संस्कृति अपने आप में बेहद व्यापक शब्द है। इसमें वो तमाम रंग शामिल हैं जो कहीं न कही समाज के मूल्यों, समृद्द परंपराओं और लोक रंगों की खूबसूरत अभिव्यक्ति होते हैं। किसी भी देश की संस्कृति ही वहां की मूल पहचान होती है और इसके अनेक आयाम होते हैं। देश के किसी कोने में वहां की संस्कृति को संवारने और समृद्ध करने की जो भी कोशिश होती है, इससे जुड़े सरकारी- गैरसरकारी जो भी आयोजन होते हैं, नई संस्कृति और जनता से जुड़ी संस्कृति के साथ साथ जो भी नए नए प्रयोग हो रहे हैं, उसे इस मंच के ज़रिये सामने लाना हमारा मकसद है…

11वें विश्व हिंदी सम्मेलन के दूसरे दिन चर्चा के केंद्र में भारतीय सांस्कृतिक विरासत ही रही। चर्चा में भाग ले रहे विद्वानों में हिंदी के प्रचार-प्रसार के साथ भारत की सांस्कृतिक विविधता और विशेषता को भी बड़े फलक पर चमकाने की ललक दिखाई दी। इस बात पर लगभग सभी एकमत दिखे कि हिंदी को विश्व भाषा बनाने के साथ भारतीय संस्कृति को भी उसी स्तर पर प्रसारित करने की जरूरत है।
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अमर उजाला के सलाहकार संपादक उदय कुमार इन दिनों पोर्ट लुई में चल रहे 11वें विश्व हिन्दी सम्मेलन में हिस्सा लेने मॉरीशस में हैं। अमर उजाला और अमर उजाला डॉट कॉम पर उदय जी वहां के सत्रों के कई पहलुओं पर लिख रहे हैं। हिन्दी फिल्मों का भारतीय संस्कृति से कितना गहरा नाता है ये बताने की कोशिश की प्रसून जोशी ने। उदय कुमार की ये रिपोर्ट हम अमर उजाला से साभार '7 रंग 'के पाठकों के लिए पेश कर रहे ह
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जिनके जीवन में रंग नहीं हैं, वृंदावन की गलियां उन्हें भी रंगीन बना देेती हैं... विधवाओं के लिए समाज में जो परंपरागत सोच है, वृंदावन उसे खारिज करता है। कहते हैं कि देश में ये इकलौती ऐसी जगह है जहां समय-असमय सफ़ेद कपड़ों में लिपट जाने वाली महिलाओं के जीवन में यहां रंग भर जाते हैं। कृष्ण भक्ति में रमी और राधे राधे करती ये महिलाएं यहां ज़िंदगी के मायने तलाशती हैं, कुछ नए रंगों को अपने जीवन
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ब्रज की होली के कई रंग हैं। ब्रज की होली की छटा अलग है, कहते हैं कि जग में होली ब्रज में होला.. बाकी ज्यादातर जगहों पर जहां होली एक दिन खेली जाती है, वहीं मथुरा, वृंदावन, गोकुल, नंदगांव, बरसाने में कुल एक हफ्ते तक होली चलती है। कान्हा के गांव नंदगांव और ब्रज की गलियों में घूमते और अपने कैमरे में होली के तमाम रंग कैद करते वरिष्ठ फोटोग्राफर रवि बत्रा ने जो रंग 7 रंग के लिए भेजा, वो आप भी देखिए.
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बनारस का अपना ही रस है। बनारस के गंगा तटों की अपनी संस्कृति है। मौज मस्ती और बिंदास जीवन शैली के अद्भुत नज़ारे आपको बनारस के सभी घाटों पर मिल जाएंगे। क्रिकेट खेलने के लिए यहां बच्चों को किसी मैदान या स्टेडियम की ज़रूरत नहीं - गंगा मइया के किनारे इसका जो मज़ा है, वो तो यहां खेलने वालों को ही पता है।
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अंतर्राष्ट्रीय कला मेला इतने बड़े पैमाने पर पहली बार हो रहा है। लेकिन इतनी कोशिशों के बावजूद मेले में मीडिया और आम लोगों की दिलचस्पी कम होने की वजह से यहां आए कलाकारों में कुछ मायूसी का भाव नज़र आ रहा है। तमाम कलाकार ये कहते नज़र आ रहे हैं कि अभी तक उनके स्टॉल का खर्च तक नहीं निकल पाया है, लेकिन उम्मीद है 18 फरवरी तक स्थितियां बदलेंगी।
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इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र में आयोजित प्रथम अंतर्राष्ट्रीय कला मेला ने रंग जमाना शुरू कर दिया है। मेले के दूसरे दिन नोबल पुरस्कार विजेता डॉ. कैलाश सत्यार्थी भी मेला देखने पहुंचे जबकि शाम में साहित्य कला परिषद् की ओर से फ्यूज़न डांस पेश किया गया। डॉ सत्यार्थी ने कई कलाकारों से मुलाकात की और उनसे उनकी कला के बारे में जाना। उनका मानना है कि देश भर के स्कूली बच्चों को और नई पीढ
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ललित कला अकादमी का पहला अंतर्राष्ट्रीय कला मेला 4 फरवरी से दिल्ली में शुरू हो गया। पहले अंतर्राष्ट्रीय कला मेला की शुरूआत करते हुए उप राष्ट्रपति एम वेंकय्या नायडू ने कला की विविधता और संस्कृति की बहुलता वाले अपने देश को दुनिया का सबसे बेहतरीन देश बताया और कहा कि यहां के रंग आपको और कहीं नहीं मिल सकते। उन्होंने कला मेले को एक शानदार पहल बताते हुए इसे कला और कलाकारों का एक अंतर्राष्
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कला और संस्कृति की बेहतरी, संरक्षण और प्रोत्साहन के लिए काम करने वाली देश की सबसे बड़ी संस्था ललित कला अकादमी 4 से 18 फरवरी तक अन्तर्राष्ट्रीय कला मेला का आयोजन करने जा रही है। दिल्ली के इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र में रोजाना 12 बजे से रात 8 बजे तक पहली बार इतने बड़े पैमाने पर हो रहे इस कला मेले में देश विदेश के कलाकार और कला समूह अपनी कलाकृतियाँ और सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश करने
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हमारे गणतंत्र की अपनी खासियत है। हमारे शौर्य, ताकत और विकास की कहानी के साथ साथ हमारी संस्कृति के तमाम रंगों से मिलकर बनता है हमारा गणतंत्र। हर साल 26 जनवरी को राजपथ पर इसकी झलक मिलती है। 69वें गणतंत्र दिवस की कुछ बेहतरीन तस्वीरें हम 7 रंग के पाठकों के लिए ले कर आए हैं जिन्हें अपने कैमरे में उतारा है जाने माने फोटोग्राफर रवि बत्रा ने। रवि के कैमरे का कमाल देखिए इस फोटो फीचर में।
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