
ग़ाजियाबाद में साहित्य की नई धारा बहने लगी है, कवियों और शायरों ने यहां समां बांध रखा है। चाहे कथा संवाद हो या बारादरी, कहानी और शायरी के नए रंग फूटने लगे हैं। कई वरिष्ठ तो कई नए रचनाकारों की सक्रियता ने यहां शब्दों और भावनाओं की रचनात्मक अभिव्यक्ति को नया आयाम दिया है। इस बार की बारादरी में मशहूर शायर और कार्यक्रम के अध्यक्ष मोईन शादाब ने कहा कि गंगा जमुनी तहजीब की महफ़िल 'बारादरी' à¤

"बारादरी" की सदारत करते हुए मशहूर शायर इकबाल अशहर ने कहा कि बारादरी हिंदुस्तानी संस्कृति की नई इबारत लिख रही है। अपने अशआर पर जमकर दाद बटोरते हुए उन्होंने फरमाया "हमको हमारे सब्र का खूब सिला दिया गया, यानी दवा दी न गई दर्द बढ़ा दिया गया। उनकी मुराद है यही खत्म न हो ये तीरगी, जिसने जरा बढ़ा दी लौ, उसको बुझा दिया गया। अहल ए सितम को रात फिर दावत ए रक्स दी गई, और बराए रोशनी शहर जला दिया गया।