राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय ने गुजरात में किया ‘आनंद मठ’ का मंचन

केवड़िया (गुजरात), 30 अक्टूबर । राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) ने बंकिमचन्द्र चटर्जी के कालजयी उपन्यास ‘आनंद मठ’ का मंचन 30 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के मौके पर स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के समीप बने खुले रंगमंच पर किया । एनएसडी रंगमंडल द्वारा तैयार नाटक का नाट्य रूपांतरण आसिफ अली हैदर ने किया है। नाटक का निर्देशन राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक चित्तरंजन त्रिपाठी ने किया है।

इस भव्य नाट्य प्रस्तुति में लगभग 300 कलाकारों और सहयोगियों ने हिस्सा लिया। इनमें अभिनेता, ललित कला के विशेषज्ञ, डिजाइनर, शिल्पकार और लोक कलाकार शामिल थे।

वर्ष 1882 में प्रकाशित ‘आनंद मठ’ भारतीय साहित्य की महत्वपूर्ण कृतियों में से एक है। इसकी कथा 18वीं शताब्दी के संन्यासी विद्रोह की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित है। इस उपन्यास में मातृभूमि के प्रति समर्पण, देशभक्ति और बलिदान की भावना को राष्ट्रहित के लिए संघर्ष करने वाले संन्यासियों की कहानी के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है।

यह उपन्यास भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ से गहराई से जुड़ा हुआ है। यह गीत भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देशवासियों के लिए प्रेरणा का एक स्थायी स्रोत बना। 7 नवंबर 2025 से ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित स्मरणोत्सव के संदर्भ में यह नाट्य प्रस्तुति उन स्वतंत्रता सेनानियों के साहस, देशभक्ति और बलिदान को समर्पित एक विशेष रंगमंचीय श्रद्धांजलि है, जिनके संघर्ष ने भारत की स्वतंत्रता की राह को आकार दिया।

नाटक की दृश्य परिकल्पना राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की रेपर्टरी के प्रमुख राजेश सिंह ने तैयार की है, जबकि प्रकाश परिकल्पना ज्ञानदेव सिंह की है। नाटक में उपयोग की जाने वाली मंच सामग्री एवं अन्य आवश्यक वस्तुओं की डिजाइन अरुण कुमार मल्लिक ने तैयार की है।

प्रसिद्ध छऊ नृत्य गुरु एवं पद्मश्री सम्मान से अलंकृत शशीधर आचार्य ने इस नाट्य प्रस्तुति की नृत्य संरचना तैयार की है। वहीं, भारतीय फिल्म उद्योग के जाने-माने एक्शन निर्देशक अब्दुल रशीद मेहता ने नाटक के युद्ध एवं एक्शन दृश्यों का निर्देशन किया है।

नाटक का संगीत और गीत चित्तरंजन त्रिपाठी ने तैयार किए हैं। इसकी संगीत रचना में भक्ति आंदोलन और महाकवि जयदेव की प्रसिद्ध कृति ‘गीत गोविंद’ से प्रेरणा ली गई है, इसके अतिरिक्त, नाटक के गीतों में आदि शंकराचार्य द्वारा रचित ‘जगन्नाथ अष्टकम्’ का एक पद भी शामिल किया गया है।

— अरविंद कुमार

Posted Date:

October 30, 2026

10:29 pm Tags: , ,

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