आसमान पर राज करने वाले, अपने हैरतअंगेज़ करतबों से आसमान को मुट्ठी में कर लेने वाले और दुनिया को अपनी ताकत का एहसास कराने वाले भारतीय वायु सैनिकों का जलवा देखना अपने आप में एक अनुभव से गुज़रने जैसा है। 86वें वायुसेना दिवस के मौके पर हिंडन एयरबेस पर वायुसैनिकों ने पूरी लयबद्धता और तालमेल के साथ जो एयर शो दिखाया, जिस तरह की परेड पेश की और अनुशासन का जो शानदार नमूना दिखाया उससे पूरे देश क
- कलाकारों ने कैनवास पर कलाकृतियों को किया जीवंत- योगी, बुद्ध, श्रीकृष्णा से लेकर प्रकृति के मनोरम दृश्यों को दिया आकारआबू रोड (राजस्थान)। योग-साधना में लीन योगी, गोकुल में गाय के साथ बांसुरी बजाते श्रीकृष्ण, शांत मुद्रा में ध्यान की अवस्था में राजयोगी, प्रकृति का शांत वातावरण और उगते सूरज का अनुपम नजारा। ये दृश्य पेंटिं
सिल्वर लाइन प्रेस्टीज स्कूल के धरा बचाओ संकल्प अभियान का रंगारंग समापन
गाजियाबाद। अपनी धरती को हरा भरा करने और इसे प्रदूषण से बचाने को लेकर वैसे तो कई सरकारी अभियान चलते रहते हैं लेकिन कोई स्कूल जब "धरा बचाओ संकल्प अभियान" चलाए और इस बहाने बच्चों में ये
लिखने से पहले पढ़ना बेहद अहम है – विभूति नारायण राय
'साहित्य की दुनिया न हम से शुरू होती है न हम पर खत्म'
गाजियाबाद। सोशल मीडिया के इस दौर में तमाम नए रचनाकारों की बेहतर अभिव्यक्ति तो ज़रूर नज़र आती है लेकिन वो अपने अलावा दूसरों को कितना पढ़ रहे हैं और सचमुच उनमें पढ़ने के प्रति दिलचस्पी है या नहीं, यह देखना बहुत ज़रूरी है। वरिष्ठ लेखक और उपन्यासकार विभूति नारायण राय ने गाजियाबाद के रचनाकारों के बीच अपनी यह च
अमर भारती की काव्याष्टमी में बही आध्यात्म की त्रिवेणी
पानी में प्यासी इक मछली, पानी में पानी ढ़ूंढ़ रही: अंजू जैन
गाजियाबाद। जब कोई स्कूल अपने परिसर में साहित्य औऱ संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए नियमित आयोजन करने लगे तो ये संकेत साफ जाता है कि कम से कम उस स्कूल में तैयार हो रही नई पीढ़ी के लिए साहित्य और संस्कृति की परंपरा और मूल्यों को ज़रूर अहमियत दी जाती होगी। शहर का सिल
दुष्यंत कुमार, राही मासूम रज़ा और हबीब तनवीर होने के मायने…
आज के दौर में आखिर हबीब तनवीर जैसे रंगकर्मी क्यों नहीं हो सकते? दुष्यंत कुमार की चंद लाइनें क्यों सियासी नेताओं के भाषणों का हिस्सा भर बन कर रह जाती हैं? क्यों राही मासूम रज़ा सिर्फ बी आर चोपड़ा के टीवी महाभारत के संवादों के लिए ही कभी कभार याद कर लिए जाते हैं? क्यों इन शख्सियतों को याद करने वाले चंद ही लोग बचे हैं? दरअसल आज रंगमंच और साहित्य जिस दौर में है, या कहिए कि मीडिया और अभिव्य
‘साहित्य और कला की परंपरा का जीवित रहना एक सुखद अहसास’
गांधर्व संगीत महाविद्यालय ने किया कला, संगीत और साहित्य की हस्तियों का सम्मान
गाजियाबाद में साहित्य और संस्कृति से जुड़ी तमाम गतिविधियों की कड़ी में लगातार होने वाले नाटकों, संगीत आयोजनों और साहित्य चर्चाओं ने शहर को एक नया मिजाज़ दिया है। गांधर्व संगीत महाविद्यालय के 39वें वार्षिकोत्सव कार्यक्रम के दौरान भी इसकी साफ झलक
‘सामाजिक सरोकारों के धारदार पत्रकार थे कुलदीप नैयर’
मीडिया 360 लिट्रेरी फाउंडेशन की शोक सभा में याद किए गए कुलदीप नैयर
गाजियाबाद। जाने माने पत्रकार कुलदीप नैयर को देश के तमाम हिस्सों में अपने अपने तरीके से याद किया जा रहा है। 95 साल की उम्र तक लगातार सक्रिय रहते हुए सबको अलविदा कह गए कुलदीप नैयर को गाजियाबाद में भी पत्रकारों, बुद्धिजीवियों और साहित्यकारों ने याद किया। वयोवृद्ध पत्रका
वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप तलवार ने कैसे याद किया कुलदीप नैयर को...कुलदीप नैयर
वो साठ का दशक था। कुलदीप नैयर तब एक उर्दू अखबार ‘अंजाम’ में काम करते थे। मेरी उर्दू और हिन्दी अच्छी थी और नैयर साहब उर्दू के साथ अंग्रेज़ी में काफी उम्दा लिखते थे। नैयर साहब हिन्दी में नहीं लिखते थे।
परसाई जी ने व्यंग्य को जो नए आयाम दिए, उन्होंने देश, समाज, रिश्ते-नाते, राजनीति और साहित्य से लेकर मध्यवर्ग की महात्वाकांक्षाओं को अपनी चुटीली शैली में जिस तरह पेश किया, वह अब के लेखन में आप नहीं पा सकते। हरिशंकर परसाई के विशाल रचना संसार से गुजरते हुए आपको उनके व्यक्तित्व की पूरी झलक मिल जाएगी। ये भी पता चलेगा कि दौर चाहे कोई भी हो, अगर आपका नज़रिया साफ हो, समाज और व्यक्ति