम दिया था – ‘प्रथमा’। इन पांचों में एक मूर्तिशिल्पी हैं- निवेदिता मिश्रा, एक सेरामिक कलाकार हैं-मीनाक्षी राजेंद्र और तीन पेंटर हैं-माधुरी शर्मा, सोनी खन्ना और विम्मी इंद्रा। इन कलाकारों ने मिलकर

गजलों की भाषायी संस्कृति गंगा-जमुनी तहजीब से बनी – कृषक
7 Rang
April 24, 2019

डी एम मिश्र के गजल संग्रह ‘वो पता ढूँढे हमारा’ का विमोचन

लखनऊ। ‘रेवान्त’ पत्रिका की ओर से कवि डी एम मिश्र के नये गजल संग्रह ‘वो पता ढूंढे हमारा’ का विमोचन 21 अप्रैल 2019 को लखनऊ के कैफ़ी आज़मी एकेडमी के सभागार में सम्पन्न हुआ। यह उनका चौथा गजल संग्रह है। जाने माने आलोचक डा जीवन सिंह, मशहूर कवि व गजलकार रामकुमार कृषक, कवि स्वप

बाल रंगमंच की अमिट हस्ताक्षर रेखा जैन
7 Rang
April 22, 2019

संस्कृति और कला के क्षेत्र में खास दखल रखने वाले जाने माने पत्रकार रवीन्द्र त्रिपाठी का मौजूदा दौर की पत्रकारिता में कला-संस्कृति को एक हद तक बचाए रखने में अहम भूमिका है। जनसत्ता समेत तमाम अखबारों में नियमित रूप से इस क्षेत्र में लिखते हुए रवीन्द्र त्रिपाठी ने इस यात्रा को बदस्तूर जारी रखा है। अखबार के साथ साथ खबरिया चैनलों में भी अपने

आखिर क्यों खेमे में बंटने को मजबूर होते हैं कलाकार
7 Rang
April 11, 2019

हम लाख कहें कि कलाकारों, संस्कृतिकर्मियों, साहित्यकारों और पत्रकारों को सियासी खेमेबाज़ी से दूर रहना चाहिए लेकिन जब देश की बात आती है, लोकतंत्र बचाने की बात आती है और अपने देश की गंगा-जमुनी संस्कृति को बचाने की बात आती है तो यह बुद्धिजीवी और कलाकार तबका भी खेमे में बंटा नज़र आता है। चाहे वह अवार्ड वापसी के दौरान का मामला हो, कुछ पत्रकारों-साहित्यकारों,

आखिर क्यों खेमे में बंटने को मजबूर होते हैं कलाकार
7 Rang
April 10, 2019

हम लाख कहें कि कलाकारों, संस्कृतिकर्मियों, साहित्यकारों और पत्रकारों को सियासी खेमेबाज़ी से दूर रहना चाहिए लेकिन जब देश की बात आती है, लोकतंत्र बचाने की बात आती है और अपने देश की गंगा-जमुनी संस्कृति को बचाने की बात आती है तो यह बुद्धिजीवी और कलाकार तबका भी खेमे में बंटा नज़र आता है। चाहे वह अवार्ड वापसी के दौरान का मामला हो, कुछ पत्रकारों-साहित्यकारों,

कवि सुधा उपाध्याय को शीला सिद्धान्तकर स्मृति सम्मान
7 Rang
April 9, 2019

राग विराग कला केंद्र की ओर से आयोजित एक समारोह में कवि सुधा उपाध्याय को उनकी रचना ‘इसलिए कहूंगी मैं’ के लिए 14वें शीला सिद्धान्तकर स्मृति सम्मान से नवाज़ा गया। दिल्ली के त्रिवेणी सभागार में प्रसिद्ध लेखिका डॉ नूर जहीर ने उन्हें सम्मानित किया।

इस मौके पर कवि और आ

…और एक बयान यह भी
7 Rang
April 8, 2019

चुनाव के मौके पर बयानों की कड़ी में वामपंथी और प्रगतिशील संगठनों ने भी एक साझा बयान जारी करके देश की सांस्कृतिक विरासत और धर्मनिरपेक्ष ढांचे को बचाने के लिए सोच समझ कर वोट देने की अपील की है। यह बयान भी पढ़िए...

एक बार फिर आम चुनाव सामने हैं। और ठीक पांच साल पहले जिन हाथों में केंद्र की सत्ता सौंपी गयी थी, उनकी जनविरोधी कारगुज़ारियाँ भी हमारे सामने हैं।

विद्रोही से क्रान्तिकारी में रूपान्तरण की कथा – कौशल किशोर
7 Rang
April 5, 2019

गंगा प्रसाद स्मृति दिवस का आयोजन

वैचारिक काम को आगे बढ़ाने की जरूरत - राजेश कुमार

आज के दौर में लेनिन और मार्क्स को भले ही कम लोग याद करें, वैचारिक और सियासी उठापटक में बेशक मार्क्सवाद-लेनिनवाद क

आपदाओं से जुड़े मिथकों को तोड़ती एक प्रदर्शनी
7 Rang
April 2, 2019

अपने देश में हादसों या प्राकृतिक आपदाओं पर भी कम राजनीति नहीं होती। चाहे वो भूकंप की त्रासदी हो या केदारनाथ जैसी आपदाएं, बाढ़ की विभीषिका हो या दंगों के बाद की कड़वा सच। हर मौके का सियासी इस्तेमाल होता रहा है। राहत और बचाव के नाम पर कोशिशें कई होती हैं, श्रेय लेने की होड़ भी मची रहती है, लेकिन ईमानदारी से क

Copyright 2024 @ Vaidehi Media- All rights reserved. Managed by iPistis