

देख तमाशा दुनिया का...

दो हफ्ते हो गै, दस दिनां से

वाराणसी के जाने माने रंगकर्मी गोपाल गुर्जर की बेशक कोई राष्ट्रीय पहचान न बन पाई हो लेकिन उनकी प्रतिभा को रंग जगत और सिने जगत ने कुछ हद तक पहचाना जरूर। उनका गुज़रना कम से कम वाराणसी रंगमंच की दुनिया के लिए एक बड़ी क्षति है। संवेदनशील पत्रकार और ‘नाद रंग’ पत्रिका के संपादक आलोक पराड़कर ने गोपाल गुर्जर को ‘र

लंबे समय से पत्रकारिता से जुड़े और साहित्य की दुनिया में गंभीरता से काम करने वाले आलोक यात्री की लेखनी तमाम अहम सवालों पर एक खास शैली में खुद को अभिव्यक्त करती है। तमाम अखबारों के लिए कॉलम लिखने वाले और खासकर गाज़ियाबाद में अपनी संस्था 'मीडिया 360' के ज़रिये लगातार साहित्यिक गतिविधियों को अंजाम देने वाले आलोक यात्री एक बेहद संव


एक कलाकार सिर्फ सम्मानों या रिश्तों से बड़ा नहीं होता। सतीश गुजराल के चित्रों और तमाम कलाकर्म में जो संवेदना दिखती है, वह उन्हें उस पहचान से कहीं दूर खड़ा करती है कि वो पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल के छोटे भाई थे या उन्हें पद्म विभूषण या कला का राष्ट्रीय पुरस्क

(जाने माने कार्टूनिस्ट और एकदम ठेठ देसी अंदाज़ में अपने चरित्रों के ज़रिये लोगों के दिलों में बस जाने वाले काक साहब 16 मार्च को 80 साल के हो गए... काक साहब से जुड़ी तमाम यादों को ताज़ा करते हुए हमारे साथी और तीन दशकों से नुक्कड़ नाटकों के लिए समर्पित अस्मिता थिएटर ग्रुप के संस्थापक अरविंद गौड़ ने बेहतरीन तरीके से उन्हें जन्मदिन पर याद किया... आप

हमारे साथी और वरिष्ठ पत्रकार शरद गुप्ता पिछले दिनों राजस्थान गए थे... खासकर उदयपुर और कुंभलगढ़ घूमकर आए... उनकी नज़र में उदयपुर के सिटी पैलेस औ

वरिष्ठ पत्रकार और बीबीसी से लंबे वक्त तक जुड़े रहे क़ुरबान अली ने अपने शुरुआती दिनों में डॉ राही मासूम रज़ा के साथ कई मुलाकातें कीं, बहुत सा वक्त गुज़ारा... तब से लेकर आजतक देश के हालात को करीब से देखने वाले कुरबान अली ने डॉ रज़ा के गुज़रने के बाद ये आलेख संडे ऑब्जर्वर में लिखा था... उन्होंने डॉ राही मासूम रज़ा को कैसे देखा.. आप भी पढ़िए...

(हमारे साथी, वरिष्ठ पत्रकार, अमर उजाला में लंबे समय तक अहम पदों पर रहे और कला संस्कृति के क्षेत्र में लंबे समय से काम कर रहे प्रभात सिंह की वेबसाइट 'संवाद' कुछ अलग हटकर है। डॉ राही मासूम रज़ा को लेकर संवाद ने कुंवरपाल सिंह का एक आलेख छापा है। दरअसल

अमर भारती काव्योत्सव में उर्वशी अग्रवाल की कविता 'मी टू' ने बटोरी सराहना

गाजियाबाद। रोटी, कपड़ा और मकान के बाद आदमी की सबसे बड़ी जरूरत साहित्य है। समाज के लिए बुनियादी सुविधाओं के साथ तुलसी, सूर, कालिदास, शेक्सपियर, मिल्टन, प्रेमचं

सिल्वर लाइन प्रेस्टीज स्कूल के बच्चों ने 150वीं जयंती पर बापू को दी श्रद्धांजलि
गांधी जयंती एवं नवरात्र के मौके पर गाजियाबाद के सिल्वर लाइन प्रेस्टीज स्कूल में बच्चों द्वारा मनोहारी प्रस्तुतियां प्रस्तुत की गई। स्कूल की तीनों शाखाओं में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को व