किसी भी देश की संस्कृति को विकसित करने, इसे सहेजने और खुद को अभिव्यक्त करने का एक बेहतरीन ज़रिया है साहित्य। साहित्य वो विधा है जिसके कई आयाम हैं। कहानियां, कविताएं, गीत, शायरी, लेख, संस्मरण, समीक्षा, आलोचना, नाटक, रिपोर्ताज, व्यंग्य – अभिव्यक्ति के तमाम ऐसे माध्यम हैं जिनसे साहित्य बनता है और समृद्ध होता है। साहित्य में समाज और जीवन के हर पहलू की झलक होती है। संवेदनाओं और दर्शन का बेहतरीन मेल होता है। संस्कृति और तमाम कालखंडों की और राजनीति से लेकर बेहद निजी रिश्तों तक की अद्भुत अभिव्यक्ति होती है। भाषा का एक विशाल संसार गढ़ता है साहित्य। साहित्य के मौजूदा स्वरूप, नए रचनाकर्म और छोटे बड़े साहित्यिक आयोजनों के अलावा आप इस खंड में पाएंगे साहित्य का हर रंग…
साहित्य कला परिषद के आगामी नाट्य समारोहों के लिए कलाकारों से जो प्रविष्ठियां मांगी गई हैं, उनकी शर्तें अगर पढ़िए तो साफ लगेगा कि अब सरकार कंटेंट अपने मतलब का चाहती है, स्क्रिप्ट वैसा ही चाहिए जो सरकार की नीतियों की तारीफ करे। इसके खिलाफ दिल्ली के युवा रंगकर्मियों में असंतोष है। मशहूर रंगकर्मी, निर्देशक और जन सरोकारों से जुड़े मुद्दों पर नाटक करने वाली संस्था अस्मिता के संस्थापक �
Read Moreत्रिलोचन की रचनाओं ने हिन्दी साहित्य को जो आयाम दिए और उनकी शैली ने जिस तरह कविता की नई परिभाषा लिखी, उससे आज के रचनाकार बहुत कुछ सीख सकते हैं। मशहूर कवि केदारनाथ सिंह ने त्रिलोचन की जन्म शताब्दी के मौके पर साहित्य अकादमी की ओर से आजित संगोष्ठी का उद्घाटन करते हुए कहा कि त्रिलोचन की कविताएं हमेशा प्रासंगिक रहेंगी। त्रिलोचन ज़मीन से जुड़े एक ऐसे रचनाकार थे जिन्हें संस्कृति और समाज
Read Moreमशहूर टीवी पत्रकार विनोद दुआ ने जब नीलिमा डालमिया आधार की नई किताब ‘द सीक्रेट डायरी ऑफ कस्तूरबा’ के हिन्दी संस्करण ‘कस्तूरबा की रहस्यमयी डायरी’ के कुछ हिस्से पढ़े और लेखिका के अनुभवों के साथ इन्हें जोड़ा गया तो लगा मानो हम एक बार फिर उस दौर में जा पहुंचे हों। नीलिमा ने बताया कि कैसे उन्होंने इस किताब को लिखते वक्त और इसके बारे में ऐतिहासिक तथ्यों की पड़ताल करते वक्त कस्तूरबा की ज�
Read Moreमुख्य धारा की पत्रकारिता से किस तरह कला और संस्कृति हाशिये पर चली गई है और इसे कैसे मीडिया में सम्मानजनक जगह दिलाई जाए, इसे लेकर ललित कला अकादमी खासा चिंतित है। अकादमी ने इस बारे में चिंतन और कारगर पहल करने के मकसद से दिल्ली में भारतीय भाषाओं के करीब 50 कला लेखकों का एक सम्मेलन किया।
Read Moreमशहूर लेखक, कवि, कहानीकार, उपन्यासकार और नाटककार जयशंकर प्रसाद की याद में भोपाल के भारत भवन में पांच दिनों का एक समारोह होने जा रहा है। इसमें प्रसाद के काव्य और गद्य के साथ उनके नाटकों पर भी विस्तृत चर्चा होगी। साथ ही प्रसाद के लेखन को आज के संदर्भ से जोड़कर उनकी सामयिकता को भी सामने लाया जाएगा।
Read Moreअपनी किताबों के ज़रिये मौजूदा समाज की असलियत तलाशती नीलिमा डालमिया आधार की नई किताब ‘द सीक्रेट डायरी ऑफ कस्तूरबा’ मौजूदा समाज में किसी के ‘महान’ बनने की प्रक्रिया और पुरुषवादी सोच का बारीकी से विश्लेषण करती है। गांधी को ‘गांधी’ बनाने में कस्तूरबा ने अपना क्या क्या खोया होगा, किन इम्तिहानों से गुज़री होंगी, खुद को कैसे परदे के पीछे रखकर एक ‘पतिव्रता’ और ‘आदर्श पारंपरिक’ पत्नी का
Read Moreउनके 93वें जनमदिन पर भी कुछ औपचारिकताएं निभाई जाएंगी, कुछ फूलों के गुलदस्ते उनतक पहुंचेंगे और एक संवेदनशील कवि अपनी साहित्यिक और सियासी अतीत की दुनिया के कुछ पन्ने पलटने की कोशिश करेगा। अटल जी की अच्छी सेहत के लिए दुआओं के साथ उन्हें 7 रंग की तरफ से जन्मदिन की बहुत बहुत शुभकामनाएं।
Read More'जिसका मन रंगरेज' देव प्रकाश चौधरी की चौथी किताब है। जितने खूबसूरत अंदाज में यह किताब लिखी गई है, किताब का डिजाइन भी उतना ही शानदार है। सिलसिलेवार तरीके से यह किताब अर्पणा कौर के जीवन, संघर्ष और चित्रकार के रूप में सफलता को बयां करती है। इसे पढ़ते हुए पाठक को महसूस होगा कि वह अर्पणा कौर पर कोई डॉक्यूमेंट्री देख रहा है।
Read Moreत्रिलोचन जी को गए भले ही नौ साल गुज़र गए हों लेकिन आज भी यही लगता है कि वो हमारे बीच ही हैं। उनके साथ जिन लोगों ने वक्त गुज़ारा, जिन लोगों ने उन्हें करीब से देखा और महसूस किया, उनके लिए वो हमेशा रहेंगे। अपनी कविताओं के साथ साथ अपने बेहद सरल और आत्मीय व्यक्तित्व की वजह से। ये हमारे साहित्य जगत का दुर्भाग्य है कि जो लोग...
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