ब्रिक्स थिएटर फेस्टिवल से नौ देशों के बीच सांस्कृतिक रिश्ते और मजबूत

सरदार पटेल के जीवन पर आधारित नाटक “लौह पुरूष” के मंचन के साथ ही 2026 का ब्रिक्स थिएटर फेस्टिवल खत्म हो गया। ‘साझा कहानियां, साझा भविष्य’ की थीम पर आयोजित इस तीन दिवसीय महोत्सव में ब्रिक्स के नौ सदस्य और साझेदार देशों के कलाकारों, रंगकर्मियों और थिएटर संस्थानों ने हिस्सा लिया। संस्कृति मंत्रालय की ओर से आयोजित इस समारोह ने रंगमंच के माध्यम से विभिन्न देशों की संस्कृतियों को करीब लाने और आपसी समझ को बढ़ावा देने का काम किया।

समापन समारोह में संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल  मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। महोत्सव में भारत, थाईलैंड, इंडोनेशिया, रूस, ईरान, वियतनाम, दक्षिण अफ्रीका, कजाकिस्तान और इथियोपिया से 500 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान 11 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय नाटकों का मंचन किया गया, जिनमें अलग-अलग देशों की भाषाओं, सांस्कृतिक पहचान और रंगमंच की विविध परंपराओं की झलक देखने को मिली।

समापन समारोह को संबोधित करते हुए विवेक अग्रवाल ने कहा,* “ब्रिक्स ने नौ देशों को अपनी विविध रंगमंचीय परंपराओं को एक साझा मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान किया है। शास्त्रीय और पारंपरिक से लेकर समकालीन एवं प्रयोगधर्मी रंगमंचीय प्रस्तुतियों तक, प्रत्येक देश ने इस सांस्कृतिक आदान-प्रदान में अपना विशिष्ट योगदान दिया है।


उन्होंने बताया कि बृहत्तर भारत जैसी पहलों के माध्यम से हम भारत के लगभग 51 देशों के साथ रहे प्राचीन संबंधों का दस्तावेजीकरण करने की दिशा में भी कार्य कर रहे हैं। वर्ष 1926 में कोलकाता में स्थापित बृहत्तर भारत सोसाइटी के सौ वर्ष पूरे होने के इस अवसर पर, यह हमारे लिए अपने साझा इतिहास और उन समृद्ध ज्ञान परंपराओं को पुनः स्मरण करने का अवसर है, जिन्होंने सदियों से भारत को विश्व के साथ जोड़े रखा है।”

महोत्सव की अंतिम प्रस्तुति के रूप में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) रेपर्टरी कंपनी ने ‘लौह पुरुष’ का मंचन किया। हिंदी में प्रस्तुत इस भव्य नाट्य प्रस्तुति का संगीत, परिकल्पना और निर्देशन एनएसडी के निदेशक  चित्तरंजन त्रिपाठी ने किया। इस प्रस्तुति के साथ तीन दिवसीय महोत्सव का समापन हुआ।

महोत्सव के अंतिम दिन इथियोपिया, दक्षिण अफ्रीका और कजाकिस्तान की रंगमंच परंपराओं को दर्शाने वाली प्रस्तुतियां भी खास आकर्षण रहीं। इथियोपियन नेशनल थिएटर की ओर से कलैब वालेलेग्न और इयोब गेरेमेव द्वारा लिखित तथा ब्रेके तादेसे के निर्देशन में तैयार संगीतमय नाटक ‘लैंड ऑफ द एंशिएंट्स’ अम्हारिक और अंग्रेजी में प्रस्तुत किया गया। वहीं, केपटाउन के द वॉटरफ्रंट थिएटर स्कूल ने टैंडी बुकान के निर्देशन में अंग्रेजी नाटक ‘समवन’ का मंचन किया, जो रसेल होबन की रचना ‘अमैरीलिस, नाइट एंड डे’ से प्रेरित था। इसके अलावा, एम. औएजोव कजाख नेशनल ड्रामा थिएटर ने गैबिट मुसरेपोव द्वारा लिखित और एलिक नूर सुल्तान के निर्देशन में तैयार कजाख नाटक ‘क्याज़ झिबेक’ प्रस्तुत किया। इन नाटकों के जरिए दर्शकों को तीनों देशों की विशिष्ट रंगमंच परंपराओं और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को करीब से देखने का अवसर मिला।

महोत्सव में भारतीय लोक संस्कृति की झलक भी देखने को मिली। राजस्थान, उत्तराखंड, असम, ओडिशा, पंजाब और मणिपुर की पारंपरिक लोक प्रस्तुतियों ने आयोजन को और खास बनाया। इनमें कालबेलिया नृत्य, मुखौटा बान, ढोल-दमाऊ, बिहू, संबलपुरी लोक नृत्य, छऊ नृत्य, मयूरभंज छऊ, भांगड़ा और मणिपुरी नृत्य शामिल रहे। इन प्रस्तुतियों ने अंतरराष्ट्रीय नाटकों के साथ भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता को भी मंच पर जीवंत किया।

— अरविंद कुमार

 

Posted Date:

October 15, 2026

4:43 pm Tags: , ,

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