किसी भी देश की संस्कृति को विकसित करने, इसे सहेजने और खुद को अभिव्यक्त करने का एक बेहतरीन ज़रिया है साहित्य। साहित्य वो विधा है जिसके कई आयाम हैं। कहानियां, कविताएं, गीत, शायरी, लेख, संस्मरण, समीक्षा, आलोचना, नाटक, रिपोर्ताज, व्यंग्य – अभिव्यक्ति के तमाम ऐसे माध्यम हैं जिनसे साहित्य बनता है और समृद्ध होता है। साहित्य में समाज और जीवन के हर पहलू की झलक होती है। संवेदनाओं और दर्शन का बेहतरीन मेल होता है। संस्कृति और तमाम कालखंडों की और राजनीति से लेकर बेहद निजी रिश्तों तक की अद्भुत अभिव्यक्ति होती है। भाषा का एक विशाल संसार गढ़ता है साहित्य। साहित्य के मौजूदा स्वरूप, नए रचनाकर्म और छोटे बड़े साहित्यिक आयोजनों के अलावा आप इस खंड में पाएंगे साहित्य का हर रंग…


साहित्य
वयोवृद्ध कवि कृष्ण मित्र के जाने के मायने…
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November 24, 2022

वे बेशक 91 साल के हो चुके हों, लंबे समय से अस्पताल में हों लेकिन उनके भीतर का कवि आखिरी वक्त तक सांस लेता रहा। गाजियाबाद में ही वयोवृद्ध कवि कृष्ण मित्र ने अपना पूरा जीवन बिता दिया। देश उनकी कविताओं में धड़कता था। मौजूदा सियासी हालात से वह बहुत खुश नहीं थे, लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी उनके हमेशा से आदर्श रहे।

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कृष्ण मित्र की वह बात हमेशा याद आती है…
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November 24, 2022

ओज के कवि कृष्ण मित्र आज हमारे बीच नहीं हैं। ओज के इस महाकवि ने लगभग पांच दशक से भी अधिक समय तक देश-विदेश में गाजियाबाद का परचम लहराया। पिताश्री से. रा. यात्री के साहित्य होने के नाते मेरा उनसे पारिवारिक नाता तो बरसों से था। लेकिन मुझे उनका स्थाई संरक्षण करीब 38 साल पहले तब मिला जब एम. ए. करने के दौरान 1984 में मैं विनय संकोची के सानिध्य में दैनिक प्रलयंकर में उनका सहयोगी हो गया।

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साहित्य संसद बना कथा संवाद: सुरेश उनियाल
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November 22, 2022

जाने माने रचनाकार सुरेश उनियाल का मानना है कि "कथा संवाद" में हो रहा विमर्श इस आयोजन को साहित्य संसद का स्वरूप प्रदान कर रहा है। कथा संवाद के जरिए कहानी की वाचिक परंपरा समृद्ध हो रही है। 20 नवंबर को कथा सवाद की ताजा कड़ी की अध्यक्षता करते हुए सुरेश उनियाल ने कहा कि यह आम मान्यता है कि प्रकाशित हो कर ही लेखक और लेखन लोकप्रिय होता है। जबकि रामचरित मानस को वाचिक परंपरा ने ही लोक में स्थापि

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साहित्य उत्सव:‘पेज थ्री सेलिब्रिटी’ बनते रचनाकार?
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November 22, 2022

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बैठना, बतियाना और कविताएं सुनना, सुनाना…
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November 2, 2022

नई दिल्ली में 30 अक्टूबर की वह एक ऐसी शाम थी, जिसमें कोई औपचारिकता नहीं थी। कुछ कवि थे। कुछ कलाकार। कुछ प्रकाशक। कुछ शब्द प्रेमी। सब आपस में मिलने आए थे। बतियाने आए थे। सुख-दुख की बातें करने आए थे। अपने लिखे को सुनाने आए थे। दूसरों के लिखे को सुनने आए थे। वे अपना-अपना धैर्य साथ लेकर और ऊब छोड़कर आए थे।और फिर राजधानी के सिरी फोर्ट इलाके में एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स एंड लिटरेचर के सभागार की व

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…फिर ये हंगामा ऐ ख़ुदा क्या है 
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September 11, 2022

अपने देश की गंगा जमुनी तहज़ीब को शायरों ने जिस तरह देखा, महसूस किया उसे राजीव सिंह ने आज के संदर्भ में खूबसूरती से पेश किया है ... पूरी संवेदना और सामाजिक चिंताओं के साथ। इस आलेख को उन्होंने हाल के एक संदर्भ के साथ जोड़ा है जब अलीगढ़ की रूबी खान के खिलाफ कुछ मौलवियों ने फतवा जारी कर दिया। देश के मौजूदा माहौल की यह एक छोटी सी मिसाल भर है। लेकिन इसके मायने गहरे हैं।

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कथा भी, संवाद भी, रचनाकारों का स्तरीय मंच भी…
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June 27, 2022

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लघु पत्रिका आंदोलन: कुछ बातें
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May 14, 2022

हम जब भी लघु पत्रिकाओं पर विचार करते हैं तो वर्तमान में मीडिया और पत्रकारिता की भूमिका हमारे सामने होती है। यह बताने की जरूरत नहीं है कि हमारे यहां पत्रकारिता का विकास राष्ट्रीय आंदोलन के साथ हुआ। उसके सामने देश को आजाद कराने का लक्ष्य था। साहित्यकारों ने पत्रकारिता को आगे बढ़ाने और उसे जनमाध्यम बनाने का काम किया।

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मोहल्ले बंट रहे हैं मजहबों में, किसे बस्ती बसाने की पड़ी है
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May 10, 2022

गाजियाबाद में धीरे धीरे महफ़िल-ए-बारादरी का रंग जमने लगा है। कुछ ही महीनों में तमाम शायरों के लिए इस मंच ने अपनी खास जगह बना ली है। अब इस बार यानी मई की महफ़िल-ए-बारादरी की बात करें तो इसमें आपसी प्रेम और सदभाव के साथ संवेदनाओं से भरी पंक्तियों के कई रंग बिखरे। ज्यादातर शायरों और कवियों ने प्रेम जैसे शाश्वत सत्य और इंसानियत को अपनी पंक्तियों में बेहद भावपूर्ण अंदाज़ में पिरोया।

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आखिर अलविदा कह गए राम निहाल गुंजन भी
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April 19, 2022

जाने-माने मार्क्सवादी आलोचक और साहित्यकार रामनिहाल गुंजन का उनके निवास आरा (भोजपुर, बिहार) में 18 अप्रैल की रात निधन हो गया। उनकी उम्र 86 के आसपास थी। इस उम्र में भी वे जिस तरह सक्रिय थे, वह बेमिसाल है। वे कई किताबों पर काम कर रहे थे। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में लिख रहे थे।

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