देश विदेश के अलग अलग हिस्सों में भारतीय साहित्य, कला और संस्कृति से जुड़े तमाम कार्यक्रम होते हैं, ढेर सारी गतिविधियां होती हैं। कई ख़बरें भी होती हैं जो हम तक नहीं पहुंच पातीं। गोष्ठियां, कार्यशालाएं होती हैं, रंगकर्म की तमाम विधाओं की झलक मिलती है और लोक संस्कृति के कई रूप दिखते हैं। नए कलाकार, नई प्रतिभाएं और संस्थाएं साहित्य-संस्कृति को समृद्ध करने की कोशिशों में लगे रहते हैं लेकिन उनकी जानकारी कम ही लोगों तक पहुंच पाती है। हमारी कोशिश है कि इस खंड में हम ऐसी ही गतिविधियों और ख़बरों को शामिल करें … चित्रों और वीडियो के साथ।

हिंदी के प्रसिद्ध कवि एवं कला समीक्षक प्रयाग शुक्ल ने कहा है कि रंगमंच ऐसी कला है जिसमें सारी कलाएं रूपांतरित होकर मिल जाती हैं और मिलकर एक नई कला बन जाती है। शुक्ल ने भारंगम समारोह के दौरान" श्रुति" कार्यक्रम के तहत '' रंग प्रसंग "पत्रिका के युवा अंक का लोकार्पण करते हुए यह बात कही। प्रयाग शुक्ल ने ही इस पत्रिका का शुभारंभ किया था और इस इस अंक के अतिथि संपादक भी वहीं हैं। उन्होंने अ
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द्मविभूषण से सम्मानित महान चित्रकार सैयद हैदर रज़ा इतने नैतिक व्यक्ति थे कि वे अपने उस मकान में किरायेदार की तरह रहते थे जिसे उन्होंने अपने नाम पर बने फाउंडेशन को दे दिया था। यह जानकारी प्रख्यात संस्कृतिकर्मी एवं कवि अशोक वाजपेयी ने रज़ा साहब के अंतिम वर्षों में बनाये गए चित्रों की प्रदर्शनी “अंतिमा “के उद्घटान समारोह में दी। प्रदशनी का उद्घटान रज़ा साहब के पुराने मित्र और जाने
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साहित्य अकादेमी में भी अब अध्यात्म और सनातनी मान्यताओं को लेकर कार्यक्रम करने की तमाम पहल दिखाई देती है और भला इसके लिए महाकुंभ से बढ़कर कौन सा मौका हो सकता है। अकादमी ने महाकुंभ में कलाग्राम के मंच पर एक हिंदी कवि सम्मेलन का आयोजन किया और उसे सम्मेलन की जगह सम्मिलन कहा। इसकी अध्यक्षता प्रख्यात कवि एवं गीतकार बुद्धिनाथ मिश्र ने की।
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55वें विश्व पुस्तक मेले में हिंदी साहित्य में इस बार भी सदा की तरह स्त्रियों की आवाज़ें छाई रहीं। इस साल भी कई लेखिकाओं की पुस्तकें आई जिनमें कविता ,कहांनी ,उपन्यास ,आलोचना से लेकर अनुवाद तक शामिल है।इस बार मेले में कई विदुषी विदेशी महिला विद्वान भी आईं और उन्होंने विचार विमर्श में हिस्सा लिया।साथ ही स्त्री मुद्दे पर चर्चाएं भी आयोजित की गईं।हिंदी में स्त्री रचनाकारों की इतनी किता
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साहित्य अकादेमी द्वारा आज लिथुआनिया गणराज्य के दूतावास के संयुक्त तत्त्वावधान में एक साहित्य संध्या का आयोजन किया गया जिसमें प्रख्यात लिथुआनियाई लेखक, दार्शनिक और साहित्यालोचक यारोस्लावस मेल्निकस ने अपने कहानी-संग्रह 'द लास्ट डे' की एक कहानी का पाठ किया। भारत में लिथुआनिया दूतावास की माननीया राजदूत महामहिम डायना मिकेविचियेने ने इस कार्यक्रम की अध्यक्षता की।
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भारंगम की शुरुआत तीन दिन पहले हो चुकी है और अब लोगों की निगाह महिला निर्देशकों पर केंद्रित हो रही है। इस बार भारंगम में 24 महिला निर्देशकों के नाटक हो रहे हैं। गुरुवार को प्रसिद्ध रंगकर्मी हेमा सिंह के नाटक से इसकी विधिवत शुरुआत हो चुकी है। हेमा सिंह ने हिंदुस्तानी में आगा हश्र कश्मीरी के नाटक "ख्वाब ए हस्ती" का मंचन किया।
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू एक फरवरीसे शुरू हो रहे 55 वें विश्व पुस्तक मेले का उद्घाटन करेंगी और इस वर्ष मेले की थीम होगी - हम भारत के लोग। अगर आपने एक भी किताब लिखी तो विश्व पुस्तक मेले में आप गेस्ट राइटर हैं।
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भारत रंग महोत्सव के दूसरे दिन लोकरंग कार्यक्रम में संजय उपाध्याय के निर्देशन में नाटक बिदेसिया का 856 वीं बार मंचन किया गया। इस दौरान दर्शकों ने तालियों और सीटियों से समां बांध दिया। एनएसडी के मुक्ताकाश मंच पर शाम सात बजे इस नाटक को देखने के लिए भीड़ उमड़ पड़ी। इसका एक कारण तो यह भी रहा होगा कि यह नाटक निःशुल्क था पर इस नाटक की अपार सफलता से कुछ सवाल भी उठे। वरिष्ठ पत्रकार लेखक अरविंद कु
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भारत रंग महोत्सव के 25वें संस्करण की शुरुआत हो गई... दिल्ली में चुनाव की वजह से इसका उद्घाटन कमानी ऑडिटोरियम में न होकर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के कैंपस में ही हुआ...इस बार के रंगदूत बनाए गए अभिनेता राजपाल यादव ने तालियां बटोरीं.. मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के आने का लंबा इंतज़ार हुआ, आखिरकार उद्घाटन के बगैर नाटक रंग चिंतन शुरु हो गया... मंत्री जी आए तो लेकिन काफी देर से.. मंच पर संस्कार
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