
चुनाव के मौके पर बयानों की कड़ी में वामपंथी और प्रगतिशील संगठनों ने भी एक साझा बयान जारी करके देश की सांस्कृतिक विरासत और धर्मनिरपेक्ष ढांचे को बचाने के लिए सोच समझ कर वोट देने की अपील की है। यह बयान भी पढ़िए...
एक बार फिर आम चुनाव सामने हैं। और ठीक पांच साल पहले जिन हाथों में केंद्र की सत्ता सौंपी गयी थी, उनकी जनविरोधी कारगुज़ारियाँ भी हमारे सामने हैं।

गंगा प्रसाद स्मृति दिवस का आयोजन
वैचारिक काम को आगे बढ़ाने की जरूरत - राजेश कुमार

आज के दौर में लेनिन और मार्क्स को भले ही कम लोग याद करें, वैचारिक और सियासी उठापटक में बेशक मार्क्सवाद-लेनिनवाद क


अपने देश में हादसों या प्राकृतिक आपदाओं पर भी कम राजनीति नहीं होती। चाहे वो भूकंप की त्रासदी हो या केदारनाथ जैसी आपदाएं, बाढ़ की विभीषिका हो या दंगों के बाद की कड़वा सच। हर मौके का सियासी इस्तेमाल होता रहा है। राहत और बचाव के नाम पर कोशिशें कई होती हैं, श्रेय लेने की होड़ भी मची रहती है, लेकिन ईमानदारी से क

साहित्य, संस्कृति, शिक्षा के साथ सियासत के सेतु थे डॉ शैलेन्द्र नाथ श्रीवास्तव

पटना। अगर आज साहित्यकार और राजनेता डॉ शैलेन्द्र नाथ श्रीवास्तव होते तो शायद संस्कृति और राजनीति के मौजूदा स्वरूप में कु

ललित कला अकादेमी की ओर से हर साल आयोजित की जाने वाली राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी कला समुदाय के कैलेन्डर में सर्वाधिक प्रतिष्ठित आयोजन है। इस वर्ष आयोजित 60वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी उत्कृष्ट कलात्मक कृतियों के प्रदर्शन के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभाशाली कलाकारों को अनुशंसा और मान्यता प्रदान करने का भी एक मंच है। इसमें प्रदर्शित सभी कृतियाँ

लखनऊ के सामाजिक व सांस्कृतिक संगठनों ने शहीदों को याद किया
23 मार्च की खास अहमियत है। देश भर में इस दिन को शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन तीन क्रान्तिकारियों - भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी दी गयी थी। इसी दिन पंजाबी के क्रांतिकारी कवि अवतार सिंह पाश को खालिस्तानी आतंकवादियों ने अपनी गोली

नुक्कड़ नाटकों को आंदोलन बना देने वाले अरविंद गौड़ मानते हैं - रंगमंच सामाजिक सरोकारों से जुड़ा होना चाहिए

जब देश में रंगमंच आंदोलन कहीं हाशिए पर खिसक गया हो और जब रंगकर्मियों के सामने सिनेमा, टीवी और डिजिटल मीडिया की बड़ी चुनौतियां हों, ऐसे में अगर कोई रंगकर्मी लगाता


नामवर सिंह किसके थे? वामपंथियों के या दक्षिणपंथियों के या फिर मध्यमार्गी? उनकी आखिरी विदाई के वक्त उनके पार्थिव शरीर पर सीपीआई के छात्र संगठन एआईएसएफ ने अपनी पट्टी के साथ फूल चढ़ाए थे। उनके गुज़र जाने पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक न

20वां भारत रंग महोत्सव खत्म

रंगमंच की दुनिया में नए नए प्रयोगों और कई नए नाटकों के मंचन के साथ 20वां भारत रंग महोत्सव खत्म हो गया। कथक की पाठशाला कहे जाने वाले पद्मविभूषण पंडित बिरजू महाराज को इस मौके पर सुनना एक अनुभव था। राष्ट्रीय नाट्य वि

रोहित वेमुला की आत्महत्या और उसके बाद उठे जनाक्रोश ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। दलित राजनीति के नाम पर वेमुला की खुदकुशी एक बड़ा मुद्दा बनी लेकिन इस घटना के पीछे के सच को तलाशने की कोशिश सही तरीके से कभी नहीं हुई। इस घटना के चार साल बाद फिल्मकार दीपा धनराज ने इस पूरी घटना पर और इसके तमाम पहलुओं पर फिल्म बनाई – वी हैव नॉट कम हियर टू डाई ।