
पिछले दिनों राजधानी में एक ऐसी शाम बीती जो हिंदुस्तानी संगीत की एक तपस्विनी के नाम रही जिसने संगीत के तीन घराने की गायकी की और वह एक जीता जागता इतिहास बन चुकी हैं। 23 दिसम्बर 1927 को राजस्थान में जन्मी शन्नो खुराना ने लाहौर रेडियो से 25 रुपए के पारिश्रमिक से 1945 में अपने गायन की शुरुआत की थी। पद्मविभूषण से सम्मानित शन्नो खुराना 1956 में शीला भाटिया के हीर रांझा ओपेरा से मशहूर हुई थीं। उन्हों�

हिंदी में पहली ओपेरा करनेवाली पद्मभूषण से सम्मानित प्रख्यात शास्त्रीय गायिका शन्नो खुराना का ओपेरा जब साठ के दशक में दिल्ली में हो रहा था तब तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू उसे देखने आए थे, वे आइफेक्स में आधे घण्टे तक उसे देखने आए थे लेकिन वह ओपेरा उन्हें इतना पसंद आया कि वे उसे पूरा देखना चाहते थे और इसके लिए उन्होंने विदेश से आये नेताओं के साथ अपनी अपॉइंटमेंट रद्द कर दी।