वयोवृद्ध पत्रकार के विक्रम राव नहीं रहे। आखिरी वक्त तक लिखते पढ़ते रहे। रोज़ उनका कोई न कोई आलेख किसी भी मौजूं विषय पर पढ़ा जा सकता था। लिखने पढ़ने के साथ उन्होंने पत्रकारों के हित के लिए कई काम किए। शुरु से ही इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट (IFWJ) के अध्यक्ष रहे और पत्रकारों के तमाम सवालों को उठाते रहे। चाहे वह वेतन बोर्ड की सिफारिशों को लागू करवाना हो या फ
रवीन्द्रनाथ ठाकुर: प्रकृति और पर्यावरण से भरा संगीत और साहित्य
साहित्य अकादेमी ने साहित्य मंच कार्यक्रम में रवींद्रनाथ ठाकुर की जयंती के अवसर पर प्रकृति और पर्यावरण पर रवींद्रनाथ ठाकुर विषयक विमर्श का आयोजन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रख्यात अंग्रेजी लेखिका मालाश्री लाल ने की तथा राधा चक्रवर्ती, रेवा सोम और रेखा सेठी ने अपने अपने आलेख प्रस्तुत किए । अतुल सिन्हा की रिपोर्ट
साहित्य अकादेमी द्वारा आयोजित साहित्य मंच कार्यक्रम में 7 मई को चार रचनाकारों ने अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कीं। ये रचनाकार थे - संग्राम मिश्र (ओड़िआ), रत्नोत्तमा दास (असमिया), रीता मल्होत्रा (अंग्रेज़ी) एवं राजिंदर ब्याला (पंजाबी)। कार्यक्रम की अध्यक्षता संग्राम मिश्र ने
कथा रंग समारोह: टैगोर की मृण्मयी की कहानी खत्म नहीं हुई है
राष्ट्रीय नाटक विद्यालय के पूर्व निदेशक के देवेंद्र राज अंकुर ने कहा है कि अभिनेताओं को रंगमंच तभी करना चाहिए जब उन्हें "आत्मिक संतोष" मिले और निर्देशकों को नाटक करते समय कलाकारों को अत्यधिक स्वतंत्रता देनी चाहिए। श्री अंकुर ने कथा रंग समारोह के समापन के द
संध्या नवोदिता को दिया गया शीला सिद्धान्तकर कविता सम्मान
नई दिल्ली। युवा कवि संध्या निवेदिता को 27 अप्रैल को यहां 18 वें शीला सिद्धांतकर सम्मान से सम्मानित किया गया। इलाहाबाद की संध्या निवेदिता इन दिनों दिल्ली में लेखा परीक्षा विभाग में कार्य कर रही हैं। प्रसिद्ध इतिहासकार उमा चक्रवर्ती ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया।
हिंदी रंगमंच में आजकल बहुत कम ऐसे नाटक देखने को मिलते हैं जिनकी प्रस्तुति पूरी तरह से हर पैमाने पर खरी उतरे और उसमें एक कसाव हो। किसी नाटक का सफल होना केवल निर्देशक पर निर्भर नहीं करता बल्कि अभिनेता और नाटक के चुस्त संवादो पर भी निर्भर करता है। कहानी के रंगमंच के 50 व
आपको पता होगा कि सरकार ने डाटा पर्सनल प्रोटेक्शन एक्ट बनाया है और जल्दी ही उस एक्ट के नियम लागू होने वाले हैं। अगर यह नियम लागू हो गए तो इससे पत्रकारों की आजादी पूरी तरह छिन जाएगी और उनके लिए काम करना मुश्किल हो जाएगा। 21 अप्रैल की शाम प्रेस क्लब में इस गंभीर मुद्
जे पी की संस्था सिटीजंस फॉर डेमोक्रेसी के कार्यक्रम में उठे कई अहम सवाल
नई दिल्ली, 19 अप्रैल। आज से करीब 50 साल पहले जयप्रकाश नारायण ने दिल्ली के गांधी शांति प्रतिष्ठान में नागरिक समाज की एक संस्था “ सिटीजंस फॉर डेमोक्रेसी” की स्थापना की थी क्योंकि तब उन्हे
एक तरक्कीपसंद सोच की संजीदा और बेहद प्रतिभाशाली शख्सीयत। कभी बीबीसी रेडियो में अपनी आवाज़ का जादू बिखेरता, तो कभी इप्टा के नाटकों में अपने अभिनय से इंकलाब का संदेश देता तो कभी फिल्मों में तमाम तरह के किरदार में जान डालता एक यादगार अभिनेता। बलराज साहनी की शख्सीयत के कई आयाम हैं। उनके कई रंगों को समेटने की कोशिश कर रहे हैं जाने माने लेखक, पत्रकार और सिनेमा के तमाम आयामो