
आचार्य शिवपूजन सहाय के उपन्यास “देहाती दुनिया ‘ के सौ साल होने पर तीन दिवसीय समारोह संपन्न हो गया और इसके साथ ही इस उपन्यास को लेकर एक नया विमर्श खड़ा हो गया। 1926 में प्रकाशित यह उपन्यास हिंदी की चौथी कृति है जिसके सौ साल होने पर चर्चा हो रही है।कोई इसे कथा डायरी बता रहा तो कोई इसे विनोद कुमार शुक्ल की दीवार में एक खिड़की रहा करती थी की तरह प्रयोगधर्मी और नवाचारी उपन्यास बता रहा है।कोई प