भव्यता का सूनापन
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August 13, 2019

  • रवीन्द्र त्रिपाठी

दो-तीन साल पहले जब फिरोज अहमद खान ने बॉलीवुड की बेहद चर्चित फिल्म मुगले आजम’ को रंगमच पर पेश किया तो न सिर्फ फिल्म प्रेमियों को के. आसिफ की उस बहुचर्चित फिल्म की याद फिर से आई बल्कि नाटक की दुनिया में भी उसे एक नए प्रयोग के रूप मे देखा गया। शायद उसी से प्रेरणा लेकर राजीव गोस्वामी ने पिछले हफ्ते जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम के विशाल

एक लंबा वाक्य जो अनंनता की ओर अग्रसर था
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August 6, 2019

  • रवीन्द्र त्रिपाठी

क्या किसी कवि या लेखक को समझने के लिए उसकी कोई एक रचना कुंजी हो सकती है? ऐसी कुंजी जिसके माध्यम से हम उसके रचनालोक का प्रवेश- द्वार खोलें और पा लें कि उसके यहां क्या क्या है । इस प्रश्न का उत्तर   हां भी है और नहीं भी। ये संभाव्यता और असंभाव्यता- दोनों

सुनील यादव का ज्यामितीय अमूर्तन
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August 6, 2019

  • रवीन्द्र त्रिपाठी

श्रीधराणी कला दीर्घा में चल रही सुनील यादव की कलाकृतियों की प्रदर्शनी इस सुखद विस्मय से भर देती हैं कि कैसे एक अपेक्षाकृत अत्यंत युवा कलाकार ने अपना एक विशिष्ट मुहावरा विकसित कर लिया है।  कई बड़ी उम्र के कलाकार भी लंबे समय तक काम करने के बाद  अपना मुहावरा विकसित नहीं कर पाते। ज्यादातर वे कई दिशाओं में भ

बच्चे बचाएंगे पर्यावरण
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August 6, 2019

" हरित सप्ताह" पर बच्चों ने ली जल, धरा और पर्यावरण को बचाने की शपथ

सिल्वर लाइन प्रेस्टीज स्कूल में बच्चों को बताया गया हरियाली का महत्व               

गाजियाबाद। सिल्वर लाइन प

तबले की थाप और कथक के घुंघरुओं ने बांधा समां
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August 1, 2019

गुवाहाटी के आरोहण ऑडिटोरियम में तबले की थाप और कथक के घुंघरुओं ने उस शाम समां बांध दिया जब प्रतिश्रुति फाउंडेशन ने अपने स्थापना दिवस के मौके पर संस्कृतिप्रेमियों को एक जगह इकट्ठा किया था। युवा तबलावादक ज़ुल्फ़िकार हुसैन ने जब तबले पर तीन ताल में अपनी उंगलियों का कमाल

मंच पर कहानियों का कोलाज
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August 1, 2019

  • रवीन्द्र त्रिपाठी

बतौर रंग निर्देशक विनय शर्मा की पहचान राष्ट्रीय रही है। विनय लंबे अरसे से कोलकाता में रंगमंच पर सक्रिय हैं और श्यामानंद जालान ने उन्हें अपनी रंगसंस्था `पदातिक’ से जोड़ा। वे निर्देशन के अलावा लेखन और अभिनय में भी अपनी अच्छी पहचान बना चुके हैं। वे एक बेहतरीन अभिनेता हैं इसकी मिसाल दिल्ली के दर्शकों को

आखिर प्रेमचंद आज भी क्यों प्रासंगिक हैं?
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July 31, 2019

  • अतुल सिन्हा

हमें आज़ाद हुए 72 साल हो गए। और हिन्दी के कालजयी लेखक प्रेमचंद को गुज़रे 83 साल बीत गए। जन्म बेशक उनका 31 जुलाई 1880 को हुआ हो, लेकिन उनका लेखन युग तकरीबन चार - साढ़े चार दशकों का रहा। आज दुनिया भर में आतंकवाद को लेकर इतनी हा

मध्य प्रदेश नाट्य विद्यालय के कई रंग
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July 24, 2019

  • रवीन्द्र त्रिपाठी

आलोक चटर्जी एक बेहद चर्चित और स्थापित नाट्य अभिनेता है। पर एक संस्थान को रचनात्मक दिशा देने की उनकी क्षमता तब उजागर हुई जब पिछले हफ्ते मध्य प्रदेश नाट्य विद्यालय का नाट्य समारोह हुआ। इस संस्थान का निदेशक बने उन्हें सिर्फ नौ-दस महीने ही हुए है पर एक पूरे सत्र में जिस तरह के स्तरीय नाटक हुए उससे तो ऐस

‘उत्तर आधुनिकता परोसने की कोशिश में सुमेरू पर्वत न उठाएं’
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July 15, 2019

"कथा संवाद " में वंदना जोशी की कहानी "नगर ढिंढोरा" ने बजाया डंका             

 गाजियाबाद। साहित्य देश और समाज की तस्वीर हमारे सामने लाने का शाश्वत जरिया है। कलमकार के रूप में हमारी जिम्मेदारी है कि हम देश में पनप रही विद्रूपताओं और विसंगतियों को देखें, समझें और इस बात का आकलन करें कि इनके निस्तारण में एक

रज़ा और उनके सहयात्री कलाकार
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July 12, 2019

  • रवीन्द्र त्रिपाठी

किसी बड़े कलाकार के अवदान के मूल्यांकन के लिए उसके संपूर्ण कलाकर्म को ध्यान में रखना जरूरी होता है। लेकिन सिर्फ इतने से ही बात नही बनती। ये भी देखना चाहिए कि उसका अपने सहकर्मी कलाकारों से कैसा संबंध रहा। कला एकांत साधना है पर साथ ही सामूहिक कर्म भी है। जब कोई कलाकार- लेखक और संगीतकार भी- किसी दौर में सक्रिय

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