लिखत पोएटिका: मानवीय संवेदनाओं की मार्मिक अभिव्यक्ति
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September 15, 2025

तकलीफों की खोल के गठरी चर्चा करके सो जाना

ऐसा जीना सीधे-सीधे मरना भी हो सकता है

हिंदी फिल्म जगत के मशहूर-ओ-मारूफ गीतकार इरशाद कामिल अपने गीत

इतिहास के सबसे भीषण दौर से गुज़र रहा है नेपाल
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September 10, 2025

नेपाल के ताज़ा हालात और लगातार अराजक होते जन विद्रोह के पीछे की वजहें क्या क्या हैं, इसपर विश्लेषण तो होने लगे हैं, लेकिन नेपाल को बेहद गहराई से समझने वाले और तीसरी दुनिया के देशों के जनांदोलनों की गहन पड़ताल करने वाले वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, संपादक आनंद स्वरूप वर्मा का विश्लेषण खास मायने रखता है। नेपाल की घटनाओं ने आनंद स्वरूप वर्मा को भीत

 ‘उन्मेष’ अंतरराष्ट्रीय साहित्य उत्सव 25 सितंबर से पटना में
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September 10, 2025

90 सत्रों में देश विदेश के 550 लेखक होंगे शामिल 100 भाषाओं का होगा प्रतिनिधित्व नई दिल्ली, 10 सितंबर 2025। ‘उन्मेष’ अंतरराष्ट्रीय साहित्य उत्सव के तीसरे संस्करण का आयोजन इस बार पटना में 25 से 28 सितंबर 2025 के बीच सम्राट अशोक कन्व

बच्चों पर तनी बंदूकें भी हो चुकी हैं कला – मोहन राणा
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September 9, 2025

धन्य धरती है जिसकी करुणा अक्षत धन्य समुंदर जिसका नमक फीका नहीं होता धन्य आकाश जो रहता हमेशा मेरे साथ हर जगह दिन रात धन्य वे बीज जो पतझर को नहीं भूलते धन्य वे शब्द भूलते नहीं जो चौखट पर कभी बाट लगाते दुख उसकी स्मृति को

कोई भी संस्कृति बगैर कविता के फल फूल नहीं सकती – त्रिलोचन
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August 20, 2025

अबतक जो होता आया है उसमें जन सम्मान नहीं है उसमें मानव को मानव के सुख-दुख का कुछ ध्यान नहीं है उससे व्यक्तिवाद पनपा

एक जबरदस्त पटकथा में छिपे ‘शोले’
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August 20, 2025

वह 1975 का साल था। स्कूल में स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम खत्म होते ही हम दो दोस्त पटना के एलिफिन्सटन सिनेमा हॉल जा पहुंचे। भयानक भीड़ और टिकट के लिए जबरदस्त मारामारी। एक दूसरे पर चढ़ते लोग और टिकट विंडो में किसी भी तरह हाथ डालने की जद्दोजहद। आज ही के दिन शोले रिलीज़ हुई थी और हमें फर्स्ट डे फर्स्ट शो देखने का जुनून सवार था। तीन बजे के शो के लिए सुबह से ही लंबी लाइन और विं

मानवीय संवेदनाओं की अनुपम अभिव्यक्ति ‘आदाब अर्ज़ है’ 
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August 4, 2025

रंगमंच की दुनिया में लगातार कुछ न कुछ नए प्रयोग होते रहे हैं और तमाम ऐसे रंगकर्मी हैं जो कई चर्चित नाटकों का हिन्दी रुपांतरण करके पेश करते रहे हैं। खासकर फ्रांसीसी नाटक रंगकर्मियों की पसंद रहे हैं। फ्रांसीसी नाटककार मोलिएर सत्रहवीं शताब्दी के बड़े नाटककारों में रहे और पेरिस में जन्में मोलिएर आम तौर पर अपने कॉमेडी नाटकों और बैले के लिए जाने जाते थे और उनके

 हिन्दी गीतों में “यूडलिंग ” का आगमन और बादशाहत…    
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August 4, 2025

किशोर कुमार के गीतों में यूडलिंग का इस्तेमाल कैसे हुआ और कैसे किशोर दा ने फिल्म झुमरू में इसका ऐसा प्रयोग किया कि वह आज तक तमाम गायकों के लिए एक मिसाल है... ऐसे तमाम पहलुओं पर, किशोर कुमार को पहचान देने वाली फिल्मों पर और बड़े भाई अशोक कुमार के साथ उनके रिश्तों पर पेश है ये चौथी कड़ी.... प्रताप सिंह की कलम से  Read More

वो शाम कुछ अजीब थी, ये शाम भी अजीब है
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August 3, 2025

तीसरी कड़ी : कितने अलबेले  और कितने अज़ीम गायक थे किशोर कुमार   यह हमें याद रखना चाहिए गमगीन-गीतों की शबाहत {FORM} को अपने हुनर का रंग देने में माहिर किशोर दा का मूल स्

किशोर कुमार: हरफ़नमौला ज़िन्दगी की सिम्फ़नी
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August 3, 2025

 अपने हर गीत में नए प्रयोग करने वाले और आवाज़ का जादू दिखाने वाले किशोर कुमार हरफ़नमौला थे। अभिनय से लेकर गीत संगीत और फिल्म निर्माण और निर्देशन तक और अपनी शख्सियत में मस्तमौला। उन्हें याद करते हुए जाने माने लेखक- सिने पत्रकार प्रताप सिंह के आलेख की दूसरी कड़ी ... Read More

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