संगीत और नृत्य का गहरा नाता है। बिना संगीत के नृत्य नहीं हो सकता। लय और ताल के साथ साथ भाव भंगिमाओं और मुद्राओं का नृत्य में खास महत्व है। खासकर भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य की परंपराएं पूरी दुनिया में सबसे बेहतरीन हैं। यहां की नृत्य शैलियों में हमारी पौराणिक कथाएं भी हैं, जीवन दर्शन भी है और सामाजिक-सांस्कृतिक अभिव्यक्तियां भी हैं। कथक, भरतनाट्यम, कथकली, ओड़िसी, मणिपुरी के अलावा लोक व आदिवासी जैसी तमाम ऐसी नृत्य शैलियां हैं जो हमारी संस्कृति को समृद्ध करती हैं। इस खंड में ऐसे तमाम कलाकारों और प्रस्तुतियों की झलक मिलेगी जो आम तौर पर मुख्य धारा की मीडिया में नज़र नहीं आती।

लखनऊ में उत्तर प्रदेश नाटक अकादमी के संत गाडगे सभागार में नृत्य नाटिका ऊषा परिणय का मंचन किया गया। पौराणिक कथा में संगीत नृत्य के अद्भुत संगम ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस नृत्य नाटिका में वाणासुर, कृष्ण और शिव के मन में ऊषा और अनिरुद्ध कोे परिणय को लेकर चल रहे अंतर्द्वंद की कहानी को दर्शकों के सामने पेश किया गया।
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