किशोर कुमार : एक अनूठे गायक की अज़ीम गायिकी के अक्स
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August 3, 2025

बेशक संगीत की दुनिया बदल गई हो, पार्श्वगायन का अंदाज़ बदल गया हो, इलेक्ट्रानिक और एआई तकनीक ने संगीत के मूल तत्व, गायन शैली, आवाज़ का अंदाज़ सबकुछ बदल दिया हो, लेकिन साठ और सत्तर के दशक के सदाबहार गायक-गायिकाओं, संगीतकारों और गीतकारों ने जो खज़ाना दे दिया, वह अमूल्य है। आज भी हरेक की वही पसंद है। किशोर कुमार, मोहम्मद रफ़ी, मुकेश, मन्ना जे, तलत महमूद, हेमंत कुमार से लेकर शमशाद

‘इन दबी सिसकियों से क्या होगा, लोग बहरे हैं चीखना होगा’
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July 21, 2025

ग़ाजियाबाद में साहित्य की नई धारा बहने लगी है, कवियों और शायरों ने यहां समां बांध रखा है। चाहे कथा संवाद हो या बारादरी, कहानी और शायरी के नए रंग फूटने लगे हैं। कई वरिष्ठ तो कई नए रचनाकारों की सक्रियता ने यहां शब्दों और भावनाओं की रचनात्मक अभिव्यक्ति को नया आयाम दिया है। इस बार की बारादरी में मशहूर शायर और कार्यक्रम के अध्यक्ष मोईन शादाब ने कहा कि गंगा जमुनी तहजीब की म

आज मीडिया एक हथियार बन गया है – हरिवंश
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July 19, 2025

राज्यसभा उपसभापति हरिवंश ने किया वरिष्ठ पत्रकार विजय विनीत की पुस्तक ‘जर्नलिज्म AI’ का लोकार्पण
  
17 जुलाई को जब गंगा की लहर

एक उपेक्षित महानायक की खोज : प्यासा
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July 17, 2025

ये महलों ये तख़्तों ये ताजों की दुनिया ये इंसाँ के दुश्मन समाजों की दुनिया ये दौलत के भूखे रिवाजों की दुनिया ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है... बेशक 1957 में आई प्यासा में साहिर लुधियानवी की इन बेहतरीन पंक्तियों को मोहम्मद रफ़ी ने जो दर्द भरी आवाज़ दी और इसे जिस किरदार ने परदे पर जीवंत कर दिया उस गुरुदत्त साहब को आ

जन सरोकारों के कथा शिल्पी थे से रा यात्री: कथा संवाद
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July 14, 2025

गाजियाबाद में साहित्य की परंपरा को एक अहम मुकाम तक पहुंचाने वाले कथा शिल्पी से रा यात्री की कथा यात्रा के कई पड़ाव रहे। उनकी कहानियों में समाज और सियासत

नया विवाद: प्रेमचंद की अंतिम यात्रा को लेकर उठे कुछ सवाल
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June 1, 2025

साहित्य में विवाद अक्सर होते रहे हैं। चाहे लेखन पर, चाहे तथ्यों को पेश करने पर, चाहे भाषा पर या बड़े लेखकों की ज़िंदगी से जुड़ी सच्चाइयों पर। कथा सम्राट प्रेमचंद की ज़िंदगी, उनके लेखन, उनकी सादगी, उनके दर्शन या पत्रकारिता को लेकर बहुत कुछ लिखा, पढ़ा और बोला जाता रहा है। उनका तकरीबन सारा साहित्य उपलब्ध भी है और उनके उपन्यास, कहानियां और लेखन आज भी सबसे ज्यादा पढ़ा भी जाता

 नितिन के कैमरे में कैद कुंभ में स्त्रियाँ
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June 1, 2025

एक युवा छायाकार अगर अपने कैमरे में आम जनता की जीवन शैली, अपने देश की परंपराएं और मनोभावों को कैद करता है, उनकी बारीकियों को पकड़ता है तो बेशक उसकी दृष्टि आने वाले दिनों में उसे एक बड़े छायाकार की संभावना जगाती है। दिल्ली में युवा फोटोग्राफर नितिन गुप्ता की फोटो प्रदर्शनी में ऐसी ही संभावनाओं से भरे चित्र देखे जा सकते हैं... विमल कुमार की एक रिपोर्ट
साहित्य ही नहीं बदला, अकादमी भी बदल गयी है
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May 31, 2025

साहित्यकारों, लेखकों के लिए और खासकर साहित्य की सबसे बड़ी अकादेमी के लिए यह विषय अहम है -  बदलते दौर में कितना बदला साहित्य। अक्सर इस विषय पर चर्चाएं होती भी रहती हैं, लेकिन इस बार यह खास इसलिए बन गया क्योंकि इसका आयोजन साहित्य अकादेमी ने राष्ट्रपति भवन परिसर के भव्य सांस्कृतिक केन्द्र में हुआ। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने इसका उद्घाटन किया और संस्कृति मंत्री स

स्त्रीवादी साहित्य पुरुष विरोधी नहीं – महुआ माजी
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May 30, 2025

साहित्य के मौजूदा स्वरूप और चुनौतियों के बारे में अक्सर चर्चाएं होती रही हैं, समकालीन लेखन से लेकर तकनीक के इस बदलते दौर में पढ़ने लिखने की छूटती आदत पर भी चिंता जताई जाती रही है, लेकिन साहित्य अकादमी ने दो दिनों तक जो चर्चा की उसमें इसके तमाम पहलू सामने आए। खास बात यह कि यह पूरा आयोजन राष्ट्रपति भवन के सांस्कृतिक केन्द्र में हुआ और खुद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने

कालजयी साहित्य की पहचान स्थायी मानवीय मूल्य की स्थापना – द्रौपदी मुर्मु
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May 29, 2025

साहित्य अकादेमी ने मौजूदा दौर में साहित्य की चुनौतियों और इसके बदले हुए आयामों पर दो दिनों का एक कार्यक्रम राष्ट्रपति भवन परिसर के सांस्कृतिक केन्द्र में आयोजित किया... इस आयोजन के बारे में बता रहे हैं अतुल सिन्हा    राष्ट्रपति भवन मे

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