देश विदेश के अलग अलग हिस्सों में भारतीय साहित्य, कला और संस्कृति से जुड़े तमाम कार्यक्रम होते हैं, ढेर सारी गतिविधियां होती हैं। कई ख़बरें भी होती हैं जो हम तक नहीं पहुंच पातीं। गोष्ठियां, कार्यशालाएं होती हैं, रंगकर्म की तमाम विधाओं की झलक मिलती है और लोक संस्कृति के कई रूप दिखते हैं। नए कलाकार, नई प्रतिभाएं और संस्थाएं साहित्य-संस्कृति को समृद्ध करने की कोशिशों में लगे रहते हैं लेकिन उनकी जानकारी कम ही लोगों तक पहुंच पाती है। हमारी कोशिश है कि इस खंड में हम ऐसी ही गतिविधियों और ख़बरों को शामिल करें … चित्रों और वीडियो के साथ।


जन संस्कृति मंच (जसम) उत्तर प्रदेश का आठवां राज्य सम्मेलन बांदा में 2 और 3 अक्टूबर को संपन्न हुआ। इसका उद्घाटन करते हुए वरिष्ठ कथाकार शिवमूर्ति ने कहा कि रचनाशीलता के लिए कल्पनाशीलता बहुत जरूरी है लेकिन आज हालात यह है कि हकीकत कल्पना से आगे है। हम सोच नहीं सकते, वैसे हालात हैं। स्थितियां विकट है।
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नेहरू गांधी की इस विरासत से जुड़ा एक और स्थान भी हर साल आठ सितम्बर को बरबस ही जेहन में कौंध जाता है जिसकी पहचान गांधी नेहरू परिवार के सदस्य फिरोज़ गांधी के साथ जुड़ी हुई है। यह विरासत है शहर के ममफोर्ड गंज में स्थित वह पारसी कब्रिस्तान जिसकी एक कब्र का रिश्ता पंडित जवाहर लाल नेहरु के दामाद उस फिरोज़ गांधी से है जो अपनी बेदाग़ और निष्पक्ष जनप्रिय नेता की छवि के रूप में इतिहास में दर्ज ह
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बनारस घराने के कई जाने माने कलाकारों ने संगीत से मुश्किल से मुश्किल बीमारियों के इलाज और इसके असर को लेकर कई अहम बातें कही हैं। इन कलाकारों में उस्ताद बिस्मिल्ला खां की दत्तक पुत्री जानी मानी लोक और शास्त्रीय गायिका पद्मश्री डॉ सोमा घोष और तृप्ति शाक्य के अलावा मशहूर सितारवादक पंडित देवव्रत मिश्र और वायलिनवादक सुखदेव प्रसाद मिश्र, फिल्मकार शुभेन्दु घोष और मानवाधिकार कार्यकर्
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सिल्वर लाइन प्रेस्टीज स्कूल की नेहरू नगर शाखा में आयोजित 'महफ़िल-ए-बारादरी' में कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. सीता सागर ने कहा कि "महफ़िल ए बारादरी" ने अदब की दुनिया में जल्द ही ऊंचा मुकाम हासिल कर लिया है। अपने मुक्तक एवं गीतों पर उन्होंने जमकर सराहना बटोरी। उन्होंने कहा "आईने पर नज़र नहीं रहती, फिक्र इधर कोई नहीं रहती, मेरी दीवानगी का आलम है, खुद को खुद की खबर नहीं रहती।" अगले मुक्तक में उन्ह
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आंचलिक साहित्य को मुख्य धारा में स्थापित कर देने वाले कालजयी कथाकार फणीश्वर नाथ रेणु की जन्मशती पर बंद हॉल में आयोजित महत्वपूर्ण कार्यक्रम को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उस रास्ते से गुजरने की वजह से अचानक बीच में रद्द करना पड़ा। गांधी शांति प्रतिष्ठान में आयोजित इस पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के दौरान उस वक्त अफरा तफरी मच गई जब सुरक्षाकर्मियों ने बीच में आकर कार्यक्रम खत्म क
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गाजियाबाद में साहित्य की एक स्वस्थ और समृद्ध परंपरा रही है और इसे आज के दौर में जीवंत रखने का अद्भुत काम कर रहा है मीडिया 360 लिट्ररी फाउंडेशन। कोरोना काल के दौरान करीब एक साल तक बंद पड़ी गतिविधियों के बाद जब इस संस्था ने 7 फरवरी को गाजियाबाद में कथा संवाद को फिर से शुरु किया तो मानो हर किसी के भीतर का साहित्यकार और साहित्य के प्रति उसकी जायज चिंता फिर से जाग उठी। बड़ी संख्या में लोग होट
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नए साल की शुरुआत के साथ ही कलाकारों में एक नया जोश देखने को मिला है और वो करीब नौ महीनों के बाद खुलकर अपनी कला का प्रदर्शन करने एक जगह जमा हो रहे हैं। ये पहल की है दिल्ली की नेशनल गैलरी ऑफ मॉर्डर्न आर्ट्स (एनजीएमए) ने। 2020 की तमाम बंदिशों के बाद एनजीएमए ने नए साल के पहले शनिवार और रविवार से हर हफ्ते कलाकारों के लिए ये बेहतरीन और उत्साह बढ़ाने वाला सिलसिला शुरु किया है। पहले दिन इसके मुख्य
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आज जिस इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र के सदस्य सचिव के तौर पर डॉ सच्चिदानंद जोशी के कंधे पर संस्कृति के इस विशाल केन्द्र की जिम्मेदारी है, वह केन्द्र अगर बना तो उसके पीछे कपिला वात्स्यायन की दूरदृष्टि थी। कपिला जी इसके संस्थापकों में रहीं और जोशी जी उनकी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। जोशी जी ने जो बेहतरीन काम किया वो ये कि उन्होंने कपिला जी को पूरा सम्मान दिया और इस संस्था को बड़
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