किसी भी देश की संस्कृति को विकसित करने, इसे सहेजने और खुद को अभिव्यक्त करने का एक बेहतरीन ज़रिया है साहित्य। साहित्य वो विधा है जिसके कई आयाम हैं। कहानियां, कविताएं, गीत, शायरी, लेख, संस्मरण, समीक्षा, आलोचना, नाटक, रिपोर्ताज, व्यंग्य – अभिव्यक्ति के तमाम ऐसे माध्यम हैं जिनसे साहित्य बनता है और समृद्ध होता है। साहित्य में समाज और जीवन के हर पहलू की झलक होती है। संवेदनाओं और दर्शन का बेहतरीन मेल होता है। संस्कृति और तमाम कालखंडों की और राजनीति से लेकर बेहद निजी रिश्तों तक की अद्भुत अभिव्यक्ति होती है। भाषा का एक विशाल संसार गढ़ता है साहित्य। साहित्य के मौजूदा स्वरूप, नए रचनाकर्म और छोटे बड़े साहित्यिक आयोजनों के अलावा आप इस खंड में पाएंगे साहित्य का हर रंग…


साहित्य
राजनीति के बगैर रेणु , ये रेणु न होते…
7 Rang
March 4, 2025

हमारे दो बड़े लेखक -फणीश्वरनाथ रेणु और नागार्जुन- बिहार के मिथिलांचल से थे। इनका मिथिलांचंली होना एक संयोग था मगर असली समानता उनमें दोनोंं लेखकों की विचार और कर्म के स्तर पर सक्रिय राजनीतिक सक्रियता थी। शायद रेणु की सक्रियता  ज्यादा थे। नागार्जुन यायावर थे, देशभर में घूमते रहते थे मगर रेणु को आना-जाना सामान्य रूप से ही प्रिय था(याद करें 'ऋणजल' के वे अंश जब सूखे की कवरेज के लिए आये ' द

Read More
क्या हिंदी में प्रतिरोध साहित्य काफी लिखा जा रहा है?
7 Rang
February 24, 2025

Read More
कृष्णा सोबती हिंदी की पहली सम्पूर्ण राजनीतिक लेखिका थीं
7 Rang
February 21, 2025

आपको जानकर ताज्ज़ुब होगा कि आजादी  के बाद प्रगतिशील लेखक संघ के  पहले सम्मेलन में विभाजन के खिलाफ कोई निंदा प्रस्ताव पेश नहीं  किया गया था। प्रसिद्ध आलोचक और मीडिया के जानकार जगदीश्वर ने रज़ा फाउंडेशन की ओर से आयोजित युवा कार्यक्रम में यह सनसनीखेज़ जानकारी दी। कृष्णा सोबती की जन्मशती पर आयोजित इस समारोह में उन्होंने विभाजन और सोबती जी के लेखन विषय पर एक पर्यवेक्षक के रूप में टिप्

Read More
युवा लेखन में पहले से कहीं ज्यादा गंभीरता दिखती है – वाजपेयी
7 Rang
February 21, 2025

मशहूर कवि, लेखक और  संस्कृतिकर्मी  अशोक वाजपेयी ने कहा है कि इस बार युवा कार्यक्रम में महिला वक्ताओं ने ज्यादा अच्छा प्रदर्शन किया है और उन्होंने पुरुषों को पीछे छोड़ दिया है। वाजपेयी ने रज़ा फाउंडेशन की ओर से आयोजित युवा कार्यक्रम के तहत हिंदी की यशस्वी लेखिका कृष्णा सोबती के  जन्मशती समारोह  के मौके पर यह बात कही।

Read More
‘युवा’: कृष्णा सोबती के योगदान पर सार्थक चर्चा
7 Rang
February 19, 2025

हिंदी की यशस्वी लेखिका कृष्णा सोबती क्या उभय लिंगी लेखिका थी? क्या उनकी भाषा राजनीतिक भाषा थी और उनकी लेखकीय दृष्टि और औपन्यासिक दृष्टि में कोई फांक थी? कृष्णा सोबती की जन्मशती के मौके पर रज़ा फाउंडेशन की ओर से आयोजित युवा समारोह में इन सवालों पर आरंभिक दो सत्रों में विचार हुआ।

Read More
55वां विश्व पुस्तक मेला : साहित्य में स्त्री स्वर
7 Rang
February 9, 2025

55वें विश्व पुस्तक मेले में हिंदी साहित्य में इस बार भी सदा की तरह स्त्रियों की आवाज़ें छाई रहीं। इस साल भी कई लेखिकाओं की पुस्तकें आई जिनमें कविता ,कहांनी ,उपन्यास ,आलोचना से लेकर अनुवाद तक शामिल है।इस बार मेले में कई विदुषी विदेशी महिला विद्वान भी आईं और उन्होंने विचार विमर्श में हिस्सा लिया।साथ ही स्त्री मुद्दे पर चर्चाएं भी आयोजित की गईं।हिंदी में स्त्री रचनाकारों की इतनी किता

Read More
साहित्य अकादेमी पुरस्कार प्रक्रिया में बदलाव
7 Rang
January 30, 2025

Read More
‘शिवरानी देवी अपने समय से बहुत आगे की लेखिका थीं’
7 Rang
January 22, 2025

हिंदी के जाने माने लेखक, कवि और संस्कृतिकर्मी अशोक वाजपेयी ने लेखकों खासकर महिला रचनाकारों से अपने लेखन में अपने समय को दर्ज करते हुए राजनीतिक दृष्टि अपनाने  की अपील की है। वाजपेयी ने 21 जनवरी को दिल्ली के गांधी शांति प्रतिष्ठान में प्रेमचन्द की पत्नी शिवरानी देवी के तीन कहांनी संग्रहों का लोकार्पण करते हुए यह बात कही। शिवरानी देवी के दो अनुपलब्ध कहांनी संग्रह "नारी हृदय "और" "कौमु

Read More
हिंदी साहित्य में जन्मदिन की परंपरा: संदर्भ अशोक वाजपेयी
7 Rang
January 17, 2025

अशोक वाजपेयी ने अपना 84 वाँ जन्मदिन मनाया। जब राजेन्द्र यादव 80 वर्ष के हुए थे तो उन्होंने उनक़ा जन्मदिन भी मनाया था यद्यपि उनसे उनकी नोक झोंक चलती रहती थी। क्या अशोक जी आत्म प्रदर्शन के लिए जन्म दिन मनाते हैं या हिंदी साहित्य में एक जीवंत माहौल बनाने के लिए मनाते हैं? क्या वह ऐसा कर लेखकों को एक सूत्र में बांधते हैं?

Read More
बुनती रहे हमारी अंगुलियां इकतारे की धुन पर…
7 Rang
January 7, 2025

Read More
Copyright 2024 @ Vaidehi Media- All rights reserved. Managed by iPistis