
सतीश आनंद का जाना बेशक हिन्दी रंगमंच और खासकर पटना और बिहार के रंगमंच के लिए एक बड़ा शून्य पैदा करता है... बेशक तीश आनंद ने उस दौर में पटना में रंगमंच को एक नई दिशा दी और रंगकर्मियों को एक बड़ा मंच दिया जब साहित्य संस्कृति और खासकर रंगमंच एक मुश्किल दौर में था, दर्शकों को मंच तक लाना एक चुनौती थी और इसे समाज से जोड़कर एक सार्थक मिशन की तरह आगे ले जाना भी आसान नहीं था.. वो दौर था जब कालीदास र

क्या आपने कोई ऐसी पेंटिंग देखी है जिसके भीतर से कोई तेज रोशनी फूटती हो...लगता है चित्र के फ्रेम के भीतर कोई बल्ब जल रहा हो। त्रिवेणी कला संगम की गैलरी में देवास के दिवंगत चित्रकार अफ़ज़ल पठान के चित्रों को देखकर ऐसा लगता है कि उनकी पेंटिंग से कोई रोशनी निकल रही है. पिछले कई दशकों से चित्र प्रदर्शनियाँ देख रहे मशहूर कला समीक्षक विनोद भारद्वाज कहते हैं कि उन्होंने पहली बार ऐसी पेंटिं