यहां हम सरकार की उन तमाम कोशिशों और आयोजनों के बारे में आपको बताएंगे जो संस्कृति के तमाम आयामों से जुड़े हों। सरकारी स्तर पर होने वाले हर प्रयास और सरकारी विज्ञप्तियों और तस्वीरों के आधार पर हम यहां आपसे वो जानकारियां साझा करेंगे।

पिछले कुछ दशकों से 'इंडियन नॉलेज सिस्टम' (आईकेएस) नाम का एक प्रोजेक्ट पारंपरिक भारतीय ज्ञान को आधुनिक शिक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल करने की कोशिश कर रहा है। इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि भारत के अपने बौद्धिक इतिहास को फिर से पाने और एक अनौपचारिक सांस्कृतिक चाहत को शिक्षा का हिस्सा बनाने की कोशिश जायज़ है, लेकिन आज का आईकेएस विज्ञान को बढ़ावा देने के बदले उसे आस्था और मिथक की व
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अयोध्या इन दिनों एक बार फिर ख़ासी चर्चा में है... राम नाम की लूट है, लूट सके तो लूट.. कहावत तो आपने सुनी ही होगी। तो साहब, राम के नाम पर पहले सत्ता और अब उनके नाम पर कई हज़ार करोड़ रुपए की चोरी.. मुद्दा गरम है, लेकिन इसी बीच राम की इसी आस्था का एक बेहद आधुनिक तकनीक से लैस व्यावसायिक अभियान भी सामने आया है... खासकर उनके लिए जिनके भीतर शायद मंदिर के दर्शन करने की चाहत है, लेकिन वो इस राजनीतिक अखाड
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भारतीय संस्कृति और रचनात्मकता को बढ़ावा देने और बाज़ार तलाशने के लिए प्रसार भारती ने वेव्स (Waves) ओटीटी प्लेटफार्म बनाया है। सरकार का दावा है कि इसे अबतक 10 लाख से ज्यादा लोगों ने डाउनलोड कर लिया है।
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उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 144 साल बाद हो रहे महाकुंम्भ में "भारंगम" (भारतीय रंग महोत्सव) के एक नाटक ने लोगों का दिल जीत लिया। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक चितरंजन त्रिपाठी द्वारा निर्देशित नाटक "समुद्रमंथन " पिछले दिनों देश विदेश से आये लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा।गत वर्ष भारंगम का उद्घटान इसी नाटक से हुआ था।
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मोदी सरकार के 10 वर्ष के कार्यकाल में हिंदी के किसी प्रसिद्ध लेखक को पद्मभूषण नहीं मिला। यूं तो पद्म पुरस्कार को लेकर अक्सर विवाद होते रहते हैं लेकिन हर बार यह उम्मीद की जाती है कि सरकार उनके साथ न्याय करेगी लेकिन जब इन पुरस्कारों की घोषणा होती है तो इस तरह की कई गड़बड़ियां दिखाई देती हैं और उस पर लोग टीका टिप्पणी भी करते हैं। मीडिया में भले ये सवाल न उठते हों पर सोशल मीडिया में अब ज
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इस कोरोना समय में समाज के जिन वर्गों को और भी अधिक सीमांत की तरफ धकेला है उसमें कलाकार भी हैं। हर विधा के कलाकार- चाहे वे रंगकर्मी हों, पेंटर हों, मूर्तिशिल्पी हों, गायक हों, वादक हों, नर्तक या नृत्गांगना हों। या लोक कलाकार हों। फिल्मों में काम करनेवाले हों। देश के बड़े बड़े शहरों से जो खबरें (गावो से भी) आ रही हैं वे तो यही बता रही हैं कि युवा और संघर्षशील कलाकारों की जान पर बन आई है।
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राजेश कुमार राजनीतिक व विचार प्रधान नाटकों के लिए जाने जाते हैं। उन्हें उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी की ओर से 2014 के लिए नाटक लेखन के लिए पुरस्कृत किये जाने की घोषणा की गयी है। वैसे राजेश कुमार इन पुरस्कारों से बहुत ऊपर हैं। हिन्दी रंगमंच और नाट्य लेखन के क्षेत्र में उनका सृजनात्मक काम विशिष्ट है। उनके आसपास भी कोई नहीं दिखता। उनके जैसा प्रतिबद्ध और प्रयोगधर्मी भी कोई नहीं।
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भारत में ग्रैफिटी कला अब एक नए रूप में सामने आ रही है। ग्रैफिटी यानी दीवारों पर बनाए जाने वाले विशाल चित्रों की श्रृंखलाएं या किसी थीम पर की जाने वाली वॉल पेंटिंग। प्रयागराज का अर्धकुंभ भी इस बार इस कला का गवाह बना है।
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कुंभ आपने पहले भी देखा होगा। इसके बारे में सुना होगा। तस्वीरों में और चैनलों पर देखा होगा। हर 12 साल में लगने वाले कुंभ की खासियत के बारे में जाना होगा। 2013 में पूर्ण कुंभ का नज़ारा भी देखा होगा और इस बार के अर्धकुंभ की शानदार झलक भी देख रहे होंगे। देश की संस्कृति का एक बेहतरीन आयाम देखने को मिलता है इस महाआयोजन में। इस बार उत्तर प्रदेश सरकार और यहां तक कि केन्द्र सरकार ने इस अर्धकुंभ को
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रबीन्द्र भवन स्थित ललित कला अकादेमी आर्ट गैलरीज़ में आज गढ़ी विंटर शो 2018 का शुभारम्भ उत्तरी दिल्ली के मेयर श्री आदेश कुमार गुप्ता और अकादमी के अध्यक्ष श्री उत्तम पाचारणे द्वारा किया गया। शो का उद्घाटन संस्कृति मंत्रालय की संयुक्त सचिव (अकादमी और संग्रहालय) श्रीमती निरुपमा कोत्रु, अकादमी के सचिव राजन श्रीपद फुलारी व अन्य गणमान्यों की गरिमामय उपस्थिति में हुआ. इस अवसर पर बड़ी संख्या
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