देश विदेश के अलग अलग हिस्सों में भारतीय साहित्य, कला और संस्कृति से जुड़े तमाम कार्यक्रम होते हैं, ढेर सारी गतिविधियां होती हैं। कई ख़बरें भी होती हैं जो हम तक नहीं पहुंच पातीं। गोष्ठियां, कार्यशालाएं होती हैं, रंगकर्म की तमाम विधाओं की झलक मिलती है और लोक संस्कृति के कई रूप दिखते हैं। नए कलाकार, नई प्रतिभाएं और संस्थाएं साहित्य-संस्कृति को समृद्ध करने की कोशिशों में लगे रहते हैं लेकिन उनकी जानकारी कम ही लोगों तक पहुंच पाती है। हमारी कोशिश है कि इस खंड में हम ऐसी ही गतिविधियों और ख़बरों को शामिल करें … चित्रों और वीडियो के साथ।

हिन्दी साहित्य व संस्कृति की पत्रिका ‘रेवान्त’ की ओर से हर साल दिया जाने वाला प्रतिष्ठित ‘रेवान्त मुक्तिबोध साहित्य सम्मान - 2018’ के लिए उनका चयन किया गया था। यह सम्मान उन्हें कैफी आजमी एकेडमी, निशातगंज के सभागार में आयोजित भव्य समारोह में दिया गया जिसकी अध्यक्षता प्रसिद्ध कथाकार व उपन्यासकार शिवमूर्ति ने की। लखनऊ के साहित्य जगत के लिए यह सुखद, आत्मीय और अविस्मरणीय पल था जिसमें ब
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महात्मा गांधी को देश अपने अपने तरीके से याद कर रहा है। तमाम सरकारी और निजी संस्थाएं भी उन्हें नमन कर रही हैं। लेकिन गांधी अपने तमाम रूपों में कलाकारों के लिए भी एक प्रिय पात्र रहे हैं। गांधी जी के व्यक्तित्व और दर्शन को केन्द्र में रखकर कलाकारों ने अलग अलग कालखंडों में अपनी अभिव्यक्ति की है। अपनी विशाल और अद्भुत मूर्ति शिल्पकला के लिए दुनियाभर में मशहूर हो चुके वयोवृद्ध कलाकार पद
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हिन्दी कविता की जो सुदीर्घ परम्परा है, उसकी समकालीन काव्य धारा के शीर्ष पर गोरख पाण्डेय है। एक तरफ उनमें जहां क्रान्तिकारी विचार की गहराई है, वहीं उनका शिल्प इस कदर तराशा हुआ है कि उसका सौदर्य देखते ही बनता है। जहां समकालीन कविता में मध्यवर्गीय बौद्धिक चिन्तन हावी है जिसका आम जनता से संवाद नहीं है, वहीं गोरख अकेले या अग्रणी कवि हैं जो संवाद करते हैं। इनके काव्य में सादगी है, अभिधा क
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दुनिया के मशहूर शायर फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ के जन्मदिन के मौक़े पर आगरा और उत्तर भारत की जानी मानी सांस्कृतिक संस्था रंगलीला की ओर से 'जश्न-ए-फ़ैज़ 19' आने वाली 14 फ़रवरी की शाम 'सूरसदन' में होने वाला है। पिछले साल यानी 2018 में भी यह कार्यक्रम बेहद सफल हुआ था। और इस बार भी वैसी ही सजधज, गर्मजोशी और देश भर से आने वाले क़ाबिल उर्दू-हिंदी के क़ाबिल विद्वानों की गुफ्तगू के साथ इसका आयोजन किया जा रहा है
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भारतीय कला और लोक संस्कृति के विभिन्न आयामों को आगे बढ़ाने और कलाकारों को मंच देने के काम में जुटा किरण नादर म्युजियम ऑफ आर्ट (केएनएमए) फरवरी में तीन दिनों का चित्रकला महोत्सव करने जा रहा है। दिल्ली के साकेत में म्युजियम के परिसर में होने जा रहे इस महोत्सव में देश भर की लोक और आदिवासी कलाओं के तमाम रूपों को देखा जा सकेगा। देश के अलग अलग हिस्सों के कलाकार 8 से 10 फरवरी को होने वाले इस महो
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अपने बिंदास अंदाज़ और बेहतरीन अदाकारी के लिए मशहूर कंगना रनौत की फिल्म ‘मणिकर्णिका : द क्वीन ऑफ झांसी ’ का सबको बेसब्री से इंतज़ार है। फिलहाल इस फिल्म के दो गीत रिलीज़ हो चुके हैं। दिल्ली से सटे गुरुग्राम के किंगडम ऑफ़ ड्रीम्स में हुए एक भव्य और रंगारंग कार्यक्रम में फिल्म का दूसरा गाना ‘भारत’ रिलीज किया गया। इसके लिए खास तैयारियां की गई थीं और किंगडम ऑफ़ ड्रीम्स को राजशाही लुक दि
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लखनऊ केवल पुस्तक मेलों का शहर नहीं हैं। यहाँ अनेक स्तरीय साहित्यिक पत्रिकाओं का प्रकाशन भी होता है। रचनाकारों की गोष्ठियां और बैठकें भी होती रहतीं है जहाँ नए और पुराने साहित्यकर्मियों को साझा मंच भी उपलब्ध होता है।13 जनवरी को ऐसी ही एक गोष्ठी लखनऊ से प्रकाशित छमाही पत्रिका “ शब्दिता “ पर केन्द्रित थी। इसमें पत्रिका के जुलाई-दिसम्बर 2018 के अंक की विविधतापूर्ण रचनाओं पर विस्तार से च
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लखनऊ की मशहूर चिकनकारी को दुनिया भर में पहचान मिली है लेकिन चिकन के काम में लगे कलाकारों के जीवन और उनके दर्द को कोई नहीं जानता। हज़ारों हुनरमंद हाथ आज किस तरह अपना जीवन काटते हैं और कैसे उनके हुनर को बड़े व्यवसायी अपने लिए इस्तेमाल करते हैं.. इस पूरी यात्रा को एक युवा फोटोग्राफर अविरल सेन सक्सेना ने अपने कैमरे में बहुत करीब से देखा है।
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भोपाल के विहान ड्रामा वर्क्स के हाउसफुल प्रोडक्शन- टोटो चान के साथ, बच्चों के अंतर्राष्ट्रीय रंगमंच उत्सव जश्नेबचपन का 14वां संस्करण आज यहां संपन्न हो गया। बच्चों के लिए सर्वश्रेष्ठ रंगमंच के इस नौ-दिवसीय नाट्य उत्सव की शुरुआत जावा के एक संगीतमय नाटक- सूखा पत्ता से हुई थी, जिसमें जीवन की विभिन्न जटिलताओं के बारे में बताया गया था।
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इन दिनों रंगलीला के 'बस्ती का रंगमंच' की 2018 के शिशिर की थिएटर वर्कशॉप स्थानीय एमडी० जैन इंटर कॉलेज में चल रही है। उक्त विद्यालय की गिनती एक ओर जहाँ शहर के नामचीन स्कूलों में होती है वहीँ चारों ओर मलिन बस्तियों से घिरे इस स्कूल में बड़ी तादाद में आसपास की निर्धन बस्तियों के बच्चे भी पढ़ते।
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