नेपाल के ताज़ा हालात और लगातार अराजक होते जन विद्रोह के पीछे की वजहें क्या क्या हैं, इसपर विश्लेषण तो होने लगे हैं, लेकिन नेपाल को बेहद गहराई से समझने वाले और तीसरी दुनिया के देशों के जनांदोलनों की गहन पड़ताल करने वाले वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, संपादक आनंद स्वरूप वर्मा का विश्लेषण खास मायने रखता है। नेपाल की घटनाओं ने आनंद स्वरूप वर्मा को भीत
‘उन्मेष’ अंतरराष्ट्रीय साहित्य उत्सव 25 सितंबर से पटना में
90 सत्रों में देश विदेश के 550 लेखक होंगे शामिल100 भाषाओं का होगा प्रतिनिधित्व
नई दिल्ली, 10 सितंबर 2025। ‘उन्मेष’ अंतरराष्ट्रीय साहित्य उत्सव के तीसरे संस्करण का आयोजन इस बार पटना में 25 से 28 सितंबर 2025 के बीच सम्राट अशोक कन्व
बच्चों पर तनी बंदूकें भी हो चुकी हैं कला – मोहन राणा
धन्य धरती है जिसकी करुणा अक्षतधन्य समुंदर जिसका नमक फीका नहीं होताधन्य आकाश जो रहता हमेशा मेरे साथ हर जगह दिन रातधन्य वे बीज जो पतझर को नहीं भूलतेधन्य वे शब्द भूलते नहीं जो चौखट पर कभी बाट लगाते दुखउसकी स्मृति को
कोई भी संस्कृति बगैर कविता के फल फूल नहीं सकती – त्रिलोचन
वह 1975 का साल था। स्कूल में स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम खत्म होते ही हम दो दोस्त पटना के एलिफिन्सटन सिनेमा हॉल जा पहुंचे। भयानक भीड़ और टिकट के लिए जबरदस्त मारामारी। एक दूसरे पर चढ़ते लोग और टिकट विंडो में किसी भी तरह हाथ डालने की जद्दोजहद। आज ही के दिन शोले रिलीज़ हुई थी और हमें फर्स्ट डे फर्स्ट शो देखने का जुनून सवार था। तीन बजे के शो के लिए सुबह से ही लंबी लाइन और विं
मानवीय संवेदनाओं की अनुपम अभिव्यक्ति ‘आदाब अर्ज़ है’
रंगमंच की दुनिया में लगातार कुछ न कुछ नए प्रयोग होते रहे हैं और तमाम ऐसे रंगकर्मी हैं जो कई चर्चित नाटकों का हिन्दी रुपांतरण करके पेश करते रहे हैं। खासकर फ्रांसीसी नाटक रंगकर्मियों की पसंद रहे हैं। फ्रांसीसी नाटककार मोलिएर सत्रहवीं शताब्दी के बड़े नाटककारों में रहे और पेरिस में जन्में मोलिएर आम तौर पर अपने कॉमेडी नाटकों और बैले के लिए जाने जाते थे और उनके
किशोर कुमार के गीतों में यूडलिंग का इस्तेमाल कैसे हुआ और कैसे किशोर दा ने फिल्म झुमरू में इसका ऐसा प्रयोग किया कि वह आज तक तमाम गायकों के लिए एक मिसाल है... ऐसे तमाम पहलुओं पर, किशोर कुमार को पहचान देने वाली फिल्मों पर और बड़े भाई अशोक कुमार के साथ उनके रिश्तों पर पेश है ये चौथी कड़ी.... प्रताप सिंह की कलम से Read More
तीसरी कड़ी : कितने अलबेले और कितने अज़ीम गायक थे किशोर कुमार
यह हमें याद रखना चाहिए गमगीन-गीतों की शबाहत {FORM} को अपने हुनर का रंग देने में माहिर किशोर दा का मूल स्
अपने हर गीत में नए प्रयोग करने वाले और आवाज़ का जादू दिखाने वाले किशोर कुमार हरफ़नमौला थे। अभिनय से लेकर गीत संगीत और फिल्म निर्माण और निर्देशन तक और अपनी शख्सियत में मस्तमौला। उन्हें याद करते हुए जाने माने लेखक- सिने पत्रकार प्रताप सिंह के आलेख की दूसरी कड़ी ...
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