रोशन कुमारी ने रोशन की कथक की दुनिया

 

बीते जमाने की मशहूर कथक नृत्यांगना रोशन कुमारी नहीं रही।  5 अक्तूबर को मुंबई में 89 साल की इस नृत्यांगना ने आखिरी सांस ली। संगीत और नृत्य की शुरुआती शिक्षा उन्होंने अपनी मां और अपने ज़माने की मशहूर गायिका जोहराबाई अंबालेवाली और अपने तबलावादक पिता चौधरी फ़कीर मोहम्मद से ली थी।

आपको सत्यजीत राय की क्लासिक फिल्म जलसाघर याद होगी, रोशन कुमारी ने उसमें अपनी यादगार भूमिका से लोगों के दिलों में जगह बनाई थी। वहीं बिमल राय की परिणीता में भी उन्होंने अपने नृत्य से दर्शकों का दिल जीता। उन्हें 1975 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से नवाजा गया जबकि 1984 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया।

सितारा देवी के बाद कथक नृत्यांगनाओं  की जो पीढ़ी आई उसमें रोशन कुमारी का नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है। लखनऊ और जयपुर घराने की कथक शैली को उन्होंने अपने खास अंदाज़ में पेश कर कथक को एक नई परिभाषा दी। पिछले काफी समय से वह गुमनामी के अंधेरे में जी रही थीं।

उन्होंने कथक की बुनियादी शिक्षा के. एस. मोरे से सीखी और अपनी पढ़ाई जारी रखते हुए मुंबई के महाराज बिंदादीन स्कूल ऑफ कथक में सुंदर प्रसाद जी से जयपुर घराने की परंपरा को आगे बढ़ाया। बाद में, उन्होंने उस्ताद गुलाम हुसैन खान और पंडित हनुमान प्रसाद से भी शिक्षा ली। सिर्फ कथक ही नहीं भरतनाट्यम शैली की भी शिक्षा उन्होंने गोविंदराज पिल्लई और महालिंगम पिल्लई से ली। मुंबई में एक नृत्य कला केन्द्र खोलकर उन्होंने नई पीढ़ी को नृत्य की शिक्षा दी। एक ज़माने में रोशन कुमारी ने पंडित जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, निकिता ख्रुश्चेव, मिल्टन ओबोटे, जॉर्डन के हुसैन और नेपाल के राजा जैसी हस्तियों के सामने भी अपनी नृत्य कला का नमूना पेश किया। फिल्मी सफर की अगर बात करें तो रोशन कुमारी बिमल राय और सत्यजीत राय की फिमों के अलावा नितिन बोस की वारिस और सोहराब मोदी के निर्देशन में बनी हिंदी और उर्दू में बनी फिल्म मिर्जा गालिब में भी काम किया। 1956 की बनी फिल्म बसंत बहार में भी उन्होंने काम किया था। 1970 में, भारत सरकार के फिल्म डिवीजन ने कथक के इतिहास और अभ्यास पर एक वृत्तचित्र जारी किया, जिसमें दमयंती जोशी, उमा शर्मा, सुदर्शन धीर और शंभू महाराज जैसे उल्लेखनीय कथक नर्तकों के अलावा रोशन कुमारी भी शामिल थीं। बाद में उन्होंने गोपी, लेकिन… (1990), चैताली (1975) और सरदारी बेगम (1996) जैसी फिल्मों में कोरियोग्राफर के तौर पर भी काम किया।

— 7 रंग के लिए अरविंद कुमार का आलेख

Posted Date:

October 7, 2026

9:39 pm

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