देश विदेश के अलग अलग हिस्सों में भारतीय साहित्य, कला और संस्कृति से जुड़े तमाम कार्यक्रम होते हैं, ढेर सारी गतिविधियां होती हैं। कई ख़बरें भी होती हैं जो हम तक नहीं पहुंच पातीं। गोष्ठियां, कार्यशालाएं होती हैं, रंगकर्म की तमाम विधाओं की झलक मिलती है और लोक संस्कृति के कई रूप दिखते हैं। नए कलाकार, नई प्रतिभाएं और संस्थाएं साहित्य-संस्कृति को समृद्ध करने की कोशिशों में लगे रहते हैं लेकिन उनकी जानकारी कम ही लोगों तक पहुंच पाती है। हमारी कोशिश है कि इस खंड में हम ऐसी ही गतिविधियों और ख़बरों को शामिल करें … चित्रों और वीडियो के साथ।

त्रिलोचन की रचनाओं ने हिन्दी साहित्य को जो आयाम दिए और उनकी शैली ने जिस तरह कविता की नई परिभाषा लिखी, उससे आज के रचनाकार बहुत कुछ सीख सकते हैं। मशहूर कवि केदारनाथ सिंह ने त्रिलोचन की जन्म शताब्दी के मौके पर साहित्य अकादमी की ओर से आजित संगोष्ठी का उद्घाटन करते हुए कहा कि त्रिलोचन की कविताएं हमेशा प्रासंगिक रहेंगी। त्रिलोचन ज़मीन से जुड़े एक ऐसे रचनाकार थे जिन्हें संस्कृति और समाज
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मशहूर टीवी पत्रकार विनोद दुआ ने जब नीलिमा डालमिया आधार की नई किताब ‘द सीक्रेट डायरी ऑफ कस्तूरबा’ के हिन्दी संस्करण ‘कस्तूरबा की रहस्यमयी डायरी’ के कुछ हिस्से पढ़े और लेखिका के अनुभवों के साथ इन्हें जोड़ा गया तो लगा मानो हम एक बार फिर उस दौर में जा पहुंचे हों। नीलिमा ने बताया कि कैसे उन्होंने इस किताब को लिखते वक्त और इसके बारे में ऐतिहासिक तथ्यों की पड़ताल करते वक्त कस्तूरबा की ज
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बच्चों में बढ़ते शिक्षा के बोझ को कम करने, खेल-खेल में बच्चों को शिक्षा और स्वच्छता की सीख देने के मकसद से सरकारी विद्यालय के शिक्षक अमर दिवेद्वी, पुष्पा अरुण, रिति उपाध्याय ने कठपुतली के पात्रों को लघु कहानियों में पिरोकर, स्कूल में बच्चों के बीच उनकी रोचक प्रस्तुति का अनोखा तरीका इजाद किया है।
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गांधी हिन्दुस्तानी साहित्य सभा, तथास्तु एवं प्रिज्म थियेटर ने दिल्ली के श्रीराम सेंटर में महाभारत की महागाथा के नायकों में एक महाराज कंस की मानवीय संवेदनाओं पर आधारित नाटक कंसा का सफल मंचन किया। मंच पर महाराज कंस की भूमिका में जाने-माने कलाकार महेंद्र मेवाती ने अपने अभिनय और संवाद अदायगी से सभागार में उपस्थित दर्शकों को स्तब्ध कर दिया।
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कला में अपने अनूठे प्रयोगों के लिए मशहूर हो चुके सुरेन्द्र पाल जोशी की नई कृति ‘मैपिंग द स्पेस’ ने इन दिनों कला जगत में धूम मचा रखी है। इसके तहत इस बार उन्होंने करीब एक लाख सेफ्टीपिन्स का इस्तेमाल करेक एक विशालकाय हेलीकॉप्टर बनाया है।
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मुख्य धारा की पत्रकारिता से किस तरह कला और संस्कृति हाशिये पर चली गई है और इसे कैसे मीडिया में सम्मानजनक जगह दिलाई जाए, इसे लेकर ललित कला अकादमी खासा चिंतित है। अकादमी ने इस बारे में चिंतन और कारगर पहल करने के मकसद से दिल्ली में भारतीय भाषाओं के करीब 50 कला लेखकों का एक सम्मेलन किया।
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बरेली के आंवला में इफ्को परिसर में मनी हरियाली तीज। वर्षा ऋतु का आगमन.. आसमान में काले मेघ.. हाथों में मेहंदी और शिव पार्वती के लोक गीतों से इफको परिवार की महिलाओं ने इस मौके पर समां बांध दिया। महिला क्लब द्वारा आयोजित हरियाली तीज की थीम शिव आराधना रही। इसके लिए इफको अतिथिगृह के हाल में और झूले के साथ श्रीकृष्ण प्रतिमा का भव्य सेट तैयार किया गया।
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आम तौर पर आज के दौर में संस्कृत नाटकों का मंचन अपने देश में कम होता है, लेकिन इलाहाबाद के दर्शकों को उत्तर प्रश्नम नाम के संस्कृत नाटक ने रंगमंच के नए एहसास से भर दिया। समन्वय नामक सांस्कृतिक संस्था की सचिव सुषमा शर्मा के परिकल्पना और निर्देशन में उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र में हुए इस नाटक के लेखक हैं मीराकांत। इसका संस्कृत भाषा में रूपान्तरण किया सुरेन्द्रपाल सिंह न
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मशहूर लेखक, कवि, कहानीकार, उपन्यासकार और नाटककार जयशंकर प्रसाद की याद में भोपाल के भारत भवन में पांच दिनों का एक समारोह होने जा रहा है। इसमें प्रसाद के काव्य और गद्य के साथ उनके नाटकों पर भी विस्तृत चर्चा होगी। साथ ही प्रसाद के लेखन को आज के संदर्भ से जोड़कर उनकी सामयिकता को भी सामने लाया जाएगा।
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भरतनाट्यम शैली के अलावा कथक और अन्य नृत्य शैलियों को मिलाकर कुछ नए प्रयोग करने वाली नृत्यांगना लक्ष्मी श्रीवास्तव एक बार फिर अपनी मशहूर नृत्य नाटिक ‘उषा परिणय’ का मंचन करने जा रही हैं। इसका आयोजन भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद और उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी की ओर से 13 जुलाई को होने जा रहा है। डॉ योगेश प्रवीण इसके रचनाकार हैं और हेम सिंह ने संगीत दिया है।
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