
क्रांतिकारी जनवादी धारा के वरिष्ठतम कवियों में से एक ध्रुवदेव मिश्र पाषाण का जाना हिन्दी कविता और साहित्य के लिए एक सदमे वाली खबर है... पाषाण जी के लेखन से लेकर उनकी विचारधारा और जीवन संघर्ष के बारे में बता रहे हैं जाने माने कवि, पत्रकार कौशल किशोर.. पाषाण जी को 7 रंग परिवार की ओर से सादर नमन..
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श्याम बेनेगल के होने के अपने मायने थे.. उनके पास सिनेमाई कौशल के साथ अपने समाज के ज़रूरी सवाल भी रहे और उन सवालों पर सोचने को मजबूर कर देने की कला भी... समानांतर सिनेमा को भी उन्होंने उस लीक से हटाने की कोशिश की जिसे कई दफा बोझिल और उबाऊ करार दिया जाता रहा.. क्योंकि बेनेगल सिनेमा के व्याकरण को भी बखूबी समझते थे...आखिर श्याम बेनेगल के सफरनामें की क्या खासियतें रहीं जो उन्हें इ

सिनेमा को एक गंभीर ऊंचाई तक पहुंचाने वाले सत्यजीत राय के बाद अब श्याम बेनेगल भी चले गए। सार्थक और समानांतर सिनेमा के ऑइकॉन बन गए बेनेगल के लिए सिनेमा समाज की उन सच्चाइयों का आईना रहा जहां जीवन की जद्दोजहद और आम लोगों के सवाल अहम थे... बेशक वह 90 साल के हो चुके थे, डॉयलिसिस पर भी थे, लेकिन आखिरी दिनों तक अपने गंभीर प्रोजेक्ट्स को लेकर चिंतित थे... श्याम बेनेगल के कई आयाम हैं... उन



गाजियाबाद में कहानियों के सार्थक मंच और इसके सफल मासिक आयोजन ने 'कथा रंग' के बैनर तले तमाम दिग्गज कथाकारों को जोड़ने में कामयाबी पाई है। हर महीने होने वाले इस आयोजन में तकरीबन साठ सत्तर लोगों की लगातार मौजूदगी और सक्रिय भागीदारी यह साबित करती है कि कहानी लेखन को लेकर कितनी बारीक बातें लोग सुनना समझना चाहते हैं। बेशक हर बार नई नई कहानियां सामने आना , उनपर चर्चा होना और तमाम वरिष

हिन्दी सिनेमा के सबसे बड़े शो मैन राजकपूर की जन्मशती पर विशेष सिनेमा की दुनिया को बेहद करीब से समझने वाले और राजकपूर जैसे शोमैन की कलायात्रा को गहराई से महसूस करने वाले जाने माने पत्रकार और लेखक प्रताप सिंह ने उनकी जन्मशती के मौके पर बेहद संजीदगा के साथ 7 रंग के लिए ये विशेष पेशकश भेजी है... राज साहब की फिल्म यात्रा को समझने के साथ ही उन

कतरा कतरा कम होता हूं इस मौसम से यारी की, जिस्म पिघल कर बह जाता है कुछ कुछ रोज पसीने में: नबील
बारादरी में गूंजे शेर, गीत, दोहों पर देर तक झूमे श्रोता
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